उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी ने मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को बिजली और किसानों की समस्या को लेकर सदन में हंगामा किया और सरकार विरोधी नारेबाजी की। सदन की कार्यवाही शुरु होते ही सपा सदस्य नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गये और सरकार विरोधी नारेबाजी शुरु कर दी। सपा सदस्य अपने हाथों में तख्तियां लिये हुये थे जिसमें ‘संविधान के विरोधी, सरकार चलाएं राम सहारे’, ‘विकास विरोधी यह सरकार, नहीं चलेगी, नहीं चलेगी’ और भाजपा सरकार मस्त है, कानून व्यवस्था ध्वस्त है’ जैसे नारे लिखे थे। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अपील के बाद सदस्य अपनी सीटों पर जाकर बैठ गये जिसके बाद नेता सदन योगी आदित्यनाथ ने नये मंत्रियों का परिचय सदन को कराया। नये सदस्यों में पंचायती राज, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर, कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान, विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार और इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील कुमार शर्मा शामिल थे। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय का परिचय कराते हुए कहा ‘‘ सदन के वरिष्ठ सदस्य सात बार के विधायक और दो बार विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं।”
गौरतलब है कि विधानसभा के मॉनसून सत्र की पूर्व संध्या में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर श्री पांडेय को नेता प्रतिपक्ष बनाये जाने का अनुरोध किया था। यह पद सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सांसद चुने जाने के बाद विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की वजह से रिक्त हुआ था।
सोमवार को ऊर्जा मंत्री के बयान से भड़के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पाटर्ी (सपा) के सदस्यों ने जमकर हंगामा किया और सदन से वॉक आउट किया। दरअसल, बिजली मंत्री अरविंद कुमार शर्मा सदन में बिजली बिल की वसूली में अनिमियतिता और किसानो के उत्पीड़न संबंधी शिकायत का जवाब दे रहे थे। उन्होने सपा पर कटाक्ष करते हुये कहा कि उन्होने बलिया दौरे के दौरान बिजली संबंधित एक शिकायत पर एक ‘यादव जी’ को निलंबित कर दिया। ऊर्जा मंत्री द्वारा इंजीनियर की बजाय उसकी जाति विशेष के उल्लेख पर कड़ी आपत्ति जताते हुये नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने विधानसभा अध्यक्ष से व्यक्तव्य को सदन की कार्यवाही से निकाले जाने की मांग की जिसे अस्वीकार करने पर सपा सदस्य वेल पर आकर नारेबाजी करने लगे। विधानसभा अध्यक्ष ने सपा सदस्यों को अपनी सीट पर जाने का अनुरोध किया लेकिन विपक्षी सदस्य ऊर्जा क्षेत्र में अनियमितिता व्याप्त होने का आरोप लगाते हुये इस पर चर्चा की मांग करते रहे जिसे स्वीकार नहीं किये जाने पर वे सदन से वॉकआउट कर गये। इसके पहले विधानसभा में सोमवार को प्रश्नकाल के बाद सपा सदस्य आरके वर्मा ने नियम 56 (कार्यस्थगन) के तहत सदन की कार्यवाही रोककर दो घंटे तक बिजली व्यवस्था पर चर्चा कराये जाने की मांग की। शर्मा ने सदन में कहा कि राज्य में बिजली की समस्या के लिये पिछली सरकारें जिम्मेदार है जिन्होने ठीक काम नहीं किया, जो किया भी उसमें गुणवत्ता का पालन नहीं किया गया। उन्होने कहा कि पूरे देश में सबसे ज्यादा विद्युत आपूर्ति उत्तर प्रदेश में हो रही है। 30,618 मेगावॉट की बिजली की आपूर्ति उत्तर प्रदेश में हो रही है। भारत के इतिहास में किसी भी राज्य में पहले कभी भी इतनी बड़ी आपूर्ति नहीं हुई। