यूपी

फरीदपुर : विधानसभा प्रभारी की बैठक में यादव नेताओं ने की विजयपाल सिंह की फजीहत, चंद्रसेन सागर, कल्पना सागर, हरीश लाखा सहित टिकट के सभी दावेदार रहे मौजूद, सांसद नीरज मौर्य के खिलाफ भी फूटा गुस्सा, निवर्तमान जिला सचिव शरद यादव ने उठाई पार्टी कार्यालय की मांग, पढ़ें और क्या-क्या हुआ बैठक में?

नीरज सिसौदिया, बरेली
फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में शनिवार को समाजवादी पार्टी की बैठक केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह बैठक धीरे-धीरे टिकट दावेदारों के शक्ति प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और अंदरूनी खींचतान का खुला मंच बन गई। राजधानी होटल में आयोजित इस बैठक में एक तरफ जहां विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा हुई, वहीं दूसरी तरफ कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खुले मंच से पूर्व विधायक विजयपाल सिंह और सांसद नीरज मौर्य की कार्यशैली पर सवाल उठाकर सियासी माहौल गर्म कर दिया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद सिंह यादव को फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है। प्रभारी बनने के बाद अरविंद सिंह यादव पहली बार फरीदपुर में बैठक लेने पहुंचे थे। निवर्तमान जिला सचिव शरद यादव ने बताया कि बैठक में सेक्टर प्रभारी, जोन प्रभारी, बूथ प्रभारी और फरीदपुर सीट से विधानसभा चुनाव के टिकट के लगभग सभी प्रमुख दावेदार मौजूद रहे।
बैठक में पूर्व विधायक विजयपाल सिंह, पांच बार के विधायक रहे स्वर्गीय सियाराम सागर के छोटे भाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख और समाजवादी बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव चंद्रसेन सागर, उनके भतीजे की पत्नी कल्पना सागर और हरीश लाखा सहित अन्य दावेदार शामिल हुए। हालांकि बैठक का सबसे बड़ा केंद्र विजयपाल सिंह के खिलाफ उठी नाराजगी रही।
बैठक की शुरुआत तो संगठनात्मक चर्चा से हुई, लेकिन जैसे-जैसे कार्यकर्ताओं और नेताओं को बोलने का मौका मिला, माहौल बदलता चला गया। यादव और अन्य नेताओं ने मंच से ही विजयपाल सिंह पर आरोपों की झड़ी लगा दी। कई नेताओं ने साफ कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार का बड़ा कारण विजयपाल सिंह की कार्यशैली रही।
कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान समर्पित कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। बूथ स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिला। नेताओं का कहना था कि विजयपाल सिंह ओवरकॉन्फिडेंस में रहे और उन्हें लगा कि चुनाव आसानी से जीत जाएंगे, लेकिन जमीन पर संगठन कमजोर होता चला गया।
एक कार्यकर्ता ने यहां तक कह दिया कि “जब कार्यकर्ताओं को सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब विजयपाल सिंह फोन तक नहीं उठाते।” इस बयान के बाद बैठक में कुछ देर के लिए हलचल का माहौल बन गया।


सिर्फ यादव नेताओं ने ही नहीं, बल्कि मुस्लिम कार्यकर्ताओं ने भी सार्वजनिक रूप से विजयपाल सिंह पर निशाना साधा। भगवंतापुर के सबे रजा ने खुलकर कहा कि पिछले चुनाव में पार्टी की हार का कारण विजयपाल सिंह का घमंड था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनसे मुस्लिम समाज के बीच जाने की बात कही गई, तब उन्होंने साफ इनकार कर दिया। सबे रजा ने कहा कि मुस्लिम कार्यकर्ताओं की पूरी तरह अनदेखी की गई, जिसका नुकसान पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ा। उनके इस बयान के बाद बैठक में मौजूद कई कार्यकर्ता सहमति में सिर हिलाते नजर आए। इससे साफ संकेत मिला कि फरीदपुर में समाजवादी पार्टी के अंदर असंतोष सिर्फ एक वर्ग तक सीमित नहीं है।
बैठक के दौरान सबसे दिलचस्प दृश्य तब देखने को मिला जब विधानसभा टिकट के दावेदारों को बोलने का मौका दिया गया। लगभग सभी दावेदार भाजपा सरकार पर हमला बोलते नजर आए। किसी ने बेरोजगारी का मुद्दा उठाया, किसी ने महंगाई का, तो किसी ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि किसी भी दावेदार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर फरीदपुर सीट पर समाजवादी पार्टी को जीत दिलाने के लिए वह खुद क्या कर रहे हैं। न तो कोई बूथ प्रबंधन की ठोस योजना बता पाया और न ही संगठन मजबूत करने का कोई रोडमैप पेश कर पाया। यही वह क्षण था जब चंद्रसेन सागर का भाषण बाकी सभी नेताओं से अलग नजर आया।
चंद्रसेन सागर पूरी तैयारी के साथ बैठक में पहुंचे थे। उन्होंने मंच से सीधे संगठनात्मक कामों का ब्यौरा देना शुरू किया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन जिला अध्यक्ष शिवचरण कश्यप के निर्देश पर उन्होंने फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र के 363 बूथों में से लगभग 300 बूथों पर बीएलए नियुक्त किए थे।
उन्होंने कहा कि अब बूथों की संख्या बढ़कर 410 हो चुकी है और बाकी बूथों पर भी तेजी से बीएलए बनाने का काम चल रहा है। चंद्रसेन सागर ने दावा किया कि हर बीएलए के घर पर नेम प्लेट लगवाई गई और उन्हें परिचय पत्र भी दिए गए ताकि संगठन की पहचान मजबूत हो सके।


