पीड़ित नरेश नाथ
पंजाब

सूर्य ग्रहण के बाद होगा मौत का तांडव, और क्या-क्या मुसीबतें लेकर आ रहा है सूर्य ग्रहण बता रहे हैं विश्व प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य नरेश नाथ

नीरज सिसौदिया, जालंधर 

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिष आचार्य नरेश नाथ ने सूर्य ग्रहण को लेकर हैरान करने वाली भविष्यवाणी की है. पहले भी वह देश को लेकर भविष्य वाणी कर चुके हैं जो सही साबित हुई हैं. अगर इस बार आने वाला चूड़ामणि सूर्य ग्रहण अपने साथ हजारों लोगों की मौत भी लेकर आ रहा है. यह तांडव सूर्य ग्रहण के अगले 90 दिनों तक चलने की आशंका है.

नरेश नाथ ने बताया कि जब से शनि देव मकर राशि में गए हैं उनके द्वारा बार-बार कहा गया है कि मक्कार व्यक्तियों की इस वक्त चांदी होगी. मानवता अपने पतन की ओर जाएगी. गुरु बृहस्पति का भी नीच राशि में होना और बार-बार चंद्र ग्रहण और आगे लगने वाले चूड़ामणि सूर्य ग्रहण के कारण देश की जनता भारी दुख, मुसीबत और मृत्यु को देखेगी.
बता दें कि मोदी जी के शपथ ग्रहण समारोह वाले दिन नरेश नाथ द्वारा यह भविष्यवाणी की गई थी कि मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल मुसीबत वाला होगा. दूसरी पार्टियों के नेता अपनी जंडली बनाकर सत्ता के विपरीत चलेंगे. देश में जल, पृथ्वी, आकाश से विपत्तियां घोर रूप से जनता को प्रताड़ित करेंगे.
आज देश के हालात 1947 के पहले के हालात जैसेे होते जा रहे हैं. विपक्ष की सरकार जो अलग अलग राज्य में है वो केंद्र से विपरीत दिशा में चल रही है. केंद्र अपनी मनमर्जी से चल रहा है. यह वही हुआ जैसे दिल्ली में बहादुर शाह जफर का राज्य था. वह नाम का राज्य था. बाकी सारा देश सामंतवाद के रूप में अपने-अपने दिशा-निर्देशों पर चल रहा था.
परिणाम भारत गुलाम हो गया था.
आज देश की सत्ता को सशक्त व्यक्तित्व का मार्गदर्शन प्राप्त है तो भी राज्य सरकार अपने अपने हिसाब से काम करते हुए अराजकता की स्थिति बना रही है. जिसका प्रमाण देश की जनता को कोरोना महामारी के महा विस्फोट के रूप में भोगना पड़ेगा. चूड़ामणि सूर्य ग्रहण के लगने के 90 दिन के भीतर भीतर मौत के आंकड़े आसमान को छूने लग जाएंगे. यह सब स्थितियां केंद्र और राज्य सरकारों के आपसी तालमेल ना होने का परिणाम होंगी.
नरेश नाथ ने गुरु गोरखनाथ गद्दी के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों सेे निवेदन किया है कि वे आपसी तालमेल बैठाएं. एक-दूसरे को ऊंचा- नीचा दिखाने के चक्कर में जनता को मौत का मुंह में न ले जाएं क्योंकि हर कर्म का प्रतिफल लिखा गया है.
आखिर में वह कहतेे हैं कि यदि जनता ने प्रतिनिधि के रूप में आपको अपना संरक्षक नियुक्त किया है तो उस जिम्मेदारी पर खरा उतरें. राजनीति करके आप हजारों की मौत का कारण बनेंगे. उसके उपरांत कृष्ण जी के गीता सार के अनुसार जो व्यक्ति अपने कर्म से विमुख होता है ईश्वर भी कभी उसका साथ नहीं देता है और वह कुंभी नरक को प्राप्त होता है. यह वह नरक है जिसे गरुड़ पुराण में आग की वैतरणी नदी का नाम दिया गया है. अपने भीतर की ज्वाला को शांत कर मानवता के लिए काम करें.

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