नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली जिले की बिथरी विधानसभा सीट एकमात्र ऐसी विधानसभा सीट है जहां मौजूदा विधायक डॉक्टर राघवेंद्र शर्मा अपना दबदबा बरकरार नहीं रख पा रहे हैं। उनकी स्थिति पहले से काफी कमजोर नजर आ रही है जिसके चलते पार्टी में अन्य दावेदार तेजी से अपनी तैयारी में जुट गए हैं। हाल ही में राघवेंद्र शर्मा के अस्पताल को लेकर बिजली विभाग की कार्रवाई के बाद राघवेंद्र शर्मा का ग्राफ और गिरा है। यही वजह है कि इस सीट से तीन अन्य नेताओं ने अपना चुनावी गणित बिठाना शुरू कर दिया है। इनमें पूर्व विधायक राजेश कुमार मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल, भाजपा के उत्तर प्रदेश के पूर्व सह संगठन मंत्री भवानी सिंह के सहायक रहे नारद मुनि और पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप का नाम सामने आ रहा है।

बता दें कि बिथरी का इतिहास हमेशा दबंग नेताओं का ही रहा है। वीरेंद्र सिंह पटेल और पप्पू भरतौल का नाम भी इनमें शामिल है। पूर्व राज्यसभा सांसद और समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव भी इसी सीट से दो बार चुनाव लड़ चुके हैं। पिछले चुनाव से यह परिपाटी कुछ बदली है। यहां पहली बार तीनों प्रमुख दलों ने दबंग नेताओं को मैदान में नहीं उतारा। भाजपा ने डॉक्टर राघवेंद्र शर्मा को, सपा ने इंजीनियर अगम मौर्य को और कांग्रेस ने वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी अलका सिंह को उम्मीदवार बनाया था। इस प्रयोग में भाजपा बाजी मार ले गई और मौजूदा विधायक पप्पू भरतौल का टिकट काटकर मैदान में उतारे गए डॉक्टर राघवेंद्र शर्मा विधायक बन गए। पप्पू भरतौल इस उम्मीद में खामोश बैठ गए कि शायद पार्टी उन्हें कहीं और एडजस्ट कर दे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अबकी बार पप्पू भरतौल पूरी तरह से मोर्चा खोल चुके हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पप्पू भरतौल जिस दबंगई के साथ सरकारी अधिकारियों से जनता के काम करवा लेते थे उस अंदाज में राघवेंद्र शर्मा नहीं करवा पा रहे हैं। यही वजह है कि विधायक भले ही राघवेंद्र शर्मा हैं लेकिन अधिकतर जनता अपने काम करवाने के लिए आज भी पप्पू भरतौल के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पप्पू भरतौल इस बार पुरजोर तरीके से दावेदारी जताएंगे और अगर पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय भी मैदान में उतर जाएंगे। उनके समर्थक भी यही चाहते हैं। पप्पू भरतौल के समर्थकों का कहना है कि पार्टी ने उन्हें पिछली बार धोखा दिया। उन्हें टिकट नहीं दिया तो कोई बात नहीं लेकिन जिस तरह से भोजीपुरा से चुनाव हारने वाले बहोरन लाल मौर्य को एमएलसी बना दिया, बहेड़ी से हारने वाले छत्रपाल गंगवार को लोकसभा पहुंचा दिया और टिकट काटने के बाद संतोष गंगवार को झारखंड का राज्यपाल और राजेश अग्रवाल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बना दिया उसी तरह पप्पू भरतौल को भी सम्मान दिया जाना चाहिए था। रही सही कसर राघवेंद्र शर्मा के कमजोर नेतृत्व ने पूरी कर दी है। अब अगर पप्पू भरतौल निर्दलीय मैदान में उतरते हैं तो भाजपा यह सीट किसी भी सूरत में जीत नहीं पाएगी क्योंकि पप्पू भरतौल खुद भले ही चुनाव न जीत पाएं लेकिन भाजपा का खेल बिगाड़ने का दम वो आज भी रखते हैं। ब्राह्मण सीट होने के नाते अगर उम्मीदवार बदला जाता है तो पप्पू भरतौल विकल्प हो सकते हैं।
इस कड़ी में दूसरा नाम धर्मेंद्र कश्यप का है। बताया जाता है कि धर्मेंद्र कश्यप की नजर दातागंज और बिथरी, दोनों ही सीटों पर है।

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद उन्हें अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सताने लगी है। चर्चा है कि वह अपनी पुत्री कीर्ति कश्यप को भी मैदान में उतारना चाहते हैं। चर्चा यह भी है कि अगर धर्मेंद्र कश्यप को भाजपा में अपनी नाव डूबती नजर आई तो वह साइकिल पर भी सवार हो सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि उनकी सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात भी हो चुकी है लेकिन उनकी प्राथमिकता भाजपा है।
इनके अलावा एक नाम भाजपा के सह संगठन मंत्री रहे स्वर्गीय भवानी सिंह के सहायक नारद मुनि का भी सामने आ रहा है।





