बिहार

मोतीहारी के ब्वायज हॉस्टल में लड़कों का होता था यौन शोषण

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पटना। बिहार के मोतिहारी के सरकारी बाल गृह के लड़कों के साथ यौन शोषण का मामला प्रकाश में आया है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई ने अपनी सोशल ऑडिट रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया है। इसमें वहां रहने वाले बाल बंदियों के साथ शारीरिक और यौन हिंसा की बात कही गई है।

ऑडिट रिपोर्ट में बाल सुधार गृह के कर्मी पर गलती के लिए सभी बच्चों की पिटाई करने का भी आरोप लगाया है। यह बाल सुधार गृह स्वयंसेवी संस्था निर्देश के द्वारा संचालित किया जा रहा है। डीएम रमण कुमार का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद मोतिहारी बाल सुधार गृह के बच्चों को बेतिया भेज दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

छतौनी पुलिस स्टेशन के थानेदार विजय कुमार ने बताया कि मामले को लेकर समाज कल्याण विभाग के अधिकारी की ओर से दो जून को ही प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। एनजीओ के एक कर्मचारी को भी नामजद किया गया है। अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

पुलिस का कहना है कि अभी तक पूछताछ में यौन शोषण की बात खुलकर सामने नहीं आई है। बच्चों का कहना है कि वे आपस में एक दूसरे से यूं ही मजाक करते थे। विदित हो कि मोतिहारी के बाल गृह में 14 बच्चे रह रहे थे, जिनकी उम्र छह से 14 साल के बीच है।

बता दें कि इससे पहले बिहार के मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में लड़कियों के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया था। लड़कियों को रसूखदारों के घर भेजा जाता था। पटना से लेकर सभी शहरों में लड़कियां भेजी जाती थीं। खुलासे के बाद पता चला है कि यह बालिका गृह एक एनजीओ चलाता था जिसके मालिक का संपर्क एक राजनीतिक दल से भी है। इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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