नीरज सिसौदिया, बरेली
फरीदपुर विधानसभा की राजनीति में शनिवार का दिन सिर्फ एक संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं रहा। राजधानी होटल में आयोजित समाजवादी पार्टी की बैठक ने फरीदपुर की सियासत को नया मोड़ दे दिया। यह बैठक जितनी राजनीतिक रणनीति और संगठन की मजबूती को लेकर चर्चा में रही, उससे कहीं ज्यादा एक ऐसे दृश्य को लेकर चर्चाओं में आ गई जिसने पूरे इलाके में नया राजनीतिक संदेश दे दिया।
यह दृश्य था समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंद्रसेन सागर तथा स्वर्गीय सियाराम सागर के पुत्र डीके सागर की पत्नी कल्पना सागर के बीच दिखाई गई पारिवारिक एकजुटता का।
फरीदपुर की राजनीति में सागर परिवार कोई साधारण नाम नहीं है। पांच बार विधायक रहे स्वर्गीय सियाराम सागर और दो बार के ब्लॉक प्रमुख रहे उनके छोटे भाई सियाराम सागर ने जिस राजनीतिक विरासत को खड़ा किया, उसका असर आज भी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में साफ दिखाई देता है। वर्षों तक फरीदपुर की राजनीति सागर परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही। दलित समाज में इस परिवार की पकड़ और समाजवादी राजनीति में इसकी भूमिका इतनी मजबूत रही कि विरोधी दल भी इस परिवार के प्रभाव को कभी नजरअंदाज नहीं कर पाए।
लेकिन सियाराम सागर के निधन के बाद परिवार के भीतर मतभेदों की खबरें लगातार सामने आने लगी थीं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि अब परिवार कई हिस्सों में बंट चुका है। खासतौर पर चंद्रसेन सागर और उनके कुछ भतीजों के बीच दूरी की बातें विरोधियों द्वारा लगातार उछाली जा रही थीं।

हालांकि समय-समय पर परिवार ने सार्वजनिक मंचों पर एकजुटता का संकेत भी दिया, लेकिन विरोधी लगातार यह माहौल बनाने में जुटे रहे कि सागर परिवार अब पहले जैसा मजबूत नहीं रहा। ऐसे माहौल में शनिवार को हुई समाजवादी पार्टी की बैठक ने सारी चर्चाओं का रुख बदल दिया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद सिंह यादव को फरीदपुर विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया गया है। प्रभारी बनने के बाद अरविंद सिंह यादव पहली बार बड़ी बैठक करने फरीदपुर पहुंचे थे। राजधानी होटल में आयोजित इस बैठक में सेक्टर प्रभारी, जोन प्रभारी, बूथ प्रभारी और समाजवादी पार्टी के तमाम प्रमुख नेता मौजूद थे। विधानसभा टिकट के दावेदार भी बड़ी संख्या में पहुंचे थे।
लेकिन बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा किसी भाषण या राजनीतिक बयान की नहीं हुई। चर्चा उस पल की हुई जब कल्पना सागर ने सबके सामने आगे बढ़कर चंद्रसेन सागर के पैर छुए और उनका आशीर्वाद लिया। जैसे ही चंद्रसेन सागर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं की निगाहें उनकी ओर चली गईं। उसी दौरान कल्पना सागर की नजर उन पर पड़ी। वह तुरंत आगे बढ़ीं और सार्वजनिक रूप से अपने चाचा ससुर चंद्रसेन सागर के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य कुछ सेकेंड का था, लेकिन उसका राजनीतिक असर बहुत बड़ा माना जा रहा है।
दरअसल, चंद्रसेन सागर के विरोधी लगातार यह प्रचार कर रहे थे कि सागर परिवार अब पूरी तरह बिखर चुका है और परिवार के लोग एक-दूसरे के साथ नहीं हैं। ऐसे में राजधानी होटल में हुआ यह दृश्य उन तमाम दावों पर भारी पड़ गया।
बैठक में मौजूद कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के मुताबिक, कल्पना सागर के इस कदम ने साफ संदेश दे दिया कि परिवार के भीतर सम्मान और रिश्तों की मजबूती आज भी कायम है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह का व्यवहार केवल पारिवारिक संस्कार का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी था। खासतौर पर ऐसे समय में जब समाजवादी पार्टी फरीदपुर सीट पर नए समीकरण तलाश रही है।
पिछले कुछ महीनों में चंद्रसेन सागर लगातार फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। शिक्षा सम्मान अभियान से लेकर बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने तक, उन्होंने लगातार अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
