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बरेली में संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने में जुटी सपा, जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव ने बूथों पर उतारे दिग्गज नेता, हर विधानसभा का तैयार होगा रिपोर्ट कार्ड, जानिये क्या है सपा के नए जिला अध्यक्ष का नया एक्शन प्लान?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के बरेली जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव ने जिले में अपनी सबसे बड़ी संगठनात्मक कवायद शुरू कर दी है। पार्टी ने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने के लिए जिले के दिग्गज नेताओं को सीधे मैदान में उतार दिया है। जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव ने साफ कर दिया है कि आने वाले चुनाव में संगठन की असली ताकत बूथों पर ही तय होगी। यही वजह है कि पार्टी अब केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि हर बूथ की सामाजिक, राजनीतिक और चुनावी स्थिति का विस्तृत खाका तैयार कर रही है।
जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान के तहत पार्टी पदाधिकारियों, पूर्व पदाधिकारियों, विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्षों और अन्य वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। प्रत्येक नेता को जोन एवं सेक्टरों की निगरानी का दायित्व दिया गया है। इन नेताओं से 11 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, जिससे पार्टी को बूथ स्तर की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।
शुभलेश यादव का मानना है कि केवल राजनीतिक नारे और सभाएं चुनाव नहीं जितातीं, बल्कि बूथ स्तर पर मजबूत संगठन ही जीत की बुनियाद तैयार करता है। इसी सोच के तहत उन्होंने जिले के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की योजना बनाई है।
पार्टी की सबसे बड़ी प्राथमिकता नई बूथ कमेटियों का गठन है। शुभलेश यादव ने बताया कि बहेड़ी, मीरगंज, नवाबगंज और आंवला विधानसभा क्षेत्रों की सभी बूथ कमेटियों का गठन 20 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद फरीदपुर, बिथरी चैनपुर और भोजीपुरा विधानसभा क्षेत्रों में भी 30 जून तक बूथ कमेटियां गठित कर दी जाएंगी। उनका कहना है कि इस बार बूथ कमेटियों के गठन में केवल संख्या पर नहीं बल्कि सक्रियता और कार्यक्षमता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सपा की इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा वह रिपोर्ट है, जो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मांगी गई है। इसमें केवल बूथ प्रभारी का नाम और मोबाइल नंबर ही नहीं, बल्कि उसकी उम्र, व्यवसाय, पार्टी में सक्रियता और संगठन में उसकी भूमिका तक का पूरा विवरण शामिल किया गया है। पार्टी यह भी जानना चाहती है कि बूथ लेवल एजेंट और बूथ प्रभारी वास्तव में सक्रिय हैं या केवल कागजों में मौजूद हैं।
इसके अलावा वोटर लिस्ट पर चल रहे काम की भी समीक्षा की जाएगी। जिन बूथों पर वोटर सूची के संबंध में कार्य नहीं हो रहा है, वहां कारणों की भी जानकारी ली जाएगी। पार्टी की नजर उन बूथों पर विशेष रूप से है जहां पिछले चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे बूथों की पहचान कर हार के कारणों का विश्लेषण किया जाएगा ताकि भविष्य में वही गलतियां दोबारा न हों।
शुभलेश यादव ने संगठन को स्पष्ट संदेश दिया है कि केवल पार्टी समर्थकों की जानकारी जुटाना पर्याप्त नहीं है। इसलिए रिपोर्ट में प्रत्येक बूथ की जातीय संरचना और विभिन्न समुदायों की संख्या का विवरण भी मांगा गया है। पार्टी यह समझना चाहती है कि किस क्षेत्र में कौन सा सामाजिक समीकरण प्रभावी है और उसे अपने पक्ष में कैसे किया जा सकता है।
इतना ही नहीं, रिपोर्ट में उन लोगों और समुदायों की भी पहचान करने को कहा गया है जो किसी कारण से पार्टी से नाराज हैं। नेताओं और कार्यकर्ताओं से नाराजगी के कारणों के साथ उनके मोबाइल नंबर तक मांगे गए हैं ताकि भविष्य में संवाद स्थापित कर उन्हें फिर से पार्टी के साथ जोड़ा जा सके। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम सपा की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह चुनाव से पहले संगठन के भीतर और बाहर मौजूद असंतोष को दूर करना चाहती है।
रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा प्रभावशाली व्यक्तियों की पहचान है। पार्टी नेताओं से कहा गया है कि वे प्रत्येक बूथ पर जातिवार प्रभावशाली लोगों की सूची तैयार करें और यह भी बताएं कि उन्हें पार्टी के पक्ष में लाने से कितना चुनावी लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही बूथ स्तर पर सपा, भाजपा और बसपा के प्रमुख नेताओं का पूरा राजनीतिक ब्योरा भी तैयार किया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि शुभलेश यादव ने केवल बूथ कमेटियों के गठन पर ही जोर नहीं दिया है, बल्कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के निवर्तमान विधानसभा अध्यक्षों के कार्यों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने का भी फैसला किया है। इसकी जिम्मेदारी भी संबंधित क्षेत्रों के वरिष्ठ नेताओं को दी गई है। निष्पक्षता बरकरार रखने के लिए यह काम किसी एक नेता को सौंपने की जगह एक ही विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग नेताओं को सौंपा गया है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में संगठनात्मक बदलावों और जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जा सकता है।
राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो बरेली में समाजवादी पार्टी का यह अभियान केवल संगठन विस्तार का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की शुरुआती चुनावी तैयारी है। जिला अध्यक्ष शुभलेश यादव जिस तरह बूथ स्तर तक संगठन की समीक्षा, पुनर्गठन और जवाबदेही सुनिश्चित करने में जुटे हैं, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सपा इस बार चुनाव से काफी पहले अपनी जमीनी ताकत को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। अगर योजना के अनुरूप काम हुआ तो आने वाले दिनों में यह अभियान बरेली की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है और जिले में सपा के संगठनात्मक ढांचे की वास्तविक तस्वीर भी सामने ला सकता है।

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