यूपी

बदायूं जिले की दातागंज सीट से पूर्व विधायक सिनोद शाक्य और बिसौली से पूर्व विधायक कुशाग्र सागर हो सकते हैं सपा उम्मीदवार, लखनऊ में शिवपाल से मिले, अगम मौर्य को बनाया जा सकता है बरेली सपा का जिला अध्यक्ष, महिपाल सिंह यादव को भी संतुष्ट करने की है तैयारी, पढ़ें कैसे बदल रही है बरेली और बदायूं जिले की सियासत

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नीरज सिसौदिया, बरेली

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक समीकरण साधने में जुटी है। बदायूं जिले में भाजपा के दो पूर्व विधायकों के सपा में शामिल होने की चर्चाओं ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। वहीं, बरेली की आंवला विधानसभा सीट पर टिकट की दावेदारी के साथ संगठनात्मक पदों को लेकर भी नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। बदायूं की दातागंज विधानसभा सीट से पूर्व भाजपा विधायक सिनोद शाक्य और बिसौली सीट से पूर्व भाजपा विधायक कुशाग्र सागर वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हो सकते हैं। वहीं, बरेली जिले की आंवला विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार अगम मौर्य को एक बार फिर बरेली जिला अध्यक्ष पद की कमान सौंपी जा सकती है। साथ ही आंवला विधानसभा सीट से पूर्व विधायक और सपा के टिकट के एक और दावेदार महिपाल सिंह यादव के बेटे को आगामी जिला पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है।
सबसे पहले बात बदायूं की। यहां से सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव के पुत्र आदित्य यादव लोकसभा सदस्य हैं। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि शिवपाल सिंह यादव जिसे चाहेंगे वही आगामी विधानसभा चुनाव में सपा का उम्मीदवार होगा। यही वजह है कि यहां से भाजपा के दो पूर्व विधायक सपा में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

कुशाग्र सागर

इनमें भाजपा नेता और दातागंज के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य एवं बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर शामिल हैं। इन दोनों नेताओं ने वीरवार को राजधानी लखनऊ में शिवपाल सिंह यादव से मुलाकात की। सूत्र बताते हैं कि शिवपाल सिंह यादव ने दोनों नेताओं को टिकट का भरोसा भी दिलाया है। अब दोनों की मुलाकात अखिलेश यादव से होनी है। उसके बाद दोनों नेता आधिकारिक तौर पर सपा में शामिल हो सकते हैं।

सिनोद शाक्य

राजनीतिक रूप से इन मुलाकातों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर दोनों बदायूं की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं। यदि वे सपा में शामिल होते हैं तो पार्टी को जिले में पार्टी और भी मजबूत होगी जो भाजपा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। दोनों की अपनी राजनीतिक पहचान है। हालांकि, पार्टी में उनकी एंट्री और संभावित टिकट को लेकर अभी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।

कैप्टन अर्जुन सिंह यादव

वहीं, बदायूं में जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर भी चर्चाएं हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कैप्टन अर्जुन सिंह को इस पद के लिए मौका दिया जा सकता है। अर्जुन सिंह बदायूं सीट से टिकट के दावेदार हैं लेकिन दो मौजूदा विधायक यादव होने के कारण तीसरे यादव को टिकट देना संभव नहीं माना जा रहा है। ऐसे में अर्जुन सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर मौका देकर संतुष्ट किया जा सकता है। हालांकि, उनके नाम पर अंतिम फैसला होने की पुष्टि नहीं हुई है।

डॉ. देवेंद्र सिंह यादव

आंवला में टिकट के साथ राजनीतिक संतुलन साधने की कवायद

बरेली जिले की आंवला विधानसभा सीट पर भी सपा के भीतर टिकट को लेकर चल रही खींचतान के बीच नए समीकरणों की चर्चा है। पूर्व विधायक महिपाल सिंह यादव इस सीट से टिकट के प्रबल दावेदार रहे हैं। लेकिन अब उनके दामाद और पूर्व राज्यसभा सांसद वीरपाल सिंह यादव के बेटे डॉक्टर देवेंद्र यादव को टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा है।

