यूपी

कठिन परिश्रम और गुरुजनों के मार्गदर्शन से ही मिलती है सफलता : यूपी टॉपर सत्येंद्र

अमित पाठक, बहराइच

कहते है कि कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती,यह कहावत जनपद बहराइच के विकास खण्ड पयागपुर अंतर्गत ग्रामसभा वैनी निवासी पुत्तीलाल त्रिपाठी के पुत्र सत्येंद्र तिवारी पर सटीक बैठती दिख रही है।जिन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग 2015 में हुई जीआईसी प्रवक्ता हिंदी के स्क्रीनिंग परीक्षा पास कर साक्षात्कार में 27 जून 2020 को उत्तर प्रदेश अंतर्गत हिंदी विषय में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
‌भवानीशंकर जटाशंकर महाविद्यालय में हुई औपचारिक मुलाकात में बातचीत के दौरान सत्येंद्र तिवारी ने बताया कि मेरी प्राथमिक शिक्षा परिषदीय विद्यालय से शुरू हुई।बाद में 2002 में हाई स्कूल इण्टर विज्ञान विषय से पास करने के बाद मैंने स्नातक हिंदी विषय से किया। परास्नातक करने के लिए मैंने एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर में हिंदी साहित्य के लिए सन 2007 में प्रवेश परीक्षा दिया जिसमें प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रवेश लेने के बाद मैंने एमएलके पीजी कॉलेज में हिंदी विषय से पास किया। बाद में सन 2011 में देश दीपक महाविद्यालय बीकापुर से मैने B.Ed करने के साथ साथ यूजीसी नेट जून 2012 दिसंबर 2012 व जून 2013 की परीक्षा भी पास की।वहीं टीजीटी पीजीटी परीक्षा तैयारी करते हुए बुद्धा पब्लिक स्कूल बहराइच में 2013 से 2017 तक अध्यापन कार्य किया । 2016 की टीजीटी पीजीटी परीक्षा में लिखित परीक्षा पास करने के उपरांत साक्षात्कार से बाहर हुआ।फिर भी हिम्मत न हारते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग डायट प्रवक्ता हिंदी की स्क्रीनिंग परीक्षा पास किया पर साक्षात्कार में अंतिम चयन नहीं हुआ। लेकिन अध्यापन कार्य व पारिवारिक दायित्व का निर्वाहन करते हुए अपने सतत प्रयास से फिर से टीजीटी पीजीटी 2019 की परीक्षा में सफल हुआ।जिसका साक्षात्कार अभी बाकी है। तब तक लोक सेवा आयोग 2015 मैं हुई जीआईसी प्रवक्ता हिंदी की स्क्रीनिंग परीक्षा पास कर साक्षात्कार में 27 जून 2020 को उत्तर प्रदेश में हिंदी विषय में प्रथम स्थान प्राप्त किया।मेरे सफलता के पीछे डॉ नीरज कुमार पाण्डेय एवं नारायणा पब्लिक स्कूल गोण्डा के समस्त स्टॉफ व डा.वेदमित्र शुक्ल अंग्रेजी प्राध्यापक (दिल्लीविवि.)राजेशकुमार चौबे खजुरीइंटर कालेज पयागपुर का श्रेय रहा,वही विशेष आशीर्वाद डॉक्टर प्रकाश चंद्र गिरी एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर का रहा जिनके सतत प्रेरणा व मार्गदर्शन से मुझे आज यह कामयाबी मिली। पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में बात करने पर बताया कि घर मे पत्नी के साथ साथ मेरे माता पिता भी रहते है।मेरी शादी पढ़ाई के दौरान ही 2007 में हो चुकी थी जिससे दो बेटियां व एक बेटा भी है।सबसे अहम बात जो बताई वह यह कि इतनी सारी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता तो हमने प्राप्त की पर कभी किसी बड़े छोटे शिक्षण संस्थान का सहारा नही लिया। क्षेत्र के होनहार द्वारा प्राप्त की गई इस उपलब्धि पर उपप्राचार्य भवानीशंकर जटाशंकर महाविद्यालय राजकुमार शुक्ल ने शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए सत्येंद्र तिवारी को पुष्पगुच्छ भेंट किया।

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