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अनीस बेग का ‘अंबेडकर मॉडल’ फॉलो कर रहे सियासतदान, दलित बस्तियों से बदल रही बरेली कैंट की राजनीति, अंबेडकर जयंती पर 6 दिवसीय कार्यक्रम लिख रहा शिक्षा और समानता का नया अध्याय, पढ़ें कैसे बरेली कैंट विधानसभा सीट की सियासत का केंद्र बन गईं वीरान रहने वाली दलित बस्तियां?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली की राजनीति में डॉक्टर अनीस बेग एक नया अध्याय लिखते नजर आ रहे हैं। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती को लेकर उनके द्वारा शुरू किए गए छह दिवसीय कार्यक्रमों की श्रृंखला ने न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी खास चर्चा बटोर ली है। अनीस बेग इन कार्यक्रमों के जरिए खुद को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और बराबरी के मुद्दों को भी गंभीरता से उठाता है।


डॉक्टर अनीस बेग ने इस बार अंबेडकर जयंती को खास अंदाज में मनाने का फैसला किया और इसके तहत 9 अप्रैल से 14 अप्रैल तक छह दिन का विस्तृत कार्यक्रम तय किया। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र के उन छह इलाकों को चुना, जहां दलित समाज की बड़ी आबादी निवास करती है। यह चयन अपने आप में एक स्पष्ट संदेश देता है कि अनीस बेग अपनी राजनीति को समाज के उस वर्ग के साथ जोड़कर देख रहे हैं, जो लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से जूझता रहा है।


कार्यक्रम की शुरुआत 9 अप्रैल को कटरा चांद खां इलाके से हुई, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। इसके बाद 10 अप्रैल को हरुनगला में भी इसी तरह का आयोजन किया गया। 11 अप्रैल को मलूकपुर सब्जी मंडी में कार्यक्रम रखा गया है, जहां अनीस बेग लोगों से सीधे संवाद करेंगे और बाबा साहेब के मिशन और उनके विचारों को सरल भाषा में समझाएंगे। 12 अप्रैल को दीपमाला अस्पताल के पीछे स्थित दलित बस्ती में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जबकि 13 अप्रैल को कैंट विधानसभा क्षेत्र की एक अन्य दलित बस्ती में कार्यक्रम प्रस्तावित है। इन सभी कार्यक्रमों का समापन 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के अवसर पर होगा, जब शहर में एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।


इस दिन डॉक्टर अनीस बेग नॉवल्टी क्षेत्र में एक विशेष कैंप का आयोजन करेंगे, जहां शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया जाएगा। यह आयोजन न केवल सामाजिक एकता का प्रतीक होगा, बल्कि अनीस बेग की राजनीतिक सक्रियता और जनसंपर्क की क्षमता को भी दर्शाएगा। गौर करने वाली बात यह है कि अनीस बेग ने पिछले वर्ष भी अंबेडकर जयंती के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए थे, जिससे यह साफ होता है कि यह पहल सिर्फ एक बार की नहीं, बल्कि उनकी लगातार चल रही सामाजिक मुहिम का हिस्सा है।

इन कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात दलित समाज की महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही। खासकर कटरा चांद खां इलाके में महिलाओं ने जिस तरह से डॉक्टर अनीस बेग का स्वागत किया, उसने यह संकेत दिया कि उनकी पहुंच समाज के उस वर्ग तक भी बन रही है, जो आमतौर पर राजनीतिक गतिविधियों में कम दिखाई देता है। महिलाओं की यह सक्रिय भागीदारी अनीस बेग की बढ़ती लोकप्रियता का एक अहम संकेत मानी जा रही है।


दरअसल, डॉक्टर अनीस बेग की लगातार सक्रियता ने बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र की राजनीति की दिशा बदल दी है। बाबा साहेब के मिशन को बरेली कैंट विधानसभा सीट पर सही मायनों में आगे बढ़ाने का काम अगर कोई कर रहा है तो वह डॉक्टर अनीस बेग ही हैं। जो दलित समाज पहले हाशिये पर माना जाता था और जिसकी आवाज राजनीति में बहुत कम सुनाई देती थी, आज वही समाज इस क्षेत्र की सियासत का केंद्र बनता नजर आ रहा है। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि पिछले करीब तीन-चार सालों में अनीस बेग के लगातार जमीनी प्रयासों का नतीजा है।
अनीस बेग ने सिर्फ चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि पूरे समय दलित बस्तियों में जाकर लोगों से सीधा संवाद किया। उन्होंने वहां के लोगों की समस्याएं सुनीं, उनके बीच बैठकर उनके हालात को समझा और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी किसी और वर्ग की। यही वजह है कि दलित समाज के बीच उनकी एक अलग पहचान बनी है और लोग उन्हें अपने बीच का नेता मानने लगे हैं।