हाल ही में उन्होंने विधानसभा क्षेत्र में 10वीं और 12वीं पास करने वाले छात्रों को सम्मानित करने का अभियान चलाया, जिसकी चर्चा गांव-गांव तक हुई। इसके अलावा बूथ स्तर पर बीएलए नियुक्त करने और संगठन को मजबूत करने के उनके प्रयासों की भी पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है।
शनिवार की बैठक में भी चंद्रसेन सागर ने संगठनात्मक तैयारी का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। उन्होंने बताया कि फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश बूथों पर बीएलए नियुक्त किए जा चुके हैं और बाकी बूथों पर भी काम चल रहा है। उनकी यह सक्रियता अब उन्हें फरीदपुर सीट पर समाजवादी पार्टी के सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल कर रही है।
फरीदपुर की राजनीति पर नजर रखने वाले लोग एक दिलचस्प राजनीतिक संयोग की चर्चा भी कर रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जब-जब स्वर्गीय सियाराम सागर फरीदपुर से विधायक बने, तब-तब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और समाजवादी राजनीति मजबूत स्थिति में रही।
इसी वजह से समाजवादी कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि अगर सागर परिवार एकजुट रहता है तो फरीदपुर की सीट पर समाजवादी पार्टी फिर मजबूत स्थिति में आ सकती है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि दलित और पिछड़ा वर्ग के समीकरण में सागर परिवार आज भी बड़ा प्रभाव रखता है। अगर परिवार पूरी तरह एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरता है तो यह समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक लाभ साबित हो सकता है।
कल्पना सागर का सार्वजनिक रूप से चंद्रसेन सागर के पैर छूना केवल एक पारिवारिक सम्मान का मामला नहीं माना जा रहा। इसके कई राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं।
पहला संदेश यह गया कि परिवार में जिस तरह की टूट की बातें की जा रही थीं, वह उतनी मजबूत नहीं हैं जितना विरोधी दिखाने की कोशिश कर रहे थे। दूसरा, यह संकेत भी माना जा रहा है कि अगर समाजवादी पार्टी चंद्रसेन सागर पर दांव लगाती है तो परिवार का बड़ा हिस्सा उनके साथ खड़ा हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि परिवार के कुछ सदस्य पहले से ही चंद्रसेन सागर के साथ सक्रिय हैं। ऐसे में कल्पना सागर का यह सार्वजनिक व्यवहार आने वाले चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फरीदपुर की राजनीति में विरोधी खेमे लंबे समय से यह नैरेटिव बनाने में जुटे थे कि सागर परिवार की राजनीतिक ताकत अब खत्म हो चुकी है। लेकिन शनिवार की घटना ने उस रणनीति को बड़ा झटका दिया है।
बैठक में मौजूद कई नेताओं का कहना था कि इस एक दृश्य ने विरोधियों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। क्योंकि राजनीति में केवल भाषण ही नहीं, बल्कि प्रतीक और संकेत भी बहुत मायने रखते हैं। और राजधानी होटल में दिखाई गई यह पारिवारिक एकजुटता एक बड़ा राजनीतिक संकेत बन गई।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय समाजवादी पार्टी को लेकर एक नया उत्साह दिखाई दे रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि आने वाले समय में अखिलेश यादव फिर से सत्ता में वापसी कर सकते हैं। फरीदपुर में भी यही माहौल देखने को मिल रहा है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की लहर बनती है और सागर परिवार पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरता है तो फरीदपुर सीट पर मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है।
शनिवार की बैठक ने यह साफ कर दिया कि फरीदपुर की राजनीति अब नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। यहां सिर्फ टिकट की लड़ाई नहीं है, बल्कि विरासत, संगठन और सामाजिक समीकरणों की भी बड़ी लड़ाई चल रही है। चंद्रसेन सागर परिवार की एकजुटता की तस्वीर ने जहां समर्थकों में उत्साह बढ़ाया है, वहीं विरोधियों की चिंता भी बढ़ा दी है। अब निगाहें समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर टिकी हैं कि आने वाले समय में वह फरीदपुर सीट पर किस चेहरे पर भरोसा जताती है लेकिन चंद्रसेन सागर फरीदपुर में सपा का चेहरा हो सकते हैं, इसकी संभावना अब बढ़ गई है।




