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हरियाली से ला रहे खुशहाली, छह साल पहले शुरू किया था सफर, पढ़ें रोटरी क्लब ऑफ बांस बरेली के संरक्षक सुभाष अग्रवाल से खास बातचीत?

नीरज सिसौदिया, बरेली
हरे-भरे इलाके अब कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते जा रहे हैं. बढ़ती आबादी की जरूरतों ने हरियाली को निगल लिया है. वनों का दायरा कम होता जा रहा है और ऑक्सीजन का संकट बढ़ता जा रहा है. इस संकट को दूर करने के लिए लिए व्यापक स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है. कई समाजसेवी संस्थाएं इस दिशा में निरंतर प्रयासरत भी हैं. अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार ये संस्थाएं समय-समय पर पौधरोपण करती रहती हैं. ऐसी ही एक संस्था है रोटरी क्लब ऑफ बांस बरेली, जो पिछले 6-7 वर्षों से हर साल ऐसे पौधे लगाती आ रही है जो सबसे ज्यादा ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं.
संस्था के संरक्षक सुभाष अग्रवाल बताते हैं, ‘रोटरी क्लब ऑफ बांस बरेली का गठन वर्ष 2003 में हुआ था. तब से यह संस्था समाजसेवा के क्षेत्र में विभिन्न कार्य करती आ रही है. करीब 6-7 साल पहले संस्था ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक छोटा से प्रयास शुरू किया. तब से हर साल संस्था की ओर से पौधरोपण किया जाता है. पहले हम स्कूलों में पौधे लगाते थे मगर पिछले कुछ समय से सिटी श्मशान भूमि के बाहर सड़क किनारे पौधरोपण का कार्य शुरू किया.’


संस्था की ओर से फलदार पौधे नहीं लगाए जाते, इसकी क्या वजह है? पूछने पर सुभाष अग्रवाल कहते हैं, ‘आज पूरा देश ऑक्सीजन के संकट से जूझ रहा है. इसलिए हमने ऐसे पौधे लगाने का निर्णय लिया जो सबसे अधिक ऑक्सीजन उत्सर्जित करते हैं. इसलिए हम सिर्फ नीम, पीपल, बरगद और पाखड़ा के पौधे ही लगाते हैं. सुरक्षा के लिहाज से भी ये पौधे बेहतर रहते हैं. इनकी जगह अगर फलदार पौधे लगाते हैं तो बड़े होने के बाद भी वह सुरक्षित नहीं रह पाते क्योंकि लोग फलों के चक्कर में उनकी टहनियां तोड़ देते हैं.’
रोटरी क्लब ऑफ बांस बरेली की ओर से सिर्फ पौधरोपण ही नहीं किया जाता बल्कि उनकी देखरेख का भी पूरा ख्याल रखा जाता है.


सुभाष अग्रवाल बताते हैं, ‘पौधों के साथ ही ट्री गार्ड भी लगाया जाता है जो पौधों में अंदर तक फिक्स कर दिया जाता है जिससे यह जानवरों से पूरी तरह सुरक्षित रहता है. साथ ही इसकी देखरेख के लिए एक व्यक्ति को नियुक्त भी किया जाता है. चूंकि पौधे हर साल जुलाई माह में लगाए जाते हैं इसलिए उन्हें तीन माह तक पानी की कोई कमी नहीं होती और तीन माह में पौधा मजबूत हो जाता है. इसके अलावा संस्था के सदस्य हर माह पौधे की वृद्धि का जायजा लेने भी जाते रहते हैं.’
संस्था की ओर से अब तक 10-12 पौधे ही लगाए जाते रहे हैं. श्मशान भूमि के बाहर लगाए गए पौधों में से लगभग दो दर्जन पौधे अब वृक्ष का रूप ले चुके हैं मगर उस इलाके की हरियाली के लिए ये नाकाफी हैं.
सुभाष अग्रवाल कहते हैं कि इस बार बड़े पैमाने पर पौधरोपण का लक्ष्य है. अभी तक तो सिर्फ क्लब के सदस्य अापस में धनराशि एकत्र करके वन विभाग से पौधे खरीदकर लाते थे और लगाते थे पर इस बार हम जनता से भी सहयोग की अपील करते हैं. अगर कोई व्यक्ति अपने पूर्वजों या पारिवारिक सदस्यों की याद में पौधा लगाना चाहता है तो वह हमारे इस अभियान का हिस्सा बन सकता है. इसे लेकर शुक्रवार को क्लब के पदाधिकारियों की एक बैठक हुई थी जिसमें यह निर्णय लिया गया कि जनता अगर पौधे लगाना चाहती है तो क्लब की ओर से पूरा सहयोग किया जाएगा. बैठक में क्लब के संरक्षक सुभाष चंद्र अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ऋषि कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल, सचिव तुषार अग्रवाल एवं पूर्व सह मंडल अध्यक्ष वीपी खंडेलवाल आदि उपस्थित थे।

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