पहले जिन बस्तियों में राजनीतिक गतिविधियां बहुत कम दिखाई देती थीं, वहां अब लगातार नेताओं का आना-जाना बढ़ गया है। लेकिन यह बदलाव भी कहीं न कहीं अनीस बेग की पहल का ही परिणाम माना जा रहा है। जब उन्होंने इन इलाकों में जाकर काम करना शुरू किया, तो अन्य नेताओं का भी ध्यान इन बस्तियों की ओर गया। अब हालात यह हैं कि जो बस्तियां पहले वीरान और उपेक्षित रहती थीं, वे आज राजनीतिक गतिविधियों से गुलजार नजर आती हैं।
इस बदलाव ने एक बड़ा संदेश भी दिया है कि अगर किसी समाज के बीच लगातार काम किया जाए और उसे महत्व दिया जाए, तो वह समाज भी राजनीति में अपनी मजबूत जगह बना सकता है। अनीस बेग ने दलित समाज के बीच जाकर जो भरोसा पैदा किया है, उसने उनकी सोच और आत्मविश्वास दोनों को बदलने का काम किया है। अब लोग अपने अधिकारों को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं और अपनी भागीदारी भी बढ़ा रहे हैं।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर आने वाले समय में अनीस बेग को कैंट विधानसभा सीट से विधायक बनने का मौका मिलता है, तो इसका सीधा फायदा दलित समाज को मिल सकता है। जिस तरह से उन्होंने अभी तक जमीनी स्तर पर काम किया है, उससे यह उम्मीद की जा रही है कि वह इस समाज के विकास और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए और ज्यादा प्रभावी तरीके से काम कर पाएंगे।
अनीस बेग की सक्रियता ने न केवल एक समाज को मुख्यधारा में लाने का काम किया है, बल्कि बरेली की राजनीति में भी एक नया बदलाव शुरू कर दिया है, जिसका असर आने वाले समय में और ज्यादा स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है। अनीस बेग अपने कार्यक्रमों के माध्यम से सिर्फ जयंती मनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। वह लोगों को समझा रहे हैं कि संविधान में आरक्षण की व्यवस्था क्यों की गई थी और इसका असली उद्देश्य क्या था। साथ ही वह यह भी सवाल उठा रहे हैं कि आज भी दलित समाज की सामाजिक स्थिति में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं हो पाया है। उनके भाषणों में शिक्षा, समानता और अधिकारों की बात प्रमुखता से सामने आ रही है।


इन कार्यक्रमों के जरिए अनीस बेग दलित समाज को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। वह यह संदेश दे रहे हैं कि जब तक समाज का हर वर्ग शिक्षित और जागरूक नहीं होगा, तब तक सच्चे मायनों में समानता स्थापित नहीं हो सकती। उनकी यह पहल एक तरह से सामाजिक जागरूकता अभियान का रूप लेती जा रही है, जिसमें राजनीति और समाजसेवा का संतुलन साफ दिखाई देता है।
इस पूरी मुहिम में बीना गौतम और शांति सिंह की भूमिका भी काफी अहम रही है। दोनों ने जमीनी स्तर पर कार्यक्रमों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। स्थानीय स्तर पर लोगों को जोड़ने और कार्यक्रमों की रूपरेखा को प्रभावी ढंग से लागू करने में उनकी सक्रियता साफ नजर आई है।


बरेली कैंट विधानसभा सीट पर आने वाले चुनावों को देखते हुए डॉक्टर अनीस बेग की यह सक्रियता कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक तरफ जहां वह अंबेडकर जयंती के माध्यम से दलित समाज से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वह खुद को एक जागरूक और संवेदनशील नेता के रूप में भी स्थापित कर रहे हैं। उनके कार्यक्रमों में उमड़ रही भीड़ और खासकर महिलाओं की भागीदारी यह संकेत दे रही है कि उनकी पकड़ धीरे-धीरे मजबूत होती जा रही है।


कुल मिलाकर, डॉक्टर अनीस बेग का यह छह दिवसीय कार्यक्रम सिर्फ एक जयंती समारोह नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने का प्रयास है। अब देखना यह होगा कि उनकी यह पहल आने वाले समय में बरेली की सियासत में किस तरह का असर डालती है, लेकिन फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि अनीस बेग ने अंबेडकर जयंती को एक नए और प्रभावशाली अंदाज में मनाकर अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा दिया है।

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