इसके बाद उन्होंने अपने शिक्षा सम्मान अभियान का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में 10वीं और 12वीं पास करने वाले छात्रों को सम्मानित किया जा रहा है। अब तक 1200 से ज्यादा बच्चों को मेडल, प्रमाणपत्र और उपहार दिए जा चुके हैं। उन्होंने विधानसभा प्रभारी अरविंद यादव को भी मेडल, प्रमाणपत्र और उपहार का एक सेट प्रदान किया जिस पर पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव और सपा के सिंबल का चित्र अंकित था।
चंद्रसेन सागर ने खास तौर पर यह भी बताया कि इन उपहारों पर समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह और अखिलेश यादव की तस्वीर अंकित है, जिससे पार्टी का संदेश घर-घर तक पहुंच रहा है।
उनके इस भाषण के दौरान बैठक में मौजूद बाकी दावेदारों के चेहरे फीके पड़ते नजर आए। वजह साफ थी। जहां बाकी नेता सिर्फ राजनीतिक भाषण दे रहे थे, वहीं चंद्रसेन सागर जमीन पर किए गए कामों का पूरा हिसाब पेश कर रहे थे।


चंद्रसेन सागर ने अपने भाषण में सिर्फ संगठनात्मक ढांचे की बात नहीं की, बल्कि उन्होंने ओबीसी जातियों पर विशेष फोकस करने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि अगर समाजवादी पार्टी को फरीदपुर सीट जीतनी है तो उसे गैर-यादव पिछड़ी जातियों तक भी मजबूती से पहुंच बनानी होगी।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि चंद्रसेन सागर का यह बयान सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व को संदेश देने की कोशिश थी कि वह केवल एक जातीय दावेदारी नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक समीकरण के साथ मैदान में हैं।
बैठक के बाद कार्यकर्ताओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की रही कि ज्यादातर दावेदारों की राजनीतिक तैयारी केवल बड़े नेताओं के साथ फोटो खिंचवाने तक सीमित दिखाई दी।
कई कार्यकर्ताओं का कहना था कि अधिकांश दावेदार टिकट मिलने की उम्मीद में तो सक्रिय हैं, लेकिन संगठन को मजबूत करने के लिए जमीन पर कोई ठोस काम नहीं कर रहे। उन्हें डर है कि अगर टिकट नहीं मिला तो मेहनत बेकार चली जाएगी, इसलिए वे कोई बड़ा राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहते। यही कारण रहा कि चंद्रसेन सागर का भाषण बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया।
बैठक में समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिला सचिव शरद यादव ने एक बेहद अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि फरीदपुर में समाजवादी पार्टी का अपना कोई कार्यालय नहीं है।


उन्होंने कहा कि मजबूरी में पार्टी की बैठकें किसी न किसी दावेदार के प्रतिष्ठान या घर पर करनी पड़ती हैं। इससे संगठन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। शरद यादव ने कहा कि पार्टी का अपना स्वतंत्र कार्यालय होना चाहिए जहां सभी कार्यकर्ता बिना किसी दबाव के पहुंच सकें। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर कार्यालय के लिए आर्थिक सहयोग की जरूरत पड़ेगी तो सबसे पहले वह खुद योगदान देने को तैयार हैं। उनकी इस मांग को बैठक में मौजूद कई कार्यकर्ताओं का समर्थन भी मिला।
बैठक के दौरान एक कार्यकर्ता ने स्थानीय सपा सांसद नीरज मौर्य की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। कार्यकर्ता ने कहा कि सांसद न तो फोन उठाते हैं और न ही कार्यकर्ताओं के छोटे-छोटे काम करवाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने इलाके में एक लाइट लगवाने का अनुरोध किया था, लेकिन आज तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बयान के बाद बैठक में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया।
राजनीतिक रूप से यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आमतौर पर पार्टी मंचों पर सांसदों के खिलाफ खुलकर बोलने से कार्यकर्ता बचते हैं। लेकिन फरीदपुर की बैठक में कार्यकर्ताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की।


फरीदपुर की यह बैठक एक बात साफ कर गई कि समाजवादी पार्टी के भीतर टिकट को लेकर खींचतान तेज हो चुकी है। हर दावेदार अपने तरीके से शक्ति प्रदर्शन में जुटा है। एक तरफ विजयपाल सिंह जैसे पुराने नेता हैं जिनके खिलाफ अब पार्टी के भीतर ही बगावत बुलंद होने लगी है। दूसरी तरफ चंद्रसेन सागर जैसे नेता हैं जो संगठनात्मक कामों और सामाजिक अभियानों के जरिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में फरीदपुर सीट पर सपा की राजनीति और ज्यादा दिलचस्प होने वाली है। क्योंकि यहां सिर्फ भाजपा से मुकाबला नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर भी नेतृत्व और टिकट की लड़ाई खुलकर सामने आने लगी है। फिलहाल इस बैठक ने इतना जरूर साबित कर दिया कि फरीदपुर में समाजवादी पार्टी का चुनावी रण अभी से गर्म हो चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *