नीरज सिसौदिया, बरेली
शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र शास्त्री मार्केट में गुरुवार को दुकान की गैलरी की छत गिर गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। इस हादसे ने नगर निगम की वर्षों से चली आ रही लापरवाही और उदासीनता की पोल खोल दी है।
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हालांकि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन स्थानीय पार्षद राजेश अग्रवाल ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और मौके पर पहुंचकर ना सिर्फ हालात का निरीक्षण किया, बल्कि पीड़ित दुकानदारों की बातों को भी ध्यान से सुना।
“हम व्यापारी हितों की अनदेखी नहीं होने देंगे” — पार्षद राजेश अग्रवाल
पार्षद राजेश अग्रवाल ने मौके पर पहुंचते ही नगर निगम के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा:
“55 सालों से नगर निगम किराया वसूल रहा है लेकिन एक ईंट तक नहीं लगाई गई। न सफाई है, न टॉयलेट, न पार्किंग और अब इमारत भी जर्जर हो चुकी है। फिर भी नगर निगम को शर्म नहीं आती।”
उन्होंने कहा कि दुकानदारों का उत्पीड़न अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्षद अग्रवाल ने घोषणा की कि वे खुद नगर निगम जाकर व्यापारियों का पक्ष मजबूती से रखेंगे और सभी क्षतिग्रस्त दुकानों के लिटर नए सिरे से डलवाने की मांग करेंगे।
दुकानदारों ने एक दिन पहले ही दी थी चेतावनी
दुकानदारों ने बताया कि बुधवार को ही पार्षद राजेश अग्रवाल को वीडियो भेजकर चेताया गया था कि छतें किसी भी समय गिर सकती हैं। इसके बावजूद नगर निगम ने कोई कदम नहीं उठाया। अगले ही दिन छत गिर गई, जिससे व्यापारी समुदाय में भारी रोष है।

घटना के बाद नगर निगम द्वारा लगाए गए एक बैनर को लेकर पार्षद राजेश अग्रवाल ने तंज कसते हुए कहा, “क्या बैनर टांगना ही नगर निगम की पूरी जिम्मेदारी है?” उन्होंने कहा कि यह केवल खानापूर्ति है और जनहित की खुली अनदेखी है।
व्यापारियों ने जताया भरोसा, पार्षद बने सहारा
मार्केट के दुकानदारों ने पार्षद राजेश अग्रवाल की सक्रियता और साहसिक रुख की सराहना की और कहा कि वर्षों की उपेक्षा के बाद अब कोई नेता उनकी आवाज को सही मंच तक पहुंचा रहा है।
अब क्या नगर निगम चेतेगा?
यह घटना नगर निगम की नाकामी का ताज़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। अब सवाल यह है कि क्या निगम इस चेतावनी को गंभीरता से लेकर ज़रूरी मरम्मत और सुविधाएं देगा? या फिर एक और हादसे का इंतजार करेगा?
लेकिन एक बात साफ है—पार्षद राजेश अग्रवाल की सख्त चेतावनी और ठोस कार्रवाई से इस बार मामला ठंडे बस्ते में नहीं जाएगा। यह सिर्फ छत गिरने की घटना नहीं, बल्कि एक सिस्टम की ढहती हुई जिम्मेदारी की तस्वीर है।





