नीरज सिसौदिया, बरेली
इंदिरा नगर की गलियों में इन दिनों अमृत योजना के तहत चल रहे काम को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। जिस योजना से शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की उम्मीद है, उसी के दौरान पेयजल और सीवर लाइनों को होने वाले नुकसान ने आसपास के चार वार्डों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वार्ड संख्या 23 इंदिरा नगर में चल रहे इस काम का असर वार्ड संख्या 8 मॉडल टाउन, वार्ड संख्या 50 जनकपुरी और वार्ड संख्या 67 आवास विकास तक पड़ने की आशंका है। क्षेत्रीय पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा के मुताबिक, इन चार वार्डों में करीब डेढ़ से दो लाख लोगों को पेयजल आपूर्ति से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

मामला सिर्फ खुदाई या निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है। चिंता इस बात की है कि काम के दौरान जहां पानी की लाइनें या सीवर लाइनें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, वहां मरम्मत में देरी होने पर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है। घरों में पानी की आपूर्ति बाधित होने का मतलब है खाना बनाने, सफाई करने और दूसरी जरूरी गतिविधियों में परेशानी। ऐसे में निर्माण कार्य के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी हो जाता है।
80 वार्डों में सिर्फ इंदिरा नगर में स्वीकृत योजना
सतीश मम्मा के अनुसार, अमृत योजना के तहत बरेली के 80 वार्डों में केवल वार्ड संख्या 23 इंदिरा नगर में यह परियोजना स्वीकृत हुई है। इसका काम यूनिवर्सल एमईपी प्रोजेक्ट्स एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज कंपनी देख रही है। परियोजना अक्टूबर 2025 में शुरू हुई थी और इसे जून 2026 तक पूरा किया जाना था। लेकिन निर्धारित समयसीमा में काम पूरा नहीं हो सका, जिसके बाद इसकी अवधि बढ़ाकर फरवरी 2027 तक कर दी गई।

समयसीमा बढ़ने के बीच काम की गति और उसे पूरा करने के लिए उपलब्ध कर्मचारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सतीश मम्मा का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना के लिए मौके पर कंपनी की ओर से सीमित कर्मचारी दिखाई दे रहे हैं। उनके मुताबिक, प्लंबर अली, अवर अभियंता सूरज और सहायक अभियंता समीर बिश्नोई इस काम से जुड़े हैं। इतने बड़े क्षेत्र में काम के दौरान किसी पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने पर तत्काल मरम्मत की व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि एक स्थान पर हुई गड़बड़ी का असर आसपास की आबादी पर न पड़े।
शिकायत महापौर और नगर आयुक्त तक पहुंची
क्षेत्र में पेयजल और सीवर लाइनों को नुकसान पहुंचने की समस्या सामने आने के बाद सतीश मम्मा ने महापौर डॉ. उमेश गौतम, नगर आयुक्त और जलकल विभाग के महाप्रबंधक को इसकी जानकारी दी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले को देखने के लिए नगर निगम के अभियंताओं को मौके पर भेजा।
सहायक अभियंता दिशांत राणा और अवर अभियंता सुमित शर्मा ने स्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कंपनी के प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों से भी बातचीत की, ताकि क्षतिग्रस्त लाइनों और पेयजल आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं को समझा जा सके। इस दौरान क्षेत्रीय पार्षद सतीश मम्मा भी मौजूद रहे।
मौके पर कंपनी के सहायक अभियंता समीर बिश्नोई और अवर अभियंता सूरज को निर्देश दिए गए कि जहां-जहां पानी की लाइन या सीवर लाइन क्षतिग्रस्त हुई है, वहां तत्काल मरम्मत कराई जाए। साथ ही लोगों को समय पर पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

अब मरम्मत की रफ्तार पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि निर्माण कार्य के दौरान भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा होने पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है। अधिकारियों ने कंपनी के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए हैं कि आगे कहीं भी पानी या सीवर की लाइन क्षतिग्रस्त होने पर उसे युद्धस्तर पर ठीक कराया जाए। उद्देश्य यह है कि निर्माण कार्य के कारण आम लोगों की बुनियादी सुविधाएं लंबे समय तक प्रभावित न हों।
अमृत योजना का काम फरवरी 2027 तक पूरा करने की बढ़ी हुई समयसीमा के बीच अब निगाह इस बात पर रहेगी कि कंपनी निर्माण कार्य को किस गति से आगे बढ़ाती है और क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत कितनी जल्दी होती है। इंदिरा नगर के साथ मॉडल टाउन, जनकपुरी और आवास विकास के लोगों के लिए पेयजल आपूर्ति सामान्य बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

सतीश मम्मा की ओर से अधिकारियों तक समस्या पहुंचाए जाने के बाद मौके पर निरीक्षण और निर्देश की कार्रवाई हुई है। हालांकि, चारों वार्डों में संभावित असर का वास्तविक दायरा, क्षतिग्रस्त लाइनों की संख्या और मरम्मत की मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। फिलहाल, स्थानीय लोगों की चिंता यही है कि विकास कार्य आगे बढ़े, लेकिन उसके कारण घरों तक पहुंचने वाला पानी बाधित न हो।




