नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली में खाद्य तेल की शुद्धता को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। जिले के नामी उद्योग समूह बीएल एग्रो और उससे जुड़े कारोबारी घनश्याम खंडेलवाल पर मिलावटी सरसों तेल के उत्पादन और बिक्री के गंभीर आरोप लगे हैं। इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब वरिष्ठ भाजपा नेता और जिला सहकारी संघ के पूर्व चेयरमैन महेश पाण्डेय ने उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव (सतर्कता) को पत्र लिखकर न केवल मिलावटखोरी की शिकायत की, बल्कि इस पूरे नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी कर डाली।
महेश पाण्डेय ने अपने शिकायत पत्र में आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार द्वारा मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बरेली में छापेमारी तो की गई, लेकिन कार्रवाई चुनिंदा ढंग से हुई। उनका कहना है कि खंडेलवाल समूह की एक इकाई पर कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन उसी समूह की प्रमुख कंपनी बीएल एग्रो से सैंपल लेने के बावजूद अधिकारियों ने लापरवाही बरती है। पाण्डेय के मुताबिक, यह लापरवाही संदेह पैदा करती है और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीएल एग्रो द्वारा उत्पादित सरसों तेल और अन्य खाद्य तेलों में बड़े पैमाने पर मिलावट की जा रही है। उनके अनुसार, कंपनी अपने रिकॉर्ड में जितना उत्पादन और बिक्री दिखाती है, वास्तविकता में उससे कई गुना अधिक तेल बिना बिल के बेचा जाता है। यह पूरा खेल कथित रूप से सरकारी विभागों में तैनात अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है।
पाण्डेय ने अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए एक अहम तर्क भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर सरसों की खेती के वास्तविक रकबे का आंकलन किया जाए और उसकी तुलना बाजार में उपलब्ध सरसों तेल की मात्रा से की जाए, तो साफ हो जाएगा कि उत्पादन के आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते। उनका दावा है कि बरेली समेत अन्य क्षेत्रों में जितनी सरसों की खेती होती है, उससे कई हजार गुना अधिक तेल बाजार में उपलब्ध है, जो अपने आप में मिलावट की ओर इशारा करता है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सरसों तेल के नाम पर बड़े पैमाने पर रिफाइंड तेल मिलाकर उसे बेचा जा रहा है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को धोखा दिया जा रहा है, बल्कि उनके स्वास्थ्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ हो रहा है। पाण्डेय ने आरोप लगाया कि इस तरह के तेल के लंबे समय तक सेवन से लोगों में बवासीर, लीवर और किडनी की बीमारियां बढ़ रही हैं, वहीं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा भी बढ़ रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से यह मुद्दा उठाया कि बीएल एग्रो का तेल सरकारी विभागों, खासकर कारागारों में सप्लाई किया जा रहा है। ऐसे में न्यायिक अभिरक्षा में रहने वाले बंदियों को भी कथित रूप से मिलावटी तेल का सेवन करना पड़ रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह मामला मानवाधिकार और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है।
महेश पाण्डेय ने अपने पत्र में यह भी मांग की कि बीएल एग्रो और उससे जुड़े अन्य प्रतिष्ठानों की संपत्ति की जांच कराई जाए। उनका दावा है कि कंपनी के प्रमोटर्स घनश्याम खंडेलवाल और दिलीप खंडेलवाल की संपत्ति में पिछले तीन दशकों में असामान्य वृद्धि हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह वृद्धि वैध आय के मुकाबले कई हजार गुना अधिक है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
इस पूरे मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की ओर से भी कार्रवाई का दावा किया गया है। सहायक आयुक्त (खाद्य)-II, बरेली द्वारा जिलाधिकारी को भेजी गई आख्या में बताया गया है कि शिकायत के आधार पर 23 फरवरी 2026 को राज्य सचल दल ने बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड, परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र, बरेली में छापेमारी की। इस दौरान सोयाबीन ऑयल, मस्टर्ड ऑयल और विटामिन प्रीमिक्स के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए राजकीय खाद्य प्रयोगशाला, लखनऊ भेजा गया।
इसके बाद 11 मार्च 2026 को एक और कार्रवाई करते हुए ‘बैल कोल्हू’ ब्रांड के कच्ची घानी सरसों तेल का 500 एमएल पैक नमूना भी लिया गया और उसे जांच के लिए झांसी प्रयोगशाला भेजा गया। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
एफएसडीए की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता महेश पाण्डेय को इस कार्रवाई की जानकारी दे दी गई है और वे इससे संतुष्ट हैं। हालांकि, पाण्डेय ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
महेश पाण्डेय का कहना है कि विभाग की कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने छापेमारी की सूचना सार्वजनिक नहीं की, जबकि उसे प्रेस विज्ञप्ति जारी करनी चाहिए थी ताकि जिन उपभोक्ताओं तक यह तेल पहुंचा है, वे सतर्क हो सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि जब दिलीप खंडेलवाल की इकाई पर कार्रवाई हुई थी, तब विभाग ने न केवल सामान जब्त किया बल्कि प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की थी। लेकिन बीएल एग्रो के मामले में ऐसा नहीं किया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। पाण्डेय ने जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि जिन बिंदुओं पर उन्होंने शिकायत की थी- जैसे कच्चे माल का स्रोत, उत्पादन की वास्तविक मात्रा, और सप्लाई चेन, उनकी जांच नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि खाद्य प्रयोगशालाओं में बैठे कुछ लोग पैसे लेकर मिलावटखोरी के मामलों में अनुकूल रिपोर्ट दे देते हैं, और इस मामले में भी ऐसा ही होने की आशंका है।
उन्होंने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच केवल खाद्य विभाग तक सीमित न रखी जाए, बल्कि उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान या आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) की संयुक्त टीम से कराई जाए। साथ ही, अगर जांच में अवैध संपत्ति का खुलासा होता है, तो उसे तत्काल जब्त किया जाए।
इस मामले ने बरेली में खाद्य सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर विभाग कार्रवाई का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता इसे अधूरा और संदिग्ध बता रहे हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
फिलहाल, यह मामला न केवल बरेली बल्कि पूरे प्रदेश में खाद्य तेल की गुणवत्ता और नियामक तंत्र की विश्वसनीयता पर एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक कंपनी का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय करने वाला बड़ा मुद्दा बन सकता है।
इस संबंध में जब बीएल एग्रो के मालिक घनश्याम खंडेलवाल से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।

बरेली में सरसों तेल में मिलावट का खेल : बीएल एग्रो पर छापेमारी के नाम पर खानापूर्ति, जांच पर उठे सवाल, वरिष्ठ भाजपा नेता और जिला सहकारी संघ के पूर्व चेयरमैन महेश पांडेय ने आय से अधिक संपत्ति के आरोपों पर भाजपा नेता और कंपनी मालिक घनश्याम खंडेलवाल को घेरा, पढ़ें क्या है पूरा मामला?




