नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली जिले में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और गैरकानूनी कॉलोनियों के निर्माण का एक बड़ा मामला सामने आया है। तहसील सदर में तैनात राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकार की करोड़ों रुपये की सीलिंग की भूमि, तालाब, चक रोड और खाई की जमीनों पर अवैध कॉलोनियां बसाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस पूरे मामले को लेकर भाजपा नेता महेश पांडेय ने 22 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी बरेली को एक लिखित शिकायत सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि गुरप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह पुत्रगण प्रीतपाल सिंह तथा इन्द्रजीत कौर पत्नी प्रीतपाल सिंह, निवासी 177ए मॉडल टाउन, बरेली, ने अपने धनबल और प्रभाव का इस्तेमाल कर शहर के बदायूं रोड, पीलीभीत बाईपास और डोहरा रोड क्षेत्र में कई अवैध कॉलोनियां विकसित की हैं। इसके लिए इन्होंने कई फर्जी फर्में और मुखौटा कंपनियां बनाईं और राजस्व विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की मिलीभगत से बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) में फर्जी आख्याएं प्रस्तुत कर मानचित्र स्वीकृत करवा लिए।
शिकायत के अनुसार बदायूं रोड के ग्राम करगैना और इटौआ सुखदेवपुर में बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से साउथ सिटी (बदायूं रोड), हारमोनी (पीलीभीत बाईपास) और होराइजन/सुपरसिटी (डोहरा रोड) कॉलोनियों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि इन परियोजनाओं के पीछे कई मुखौटा कंपनियां बनाई गईं, जिनमें केसर बिल्डटेक, कावेर इंटरप्राइजेज, प्राइम प्रॉपर्टीज और पीलीभीत बाईपास रोड सिल्वर स्टेट प्रमुख हैं।
शिकायत पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि साउथ सिटी कॉलोनी, जिसे हरप्रीत सिंह और गुरप्रीत सिंह द्वारा बदायूं रोड पर बसाया गया, उसमें तालाब, चक रोड, खाई और सीलिंग की जमीन को जानबूझकर छिपाया गया। इन जमीनों को आवासीय दर्शाकर बरेली विकास प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराए गए, जबकि वास्तविकता में यह भूमि निर्माण योग्य नहीं थी।
इतना ही नहीं, आरोप है कि उत्तर प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट एक्ट 1973 और शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का भी खुला उल्लंघन किया गया। एलआईजी (LIG) भवनों के निर्माण का प्रावधान होने के बावजूद न तो नियमानुसार भवन बनाए गए और न ही योजना का पालन किया गया। एलआईजी भवनों के नाम पर दर्शाई गई भूमि को बाद में अवैध रूप से प्लॉटिंग कर आम जनता को बेच दिया गया।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि सुपरसिटी कॉलोनी जिस भूमि पर विकसित की गई है, वह पूरी तरह से सीलिंग की भूमि है। इसी तरह सिल्वर स्टेट कॉलोनी की जमीन भी तालाब और सीलिंग श्रेणी में आती है। वहीं होराइजन नाम से विकसित कॉलोनी, जिसका मानचित्र बीडीए से स्वीकृत कराया गया है, उसके खसरा रिकॉर्ड से यह पुष्टि होती है कि वह भूमि जलमग्न और खाई की भूमि है, जिस पर किसी भी प्रकार का निर्माण नियम विरुद्ध है।
भाजपा नेता महेश पांडेय ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि ये सभी प्रकरण स्थानीय सदर तहसील में तैनात राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों के संज्ञान में हैं, इसके बावजूद वे जानबूझकर आंख मूंदे हुए हैं। जब भी इन मामलों की शिकायत की जाती है, तो जांच के नाम पर लीपापोती कर प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इसका परिणाम यह हुआ है कि एक ओर सरकार की हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति को भूमाफियाओं द्वारा खुर्द-बुर्द कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर तालाब, जलमग्न भूमि और चक रोड जैसी सार्वजनिक उपयोग की संपत्तियों का दुरुपयोग किया गया।
शिकायत पत्र में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय ‘हिंच लाल तिवारी बनाम कमला देवी (2001)’ का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें तालाब और जलमग्न भूमि पर किसी भी प्रकार के निर्माण को अवैध ठहराया गया है। आरोप है कि बरेली में इस निर्णय की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
भाजपा नेता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित कॉलोनियों के मानचित्रों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही राजस्व अभिलेखों, खसरा और खतौनी की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए। दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ बीएनएस की सुसंगत धाराओं में आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं और उत्तर प्रदेश संगठित गिरोहबंदी निवारण अधिनियम** के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को तत्काल जब्त किए जाने की भी मांग की गई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर और नामजद शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और क्या बरेली में सरकारी जमीनों पर अवैध कॉलोनियों के इस कथित खेल पर प्रभावी रोक लग पाती है या नहीं।





