नीरज सिसौदिया, बरेली
फरीदपुर सुरक्षित विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे स्वर्गीय डॉ. सियाराम सागर की पुण्यतिथि पर उनका पूरा परिवार पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक हो गया। सियाराम सागर की पुण्यतिथि पर फरीदपुर में सियासत के नए अध्याय की शुरुआत हुई। समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष शिवचरन कश्यप और पूर्व जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव सहित सैकड़ों लोगों ने इस अवसर पर डॉ. सियाराम सागर की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया और इस परिवार मिलन के गवाह बने।
बता दें कि स्वर्गीय सियाराम सागर के छोटे भाई चंद्रसेन सागर की ओर से 15 जुलाई को श्री रामबक्स गोमती इंटर कॉलेज, खजुरिया संपत में सियाराम सागर की छठी पुण्यतिथि पर एक श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया था। इसमें उन्होंने अपने दिवंगत भाई के पुत्र विशाल सागर, डीके सागर और उनके पूरे परिवार को आमंत्रित किया था। साथ ही जिला अध्यक्ष शिवचरन कश्यप एवं पूर्व जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव अतिथि के तौर पर शामिल हुए। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में यह परिवार फिर से एक हो गया। इस परिवार मिलन की खुशियां चंद्रसेन सागर ने शिवचरन कश्यप का मुंह मीठा कराकर साझा की।
इसी समारोह के साथ फरीदपुर की सियासत में एक नया अध्याय जुड़ गया। इस सभा में चंद्रसेन सागर ने संकल्प लिया कि वह अपने बड़े भाई स्वर्गीय सियाराम सागर की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएंगे और आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को भारी मतों से जीत दिलाने का काम करेंगे। चंद्रसेन सागर इस सीट के सबसे प्रबल दावेदारों में शुमार हैं। अब उनके परिवार के एक होने के बाद उनकी राजनैतिक ताकत कई गुना बढ़ गई है। इस परिवार के पुनर्मिलन ने भाजपा विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल के साथ ही समाजवादी पार्टी के टिकट के दावेदारों की धड़कनें भी बढ़ा दी हैं।
इस बार फरीदपुर की सियासी तस्वीर एकदम अलग होने जा रही है। बहुजन समाज पार्टी यहां अंतिम सांसें गिन रही है और चंद्रसेन सागर यहां सपा की पीडीए की मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके साथ यादव समाज का बड़ा वोट बैंक खड़ा है जो सपा के किसी भी अन्य दावेदार के साथ बिल्कुल नहीं है। खासतौर पल पूर्व विधायक विजयपाल सिंह से यादव समाज बेहद नाराज है। आरोप है कि विजयपाल सिंह जब बसपा से विधायक बने थे तो उन्होंने सपा समर्थक यादवों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराए थे। यही वजह रही कि जब भी विजयपाल सिंह सपा से चुनाव मैदान में उतरे उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। उस दौरान डॉक्टर सियाराम सागर और उनके छोटे भाई चंद्रसेन सागर यादवों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए थे। सागर परिवार मुश्किल दौर में हमेशा ही हर जाति -वर्ग के साथ खड़ा नजर आया है जिसका नतीजा है कि फरीदपुर की जनता ने इस परिवार को पांच बार विधानसभा पहुंचाया है।
अब एक बार फिर वही पुराने राजनैतिक समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। विजयपाल सिंह की उम्मीदवारी पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। सियाराम सागर के परिवार के पुनर्मिलन के बाद समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं और यादव समाज के लोगों में उत्साह है। पिछड़ा वर्ग भी चंद्रसेन सागर के नेतृत्व में लामबंद होने लगा है। हालांकि विधानसभा चुनाव में अभी काफी समय शेष है लेकिन फरीदपुर की सियासत इस बार बदलाव की इबारत गढ़ती नजर आ रही है। इसकी शुरुआत भूतपूर्व विधायक स्वर्गीय सियाराम सागर की पुण्यतिथि से हो चुकी है।





