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बदायूं रोड अंडरपास के लिए आर-पार की लड़ाई में उतरे राजेश अग्रवाल, डेढ़ लाख आबादी की राहत का बना बड़ा मुद्दा, मंडलायुक्त से मिले, बताया कैसे बन सकता है अंडरपास और कहां से आएगा धन, जरूरत पड़ी तो डीआरएम के पास भी जाएंगे

नीरज सिसौदिया, बरेली

बदायूं रोड पर प्रस्तावित रेल अंडरपास को लेकर अब आंदोलन ने ठोस रूप ले लिया है। समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रत्याशी और बरेली कैंट विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार राजेश अग्रवाल इस जनहित के मुद्दे को लेकर पूरी मजबूती के साथ सामने आए हैं। 6 मई 2026 को चौपाल बदायूं रोड रेल अंडरपास संघर्ष समिति के संयोजक के रूप में उन्होंने मंडल आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर न सिर्फ अंडरपास निर्माण की मांग उठाई, बल्कि इसके पीछे के ठोस कारण और समाधान भी विस्तार से रखे।

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि चौपला बदायूं रोड पर पहले से बने फ्लाईओवर के बावजूद जाम की समस्या खत्म नहीं हुई है। खासकर छोटे वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। सुभाष नगर, महादेव नगर और बदायूं रोड की घनी आबादी के कारण यहां ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। यही नहीं, आसपास के जिलों से आने-जाने वाले लोग भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

राजेश अग्रवाल ने मंडल आयुक्त को बताया कि यह अंडरपास कोई बड़ा या जटिल प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि 22 से 25 करोड़ रुपये की लागत में इसे आसानी से बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नगर निगम और बरेली विकास प्राधिकरण मिलकर इस परियोजना के लिए धन उपलब्ध करा सकते हैं। इसके अलावा नाथ नगरी बरेली में बन रहे धार्मिक कॉरिडोर के अंतर्गत भी इस अंडरपास के लिए फंड की व्यवस्था की जा सकती है।

ज्ञापन में अंडरपास की आवश्यकता को पांच प्रमुख बिंदुओं में समझाया गया। बताया गया कि इस निर्माण से लगभग डेढ़ लाख स्थानीय और बाहरी आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। सुभाष नगर, महादेव नगर और बदायूं रोड के गांवों के निवासियों को राहत मिलेगी और कई लोगों की जिंदगी सुरक्षित हो सकेगी। इसके साथ ही बदायूं रोड, स्टेशन रोड, सिविल लाइंस और बिहारीपुर जैसे क्षेत्रों के बीच दूरी कम हो जाएगी, जिससे आवागमन सुगम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

धार्मिक दृष्टिकोण से भी इस अंडरपास को महत्वपूर्ण बताया गया है। बरेली को नाथ नगरी के रूप में जाना जाता है और यह मार्ग प्रमुख मंदिरों तक जाने का मुख्य रास्ता है। सावन में कांवड़ लेकर आने वाले शिवभक्त भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं, लेकिन फ्लाईओवर पर जाम और दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में अंडरपास एक सुरक्षित विकल्प साबित हो सकता है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि बारिश के समय सुभाष नगर पुलिया पर जलभराव होने से पूरा यातायात चौपला फ्लाईओवर पर आ जाता है, जिससे घंटों जाम लगता है। इसके अलावा समय-समय पर फ्लाईओवर की मरम्मत के नाम पर इसे बंद कर दिया जाता है, जिससे लोगों को भारी दिक्कत होती है। हाल ही में भी मरम्मत के लिए 45 दिन तक फ्लाईओवर बंद रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में अंडरपास एक स्थायी और वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में बेहद जरूरी हो जाता है।

राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल मांग नहीं, बल्कि जनहित का बड़ा सवाल है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जब तक इस अंडरपास को स्वीकृति नहीं मिलती और निर्माण कार्य शुरू नहीं होता, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही वे मुरादाबाद के डीआरएम से मिलकर इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए दबाव बनाएंगे।

इस मौके पर उनके साथ संघर्ष समिति के कई सदस्य मौजूद रहे, जिनमें डॉक्टर दीपंकर गुप्त, परविंदर सिंह होरा, अमर सिंह, तस्लीम, रवि शर्मा, गुलशन नंदा, शिवनाथ चौबे, सचिन, अरुण शर्मा, मिथुन, श्याम यादव, राकेश अग्रवाल और अनिल प्रमुख रूप से शामिल थे।

कुल मिलाकर, बदायूं रोड रेल अंडरपास का मुद्दा अब स्थानीय समस्या से आगे बढ़कर बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। और इस पूरे आंदोलन के केंद्र में राजेश अग्रवाल का सक्रिय, आक्रामक और समाधान आधारित नेतृत्व उन्हें राजनीतिक रूप से भी मजबूत स्थिति में ला रहा है।

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