मुंबई

छोटा राजन : सलाखों में खत्म हुआ डॉन का सफर

मुंबई, एजेंसी
कभी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का दाया हाथ रहा छोटा राजन आज सलाखों के पीछे है| एक टिकट ब्लैक करने वाले से अंडरवर्ल्ड डॉन बनने तक का छोटा राजन का सफर किसी फिल्मी कहानी सा लगता है| अंडरवर्ल्ड में छोटा राजन गिरोह का सफर अंडरवर्ल्ड डॉन बड़ा राजन उर्फ राजन नायर की मौत के बाद शुरू हुआ था|
राजन नायर का पहला पेशा दर्जी का था| अपने इस पेशे से वह 25 से ₹30 रोज कमा पाता था| 1 दिन उसकी गर्लफ्रेंड का बर्थडे था तो उसे गिफ्ट देने के लिए राजन नायर ने सबसे पहली चोरी एक टाइपराइटर की की| चोरी का टाइपराइटर बेचकर उसे जो पैसे मिले उससे गर्लफ्रेंड के लिए गिफ्ट खरीदा| अब चोरी के पैसों से वह अपनी गर्लफ्रेंड की जरूरतें पूरी करने लगा लेकिन जल्द ही पुलिस के हत्थे चढ़ गया और 3 साल की जेल हो गई|

जेल से निकलते ही राजन नायर ने अपना गैंग बना लिया और उसका नाम रखा गोल्डन गैंग जो बाद में बड़ा राजन गैंग कहलाया| इसके बाद राजन नायर ने अब्दुल कुंजू को गैंग में जोड़ा| अब्दुल ने राजेंद्र की गर्लफ्रेंड से शादी कर ली| बस यही से राजन और अब्दुल की दोस्ती दुश्मनी में बदल गई. 1982 में पठान भाइयों ने कुंजू की मदद से कोर्ट के बाहर बड़ा राजन को मार डाला उसके बाद शुरू हुई छोटा राजन की कहानी|
मुंबई के चेंबूर इलाके के तिलक नगर में 1964 में एक मराठी परिवार में सदा शिव के घर राजेंद्र सदाशिव निखल्जे ने जन्म लिया| उसके तीन भाई और दो बहने थीं| पांचवी के बाद राजेंद्र सदाशिव ने स्कूल छोड़ दिया| कुछ साल बाद वह जगदीश गूंगा के गैंग से जुड़ गया|

सुजाता नाम की लड़की से उसकी शादी हुई और तीन बेटियां भी हुई| 1979 में इमरजेंसी के बाद पुलिस कालाबाजारी करने वालों पर शिकंजा कस रही थी| राजेंद्र मुंबई के सहकार सिनेमा में टिकट ब्लैक करता था| कुछ दिन बाद पुलिस ने इसी सिनेमा के बाहर लाठीचार्ज किया तो गुस्साए राजेंद्र ने पुलिस की लाठी छीनकर पुलिस वालों को ही पीटना शुरू कर दिया| इसके बाद मुंबई के कई गैंग उसे अपने साथ जोड़ना चाहते थे लेकिन राजेंद्र ने बड़ा राजन गैंग ज्वाइन किया| 1982 में पठान भाइयों ने बड़ा राजन की हत्या कर दी तो गैंग की कमान राजेंद्र उर्फ छोटा राजन ने संभाल ली| छोटा राजन ने अब्दुल को मारकर बड़ा राजन की मौत का बदला लेने का फैसला किया. 9 अक्टूबर 1983 में कुंजू ने जान बचाने के लिए क्राइम ब्रांच के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया| जनवरी 1984 में छोटा राजन ने अब्दुल पर हमला किया लेकिन अब्दुल घायल होकर बच निकला| इसके बाद 25 अप्रैल 1984 को पुलिस अब्दुल को लेकर अस्पताल पहुंची| यहां छोटा राजन ने एक व्हीलचेयर पर सफेद कपड़े पहन कर बैठे हुए अब्दुल पर गोलियां बरसा दी| लेकिन अब्दुल का नसीब अच्छा था और वह बच गया| इसके बाद छोटा राजन को दाऊद इब्राहिम ने मिलने के लिए बुलाया| छोटा राजन दाऊद के गैंग में शामिल हो गया और अब्दुल को मार डाला| अब दाऊद व राजन एक दूसरे का विश्वास जीत चुके थे|