महिपाल सिंह यादव

ऐसे में महिपाल सिंह यादव को राजनीतिक रूप से संतुष्ट करने के लिए उनके बेटे को जिला पंचायत अध्यक्ष का पद देने का आश्वासन मिलने की संभावना जताई जा रही है। विगत बुधवार को महिपाल सिंह यादव भी अपनी फरियाद लेकर लखनऊ में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मिले थे।

वीरपाल सिंह यादव

सूत्र बताते हैं कि उनके बेटे को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने का आश्वासन दिया गया है। साथ ही उन्हें और उनके समधि वीरपाल सिंह यादव को लखनऊ बुलाया गया है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
यदि ऐसा होता है तो इसे पार्टी के भीतर परिवार और राजनीतिक प्रभाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। विधानसभा टिकट किसी एक दावेदार को मिलने की स्थिति में दूसरे प्रभावशाली नेता को संगठन या पंचायत से जुड़े महत्वपूर्ण पद के जरिए साथ बनाए रखना सपा के लिए उपयोगी हो सकता है।

अगम मौर्य को जिलाध्यक्ष बनाने की चर्चा क्यों तेज हुई?

आंवला विधानसभा सीट से टिकट के एक अन्य प्रमुख दावेदार अगम मौर्य को लेकर भी सपा में नई जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। माना जा रहा है कि यदि आंवला से महिपाल सिंह यादव के दामाद का टिकट तय होता है तो अगम मौर्य को बरेली का सपा जिलाध्यक्ष बनाकर संतुष्ट करने की कोशिश की जा सकती है। अगम मौर्य और महिपाल सिंह यादव ने एक दिन पहले बुधवार को ही लखनऊ में अखिलेश यादव से मुलाकात कर टिकट की मांग उठाई थी। इसके बाद से ही पार्टी के भीतर संभावित बदलावों को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।

अगम मौर्य

अगम मौर्य को जिलाध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समय बरेली में शुभलेश यादव जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सियासी चर्चाओं के मुताबिक, अगम मौर्य को यह जिम्मेदारी मिलने की स्थिति में शुभलेश यादव को पद से हटाया जा सकता है क्योंकि यादव वोट बैंक को साधने के लिए एक यादव को टिकट देने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व की ओर से इस तरह के किसी बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी।

पप्पू गिरधारी के सपा में आने की भी चर्चा

बरेली की राजनीति में गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि, उनके सपा में शामिल होने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यदि यह चर्चा वास्तविक राजनीतिक पहल में बदलती है तो बरेली में सपा के संभावित सामाजिक और राजनीतिक विस्तार के लिहाज से इसे महत्वपूर्ण माना जा सकता है। पप्पू गिरधारी उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री और भाजपा नेत्री रेखा आर्या के पति हैं।

कुल मिलाकर बदायूं में सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर की सपा नेतृत्व से मुलाकात, आंवला में टिकट को लेकर चल रही रस्साकशी, महिपाल सिंह यादव के परिवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के जरिए संतुष्ट किए जाने की चर्चा और अगम मौर्य को जिलाध्यक्ष बनाने की अटकलें एक व्यापक राजनीतिक तस्वीर पेश करती हैं। इसमें टिकट वितरण के साथ-साथ नेताओं को पार्टी में बनाए रखने, नए नेताओं को जोड़ने और संगठनात्मक पदों के माध्यम से स्थानीय समीकरण साधने की कोशिश दिखाई देती है।
हालांकि, इन सभी चर्चाओं को अभी संभावित राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम तस्वीर अखिलेश यादव के फैसलों और पार्टी की आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल इतना जरूर है कि बदायूं और बरेली में सपा के संभावित उम्मीदवारों और संगठनात्मक पदों को लेकर चल रही हलचल ने स्थानीय राजनीति को नई दिशा में चर्चा का विषय बना दिया है।

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