नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली जिले में समाजवादी पार्टी जिला अध्यक्ष होने के बावजूद नेतृत्वविहीन नजर आ रही है। पार्टी के बड़े नेताओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को जिला अध्यक्ष शिवचरण कश्यप का नेतृत्व तनिक भी स्वीकार्य नहीं है। दो दिन पूर्व हुई सपा की जिला ईकाई की मासिक बैठक में इसका जीता जागता नमूना देखने को मिला।
वर्षों बाद संभवत: पहली बार ऐसा मौका आया जब महानगर अध्यक्ष शमीम खां सुल्तानी और उनकी पूरी टीम ने इस बैठक से दूरी बना ली। इसके बाद समाजवादी पार्टी की कलई ही खुल गई। इस बैठक में न तो सांसद और पूर्व सांसद शामिल हुए, न ही विधायक और ज्यादातर पूर्व विधायक पहुंचे। नगर पंचायतों के चेयरमैन और जिला पंचायत सदस्यों ने भी बैठक में शामिल होना जरूरी नहीं समझा। पार्टी के ज्यादातर विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष भी बैठक से नदारद रहे। पूर्व जिला अध्यक्षों की तो बात ही छोड़ दीजिये, मौजूदा जिला महासचिव और ज्यादातर जिला उपाध्यक्ष भी शिवचरण कश्यप की अध्यक्षता में हुई इस बैठक से दूर ही रहे।
दरअसल, जैसे -जैसे विधानसभा चुनाव सामने आ रहे हैं समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष के खिलाफ असंतुष्टि और आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। सपा के संविधान के अनुसार, सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, निकायों के चेयरमैन और सदस्य के साथ ही पूर्व जिला अध्यक्ष और पूर्व चेयरमैन जिला ईकाई के पदेन सदस्य होते हैं। एक तरफ पार्टी ने पंचायत चुनावों के साथ ही विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज कर दी हैं, तो वहीं समाजवादी पार्टी की जिला ईकाई की अंदरूनी कलह भी खुलकर सामने आने लगी है। शिवचरण कश्यम की इस मासिक बैठक से महानगर ईकाई ने दूरी क्या बना ली, उनका नेतृत्व सवालों के घेरे में आ गया है।
बता दें कि जिला ईकाई की बैठक में आंवला सांसद नीरज मौर्य, पूर्व सांसद वीरपाल सिंह यादव, भोजीपुरा विधायक शहजिल इस्लाम, बहेड़ी विधायक अता उर रहमान, सेंथल नगर पंचायत चेयरमैन, शीशगढ़ नगर पंचायत चेयरमैन, पूर्व जिला अध्यक्ष अगम मौर्य, पूर्व जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव, वर्तमान जिला महासचिव संजीव यादव सहित वर्तमान जिला ईकाई के कुछ उपाध्यक्ष और विधानसभा सीटों के अध्यक्ष भी बैठक में नहीं पहुंचे। हैरानी की बात है कि जिस बैठक में एक प्रधान को पार्टी में शामिल किया जाना हो उस बैठक से सारे दिग्गज दूरी बना लें और पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारी भी न पहुंचें। यह बैठक स्पष्ट संकेत दे चुकी है कि शिवचरण कश्यप में वो नेतृत्व क्षमता नहीं रह गई है कि वो पूरे जिले के नेताओं को एकजुट कर सकें और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को जीत के लिए तैयार कर सकें।

कुछ समय पूर्व तक यह माना जा रहा था कि जुलाई चुनाव से पहले ही शिवचरण कश्यप से जिला अध्यक्ष की कुर्सी छीनकर किसी नए चेहरे को इस पद से नवाजा जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे कुछ नेता निराश हैं तो कुछ नाराज हैं। बताया यह भी जाता है कि अब जिले के कुछ नेता खुलकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं तो कुछ बैठकों से दूरी बनाकर अपनी नाराजगी जता रहे हैं। जानकारों का कहना है कि कुछ नेता ऐसे हो सकते हैं कि जो किसी मजबूरी के चलते बैठक में नहीं पहुंच सके होंगे लेकिन इतनी बड़ी संख्या में सभी दिग्गज नेता एकसाथ मजबूर हो गए होंगे, यह तर्कसंगत नहीं लगता।
पंचायत चुनाव नजदीक हैं और जिला पंचायत सदस्यों का बैठक में शामिल न होना यह दर्शाता है कि शिवचरण कश्यप के नेतृत्व में यह चुनाव जीतना लगभग नामुमकिन सा होगा।
बहरहाल, शिवचरण कश्यप इस मासिक बैठक में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। अगल यही स्थिति रही तो समाजवादी पार्टी के लिए विधानसभा की जंग जीतना भी नामुमकिन होगा।