1987 में दाऊद का काम संभालने के लिए छोटा राजन दुबई चला गया| इसके ठीक 1 साल बाद छोटा शकील भी दुबई चला गया लेकिन छोटा राजन दाऊद इब्राहिम के ज्यादा करीब था| छोटा राजन को दाऊद के गिरोह के कई लोग नाना भी कह कर बुलाते थे| वह दाउद के लिए बिल्डर्स और रईसों से वसूली का काम किया करता था| ठेकेदारी में भी 3 से 4 फ़ीसदी हिस्सा दाऊद का रहता था| पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 90 के दशक में छोटा राजन लगभग 80 लाख रुपए हर माह कमाता था| मुंबई में उसके नाम से लगभग 122 बेनामी होटल और पब चल रहे थे| छोटा शकील छोटा राजन को पसंद नहीं करता था और राजन के विरोध में छोटा शकील शरद शेट्टी व सुनील रावत एकजुट हो गए| दाऊद ने छोटा राजन को अपने भाई साबिर की हत्या करने वाले करीम लाला व अनिल दादा को मारने का काम दे रखा था| काफी समय बीतने के बाद भी छोटा राजन इस काम को अंजाम नहीं दे पाया था जिसका फायदा छोटा शकील ने उठाया| साबिर की हत्या करने वाले अस्पताल में| छोटा शकील ने दाऊद से उन्हें मारने की इजाजत मांगी और निकल पड़ा| छोटा शकील और सत्या के गुर्गे अस्पताल में घुसे और लगभग 500 से भी अधिक फायरिंग कर दाऊद के भाई की मौत का बदला ले लिया| बस यही से दाऊद के गैंग में राजन का अंत शुरू हुआ| 1996 और 94 तक छोटा शकील व छोटा राजन गुट एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए. राजन ने दाऊद गैंग का काम करना बंद कर दिया था और वह भारत लौटना चाहता था| उसका पासपोर्ट दुबई के शेखों के पास था| छोटा राजन समझ चुका था कि दुबई में उसका जीना अब मुश्किल है| इसके बाद एक दिन उसने काठमांडू की फ्लाइट पकड़ी और फिर वहां से मलेशिया चला गया| कुछ साल के लिए राजन अंडर ग्राउंड हो गया और छुपता फिरने लगा| इस दौरान वह कुआलालंपुर, कंबोडिया और इंडोनेशिया में रहा लेकिन उसे सबसे सुरक्षित ठिकाना बैंकॉक लगा| काफी कोशिशों के बाद वर्ष 2000 में छोटा शकील को छोटा राजन का पता चल गया| 14 सितंबर 2000 को 4 लोगों ने राजन के अपार्टमेंट पर हमला किया लेकिन राजन बच गया और अस्पताल में भर्ती हो गया इसके बाद राजन गायब हो गया| कुछ दिन चुप रहने के बाद छोटा राजन ने छोटा शकील के 2 गुर्गों को 2001 में मरवा डाला| इसके बाद छोटा राजन उस वक्त सुर्खियों में आया जब जून 2011 में मिड डे के पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या में छोटा राजन का नाम उछला| इसके बाद मुंबई के बिल्डर अजय को सालिया और अरशद शेख की हत्या में भी छोटा राजन गैंग के लोगों का नाम आया| इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया| वर्ष 2015 में राजन पर ऑस्ट्रेलिया में हमला हुआ| अक्टूबर 2015 में इंडोनेशिया के बाली से राजन को गिरफ्तार कर लिया गया| 70 मामलों के अभियुक्त छोटा राजन को जेडे हत्याकांड में दोषी करार देते हुए अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है|

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