दिल्ली

करोड़ों की बिजली पी रहा दिल्ली का पानी

नीरज सिसौदिया, नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली में दूषित पेयजल सप्लाई के कारण करोड़ों रुपए की बिजली बर्बाद हो रही है| दिल्ली की लगभग दो करोड़ आबादी में से लगभग 80 फ़ीसदी से भी ज्यादा लोग आरओ का फिल्टर पानी पीने को मजबूर हैं| एक अनुमान के मुताबिक राजधानी दिल्ली में प्रतिमाह लगभग साढ़े छह हजार से सात हजार मेगा वाट बिजली की खपत है| यहां लगभग 30 लाख से भी अधिक परिवार शुद्ध पानी के लिए या तो पानी खरीद कर पी रहे हैं या घर में आरओ लगा रखा है|

इलेक्ट्रिशियंस की मानें तो घर में लगाए गए आरओ सिस्टम के लिए रोजाना कम से कम एक यूनिट बिजली आवश्यक होती है| इससे कम खपत में कोई भी आरओ सिस्टम नहीं चल सकता| इसी तरह पानी बेचने के लिए लगाए गए आरओ प्लांट में प्रतिदिन बिजली की खपत उसकी क्षमता के अनुसार बढ़ती जाती है| यानी जो आरो प्लांट प्रतिदिन 10 हजार लीटर से भी अधिक पानी उत्पादित करता है वहां बिजली की खपत 15 से 20 यूनिट तक होती है|

परिवारों में बिजली की खपत की बात करें तो सिर्फ आरओ पर ही प्रतिदिन लगभग 30 लाख यूनिट बिजली खर्च हो रही है| इसी तरह बिजली की कमर्शियल खपत अलग है| अगर दिल्ली सरकार की ओर से शुद्ध पानी की सप्लाई की जाती तो 9 लाख करोड़ यूनिट बिजली प्रति माह बचाई जा सकती थी| यानि अरविंद केजरीवाल सरकार की नाकामी से एक तरफ तो प्रतिमाह 9 लाख करोड़ रुपए की बिजली की चपत लग रही है, वहीं दूसरी ओर 200 यूनिट मुफ्त करने से भी सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है|

बात सिर्फ यहीं पर खत्म नहीं होती. राजधानी के लगभग 70 फ़ीसदी से भी अधिक घरों में बिना मोटर पंप के पानी नहीं पहुंचता| इन मोटर पंपों को चलाने के लिए भी बिजली खर्च होती है| अगर औसतन 1 यूनिट बिजली भी प्रतिदिन का खर्च माना जाए तो राजधानी में चलाए जा रहे मोटर पंप में कितनी बिजली खर्च हो रही है इसका अंदाजा खुद ब खुद लगाया जा सकता है|

अगर सरकार इस दिशा में सोचती और इस समस्या को दूर करने का प्रयास करती तो निश्चित तौर पर प्रतिमाह करोड़ों रुपए बचाए जा सकते थे| यह राशि दिल्ली के विकास कार्यों पर खर्च की जा सकती थी| नगर निगम के सफाई कर्मचारियों और डॉक्टरों की सैलरी समय पर दी जा सकती थी. साथ ही युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए भी यह काम आ सकती थी| अरविंद केजरीवाल सरकार ने निश्चित तौर पर पिछली सरकारों से बेहतर काम किया है लेकिन कई बिंदुओं पर यह सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई है|

केजरीवाल सरकार ने सिर्फ वही फैसले लिए जिसमें जनता को तत्काल राहत तो नजर आती है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम अच्छे नहीं होंगे| अरविंद केजरीवाल सरकार ने निश्चित तौर पर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है लेकिन सवाल यह उठता है कि अन्य क्षेत्र अछूते क्यों रह गए| बिजली एक ऐसी जरूरत है जो दिल्ली की रफ्तार बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है| फिलहाल तो मौसम सर्दियों का दस्तक दे चुका है लेकिन गर्मियों में हालात और भी बुरे होंगे| जैसे कि पिछले दिनों देखने को मिले थे| इसलिए केजरीवाल सरकार को चाहिए कि वह मूलभूत सुविधाओं की तरफ ध्यान दे और जनता का पैसा बर्बाद होने से बचाए| केजरीवाल सरकार अगर सिर्फ पानी की समस्या का ही समाधान कर दें तो जनता को मुफ्त पानी देने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी| बिजली ही जनता का इतना पैसा बचा देगी कि पानी खुद-ब-खुद मुक्त हो जाएगा|

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