नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली नगर निगम की कार्यशैली और जलकल विभाग की लापरवाही के खिलाफ शनिवार रात एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। वरिष्ठ भाजपा पार्षद और शहर विधानसभा सीट से भाजपा टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा ने जनकपुरी इलाके में सड़क पर खटिया डालकर धरना शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि वार्ड संख्या 50 में फटी पानी की लाइन की शिकायत किए जाने के बावजूद जलकल विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे हजारों लीटर पानी बर्बाद होता रहा और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि देर रात अधिकारियों के आश्वासन और काम शुरू होने के बाद उन्होंने धरना समाप्त कर दिया।

यह पूरा मामला जनकपुरी स्थित महावीर होटल के नुक्कड़ और दुर्गा शक्ति मंदिर के पास का है। यहां पान की दुकान और मंदिर के अंदर से गुजर रही पानी की पाइप लाइन फट गई थी। लाइन फटने के कारण लगातार पानी बह रहा था और आसपास के क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बनने लगी थी। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना नगर निगम और जलकल विभाग को दी, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
भाजपा पार्षद सतीश मम्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त को संदेश भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इलाके में लगातार पानी बहने से लोगों को परेशानी हो रही है और धार्मिक स्थल के पास हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचने को तैयार नहीं थे।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब सतीश मम्मा ने जलकल विभाग के सुपरवाइजर शमशाद हुसैन पर गंभीर आरोप लगा दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासियों ने एक दिन पहले ही सुपरवाइजर को सूचना दे दी थी, लेकिन उन्होंने न तो स्थल निरीक्षण किया और न ही मरम्मत का काम शुरू कराया। सतीश मम्मा ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर मंदिर की जगह मस्जिद होती तो संबंधित अधिकारी रात में खड़े होकर काम करा रहे होते। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई।
स्थिति तब और नाटकीय हो गई जब सतीश मम्मा खुद मौके पर पहुंचे और सड़क किनारे खटिया डालकर धरने पर बैठ गए। देर रात तक वह स्थानीय लोगों के साथ मौके पर डटे रहे। उनका कहना था कि जब तक पाइप लाइन की मरम्मत शुरू नहीं होगी, तब तक वह धरना समाप्त नहीं करेंगे। इलाके के लोगों ने भी भाजपा पार्षद का समर्थन किया और नगर निगम के खिलाफ नाराजगी जताई।
धरने और बढ़ते दबाव के बाद रात करीब साढ़े नौ बजे नगर निगम के अवर अभियंता सुमित मौके पर पहुंचे और मरम्मत कार्य शुरू कराया। हालांकि, यहां भी अव्यवस्था देखने को मिली। मौके पर सिर्फ एक निजी कर्मचारी लालू राठौर ही काम करता नजर आया। सतीश मम्मा ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं भेजे गए और काम बेहद धीमी गति से किया जा रहा था।
सतीश मम्मा के अनुसार नगर निगम अधिकारियों और पार्टी पदाधिकारियों के अनुरोध पर उन्होंने देर रात धरना समाप्त कर दिया ताकि मरम्मत कार्य में कोई बाधा न आए। धरना खत्म होने के बाद भी वह मौके पर मौजूद रहे और कार्य की निगरानी करते रहे। लेकिन इसके बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ। उनका आरोप है कि काम के दौरान निजी कर्मचारी लालू राठौर ने उनके साथ बदतमीजी की और बीच में काम छोड़कर अलग जाकर बैठ गया। उन्होंने कहा कि जब वह अधिकारियों से समस्या को लेकर बातचीत कर रहे थे, उसी दौरान कर्मचारी ने ऊंची आवाज में बहस शुरू कर दी।
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर एक वरिष्ठ भाजपा पार्षद को भी अपनी बात मनवाने के लिए सड़क पर खटिया डालकर धरना देना पड़ रहा है, तो आम जनता की समस्याओं का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
राजनीतिक जानकार भी इस घटना को सिर्फ पानी की लाइन फटने का मामला नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि शहर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के भीतर टिकट की राजनीति तेज हो चुकी है और सतीश मम्मा लगातार खुद को जनता के मुद्दों से जुड़े नेता के रूप में पेश कर रहे हैं। हाल के महीनों में वह नगर निगम, जलभराव, सड़क, पानी और सफाई जैसे मुद्दों को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। ऐसे में यह धरना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इलाके के लोगों ने कहा कि पानी की लाइन फटने की वजह से काफी पानी बर्बाद हुआ और रातभर लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। लोगों का आरोप है कि अगर समय रहते कार्रवाई हो जाती तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती। स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
फिलहाल यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। भाजपा पार्षद सतीश मम्मा के धरने, उनके तीखे बयानों और देर रात धरना समाप्त करने के फैसले ने नगर निगम प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। वहीं राजनीतिक गलियारों में भी यह चर्चा शुरू हो गई है कि शहर की राजनीति में आने वाले दिनों में ऐसे मुद्दे और ज्यादा गरमा सकते हैं।




