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धोबी समाज की आवाज बनी एसएपी, पूरे प्रदेश में उतारेगी प्रत्याशी, 6% दलित धोबी आबादी को भागीदारी के अनुसार मिलेगी हिस्सेदारी, जानिये कौन हैं सर्वजन आम पार्टी के संस्थापक जयप्रकाश जिन्होंने उड़ा दी है जातीय सियासत करने वालों की नींद?

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नीरज सिसौदिया, नई दिल्ली

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव इस बार काफी दिलचस्प होने जा रहे हैं। पिछले लगभग एक दशक से जो चुनाव धर्म के नाम पर लड़े जा रहे थे वो अबकी बार जाति पर लड़े जाएंगे। प्रदेश में मायावती की बहुजन समाज पार्टी के पतन के साथ ही दलित समाज के उत्थान की शुरुआत होने लगी है। अब दलित समाज के जागरूक लोग दूसरे दलों के हाथों की कठपुतली बनने की जगह अपने समाज को उनकी आबादी के अनुसार हिस्सेदारी दिलाने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में धोबी समाज के कर्मठ नेता जयप्रकाश भास्कर अपने समाज की आवाज बनकर उभरे हैं और अपने समाज के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए उन्होंने सर्वजन आम पार्टी की स्थापना कर डाली। वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और कुछ ही महीनों में उनकी पार्टी का विस्तार प्रदेश के 50 से भी अधिक जिलों में हो चुका है।
बता दें कि प्रदेश में अनुसूचित जातियों में सात प्रमुख उपजातियां हैं। इनमें चर्मकार, पासी, कोरी, वाल्मीकि, धोबी, खटिक और धानुक शामिल हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश में धोबी समुदाय राज्य में तीसरी सबसे बड़ी अनुसूचित जाति थी जिसकी आबादी उस वक्त यानि 14 साल पहले 24.32 लाख थी। एक अनुमान के अनुसार अब यह आंकड़ा एक करोड़ के भी पार हो चुका है। अनुसूचित जातियों में आबादी के लिहाज से पहले नंबर पर चर्मकार हैं जिनकी आबादी 2.24 करोड़ यानि 54.39% है। दूसरे नंबर पर पासी हैं जिनकी आबादी 65.22 लाख यानि कुल दलित आबादी का 15.77% है। तीसरे नंबर पर धोबी जो 24.33 लाख यानि 5.88% हैं। इनके बाद कोरी (22.94 लाख), फिर वाल्मीकि (13.19 लाख), उसके बाद खटिक (9.3 लाख) और फिर धानुक (6.51 लाख) आते हैं।


सर्वजन आम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश भास्कर ने बताया, ‘ दलितों के नाम पर अब तक सियासत खूब हुई लेकिन सभी पार्टियों ने सिर्फ उनका इस्तेमाल किया है। खास तौर पर धोबी समाज हमेशा से उपेक्षित ही रहा है। प्रदेश में हमारे समाज के मतदाता लगभग छह प्रतिशत हैं लेकिन विधानसभा में हमारा प्रतिनिधित्व इसके मुकाबले कहीं नहीं ठहरता। इसलिए हमने अपने समाज को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया और सर्वजन आम पार्टी का गठन किया। पार्टी का विस्तार लगातार किया जा रहा है। पार्टी के बैनर तले हम कई बड़े आयोजन भी कर चुके हैं। हम अब तक प्रदेश के 50 से भी अधिक जिलों में पहुंच चुके हैं और इस साल के अंत तक पूरे प्रदेश का धोबी समाज हमारी पार्टी के बैनर तले एकजुट हो जाएगा। आगामी विधानसभा चुनाव में हम पूरे प्रदेश में प्रत्याशी उतारेंगे और इनमें सबसे अधिक तादाद धोबी समाज के उम्मीदवारों की होगी।’
बता दें कि जयप्रकाश भास्कर पहले समाजवादी पार्टी का हिस्सा थे। वह पार्टी में कई अहम पदों पर जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। लेकिन धोबी समाज के अस्तित्व की लड़ाई लड़ने के लिए उन्होंने सपा को छोड़कर अपनी पार्टी का गठन किया और लगातार धोबी समाज को जोड़ने का काम कर रहे हैं।


बहरहाल, धोबी समाज का ये युवा चेहरा विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष की भी मुश्किलें बढ़ाता नजर आ रहा है। क्योंकि जितने हिन्दू वोट कटेंगे, उतना ही सत्ता पक्ष को नुकसान होगा। साथ ही समाजवादी पार्टी की पीडीए की मुहिम को भी झटका लग सकता है क्योंकि पीडीए का तो मूल मकसद ही दलित वोटों के बिखराव को रोकना है। यही वजह है कि अगर सर्वजन आम पार्टी विपक्ष के महागठबंधन का हिस्सा बनती है तो सत्ता पक्ष को नुकसान उठाना पड़ सकता है और अगर भास्कर की पार्टी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनती है तो विपक्ष को भी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

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