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि सपा सरकार के समय से ढाई गुना ज्यादा बिजली हम दे रहे हैं। वर्ष 2013-14 का मैक्सिमम लोड था 12,327 मेगावॉट। अब इसकी हमारे कार्यकाल से तुलना करें तो साफ देख सकते हैं कि ढाई गुना से ज्यादा यानी 30,618 मेगावॉट की आपूर्ति योगी सरकार में हो रही है। 2013-14 में 81,598 मिलियन यूनिट की सप्लाई की गई थी। जबकी, योगी सरकार ने वर्ष 2023-24 में 1,47,701 मिलियन यूनिट यानी दोगुनी बिजली सप्लाई की है।
शर्मा ने कहा कि सपा सरकार के समय जिन लोगों तक बिजली पहुंचाने का कार्य नहीं हुआ था, वह भी योगी के नेतृत्व में लाभान्वित हो रहे हैं। ऐसे डेढ़ लाख मजरे जिनकी तरफ सपा सरकार ने देखा ही नहीं था, इनमें से 1.21 लाख मजरे वर्ष 2017 के बाद विद्युतीकृत हुए हैं। उत्तर प्रदेश अब देश में किसानों को सबसे ज्यादा बिजली देने वाला प्रदेश बन चुका है। हमने इस साल भारत सरकार से गुजारिश करके 19,503 मजरों के लिए 917 करोड़ रुपए की योजना मंजूर करवाई है और जल्द ही यहां भी हम बिजली देने का कार्य करने जा रहे हैं। विपक्ष किसानों को लेकर बड़ी बड़ी बातें करता है, मगर हमारी सरकार में किसानों के बिजली का बिल माफ कर दिया गया है। विपक्ष ने वर्ष 2012-13 में किसानों को कुल 25 हजार कनेक्शन (25,112) दिए थे, 2013-14 में 18 हजार, 2014-15 में 34 हजार व 2015-16 में 29 हजार कनेक्शन दिए गए। वहीं, हमने 2022-23 में 70,545 तथा 2023-24 में 63 हजार कनेक्शन दिए हैं। फसलों की सिंचाई के लिए 10 घंटे की छूट को बढ़ाकर हमारे कार्यकाल में 12 घंटे कर दिया गया है।
बिजली मंत्री ने कहा कि विपक्ष ने प्रक्रियाओं को सही ढंग से पूरा किया होता तो ऐसी दिक्कतें न होतीं। आपने इनफ्रास्ट्रक्चर में इनवेस्ट नहीं किया था इसलिए यह स्थिति बनी है। 2017-18 में 33/11 केवी के 4,092 उपकेंद्र थे, आज 4507 हैं। 765 केवी का जो सबसे बड़ा ट्रांसमिशन का सबस्टेशन होता है वह प्रदेश में 65-70 साल में केवल 4 थे। इनकी संख्या डबल करते हुए 7 कर दिया गया है। 400 केवी के ट्रांमिशन 2017-18 में 14 थे, जिसे अब बढ़ाकर 29 कर दिया गया है। 2017-18 में 20 केवी के ट्रांसमिशन 72 थे जिसे बढ़ाकर 166 कर दिया गया है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में हमने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में एनटीपीसी के साथ 800 मेगावॉट की 2 यूनिट स्थापित करने का एमओयू किया था, इस पर काम शुरू कर दिया गया है। शर्मा ने बताया कि अनपरा में 800 मेगावॉट की दो यूनिट लगाने का एमओयू हो गया है तथा धरातल पर काम होना शुरू हो गया है। 3 यूनिट के जरिए 1800 मेगावॉट प्रोडक्शन की ओर भी हम तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। हमने बाहर से और बिजली लेने के लिए भी तथा कोयले की खदानों का उपयोग करते हुए 1600 मेगावॉट के नए पावरप्लांट लगाने की निविदा जारी कर दी है। हम अपनी थर्मल एनर्जी कैपेसिटी को दोगुना बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं। सोलर ऊर्जा पर भी फोकस करके प्रदेश में हम यह कैपेसिटी बढ़ा रहे हैं। सोलर में हम 5000 की कैपेसिटी एड करने वाले हैं, पंप स्टोरेज में हम 2500 मेगावॉट व थर्मल में 10,600 मेगावॉट की कैपेसिटी बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं। वर्तमान क्षमता से 5 गुना ज्यादा क्षमता हम अगले 10 वर्षों में विकसित करने जा रहे हैं।
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