कुमार अभिनंदन, बोकारो थर्मल
जब इंसान जिद पर आ जाता है तो कुछ भी कर गुजरता है। मॉउनटेन मैन दशरथ मांझी की कहानी सभी जानते हैं, कि कैसे पहाड को काटकर रास्ता बना दिया। इसी प्रकार बेरमो अनुमंडल के नावाडीह प्रखण्ड अन्तर्गत गोनियाटों के एक किसान नंदलाल महतो को पानी की समस्या थी। पीने से लेकर खाना बनाने तक पानी की व्यवस्था के लिए परेशान रहते था। इस समस्या के निदान के लिए वह प्रखण्ड कार्यालय से संपर्क किया और एक कुआं के लिए अनुरोध किया। लेकिन उसे एक कुआं के लिए चक्कर लगाते लगाते तीन साल गुजर गया मगर कुआं नहीं मिला। जब वह थक गया तो परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर पानी की समस्या के निदान के लिए एक घर के समीप खेेत पर ही कुआं खोद दिया। इस संबंध में नदंलाल महतो ने बताया कि उसके गांव मेंसार्वजनिक रूप से कोई पानी पीने के लिए स्थाई व्यवस्था नहीं है। पूर्व में जो चापाकल बने थे वे खराब हो चुके है। अब उन्हें एक किलोमीटर दूर नदी से पानी लाना पडता था। इसलिए वह नावाडीह प्रखण्ड कार्यालय में मनरेगा योजना के तहत मिलने वाली कुआं के लिए रोजगार सेवक से लेकर अन्य पदाधिकारियों से मिला और एक अदद कुआं देने की मांग की। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उन्हें लगातार आश्वासन देते रहे लेकिन उन्हें कुआं नही मिला। जब वह प्रखण्ड कार्यालय का चक्कर काट कर थक गया तब एक दिन वह अपने परिवार के साथ बैठकर विमर्श किया कि अब वे किसी सरकार के भरोसे नहीं रहेंगे। वे पानी के लिए स्वंय कुआं खोद कर पीने का साधन जुगाड़ करेंगे। नंदलाल और उसका एक बेटा सुनील महतो पत्नी शांति देवी और बहु गुडिया देवी ने मिलकर लॉकडाउन के दौरान कुआं का खुदाई करना शुरू किया। अब वह कुआं बनकर तैयार हो गया है। किसान नंदलाल को इस बात का सुकुन है कि पानी के लिए अब उसके महिलाओं को किसी सरकार या किसी घर के भरोसे नहीं रहना पडेगा।

जब सरकार ने नहीं सुनी तो परिवार के साथ मिलकर खोद दिया कुआं




