सांचौर : बीरबल सिंह ढालिया के 74 वे शहादत दिवस पर जीनगर समाज का प्रथम विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया. इसमें भूपेंद्र यादव उपखंड अधिकारी सांचौर मुख्य अतिथि, नरसिंग पढियार व तहसीलदार देशलाराम परिहार की अध्यक्षता में व विशिष्ट अतिथि किशनाराम गोदारा विकास अधिकारी सांचौर, अमृतलाल दहिया सीआई अखिल भारतीय आदिवासी भील महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरसिंग पढियार भील सांचौर डॉक्टर सुरेश सागर डॉक्टर, चरण सिंह चौधरी डॉक्टर बाबूलाल बिश्नोई, पहलाद जीनगर हरीश पुरोहित थे. इस मौके अतिथियों का साफा पहनाकर व मोमेंटो भेट कर स्वागत किया गया. जीनगर सेवा समिति के सरवन सोलंकी ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत अमर शहीद बीरबल सिंह ढालिया की तस्वीर पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित कर व वृक्षारोपण कर की गई. इस मौके उपखंड अधिकारी यादव ने सभा को संबोधित करते हुए कहां कि यह जो रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ है बहुत ही सराहनीय व पुण्य का कार्य है. रक्तदान से बढ़कर कोई दान नहीं है रक्तदान से जरूरतमंद को नया जीवन मिलता है उन्होंने कोरोना महामारी को लेकर भी बचाव के तरीके व सुरक्षा के उपाय बताएं डॉक्टर सागर डॉक्टर बाबूलाल बिश्नोई डॉ चौधरी ने भी रक्तदान शिविर की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए अपने अपने सुझाव दिए इस मौके पर पढियार ने कहां की रक्तदान महादान है तथा रक्तदान करने वाला व रक्त की आवश्यकता वाला मनुष्य यह नहीं देखता कि वह किस जाति धर्म का रक्त है तो हमें छुआछूत को भूल कर ईश्वर के बनाए हुए यह मानव सभी एक समान हैं किसी से भेदभाव नहीं करना चाहिए 74 वे शहादत दिवस पर 74 रक्त दान दाताओं ने रक्तदान किया इस मौके महिलाएं भी पीछे नहीं रही निर्मला सोलंकी वीणा चितारा मोनिका मकवाना सरोज गोयल आदि महिलाओं ने भी रक्तदान किया रक्त दान दाताओं का मोमेंटो वह प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया गया इस मौके चंपालाल मुकेश कुमार गणपत लाल चतुरमल राजाराम टीकम सोनगरा नरेंद्र वर्मा चंपालाल चितारा लक्ष्मी चंद गोयल अंबालाल चितारा रानीवाड़ा पारसमल गोयल तगाराम खत्री भानाराम बालोत मुकेश कुमार पादरू राजेश चौहान प्रवीण बालोत दूधमल मकवाना भरत वाघेला वरिष्ठ अध्यापक वासुदेव चतराराम जीनगर हरीश त्रिवेदी प्रकाशचंद छाजेड रमेश कुमार मालू हरीश जैन मूहतकाखां ताज मोहम्मद अशरफ मीर ओम प्रकाश सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष युवा साथी कर्मचारी बंधु मौजूद थे मंच संचालन जयंती लाल जीनगर ग्राम विकास अधिकारी द्वारा किया गया संचालन करते हुए जयंती लाल जीनगर ने अपने शब्दों से सबको बांधे रखा.

रक्त दान से बढ़कर कोई दान नहीं




