झारखण्ड

अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस : कोरोना ने ली मां-बाप की जान, किशोर को ले गए मामा

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बोकारो थर्मल, कुमार अभिनंदन 
परिवार की महता समझे बिना उसके बिछड़ने का गम का एहसास नही किया जा सकता है। कोरोना काल में जिन लोगों ने अपने परिवार के सदस्य खोया है वही इस दर्द को समझ सकता है। ऐसे ही इस महामारी ने कई परिवारों को असहनीय पीड़ा दिया है। बोकारो थर्मल में एक ऐसा ही युवा दंपति का परिवार था। जो पांच दिन के अंदर इस दुनिया को छोड गया। उसका नाबालिक बेटा अपने माता -पिता का मुखाग्नी भी नही दे सका। चूंकि वह भी जीवन और मौत से जूझ रहा था। 30 अप्रैल की उस काली रात की बात है। सुन्दर, सौम्य चेहरा और हर दिल अजीज राजीव रंजन सिंह उर्फ राजू सिंह उम्र करीब 47 वर्ष का अचानक तबीयत खराब
होने लगी। वैसे वह कोरोना पॉजीटिव था और अपने घर पर ही रहकर इलारत था। लेकिन उस रात उसकी तबियत अचानक बिगडी तो उसे तत्काल बोकारो थर्मल के डीवीसी अस्त्पाल ले गए। वहां चिकित्सकों ने उसकी इलाज शुरू ही की थी कि तब तक उसकी सांसे थम गयी।

इस घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के चाहने वालों में मायुसी छा गई। लेकिन इस महामारी ने ऐसा अलगाव पैदा कर रखा है कि चाहने वाले भी अपने जान के डर से अंतिम संस्कार में अपनी भागीदारी नहीं निभा सके। परिवार के सदस्यों का धैर्य का पहाड़ तो उस समय और टूट पडा जब पांच दिन के अन्दर राजीव की पत्नी अर्चना देवी का भी देहांत हो गया। वहीं 14 वर्ष का बेटा आदित्य तोमर रामगढ के नई सराय अस्पताल में इलाजरत था। ऐसी भविष्य की कल्पना किसी ने नही की होगी कि माता-पिता के निधन पर मृत्यु शैया पर दो बूंद आंसू भी न बहा सका। पूरा परिवार गम के इस साए मानों बिखर गया। माता-पिता से दूर राजीव का नाबालिक पुत्र आदित्य तोमर को उसके मामा सासाराम (बिहार) ले गए। आदित्य संतपाॅल माॅर्डन स्कूल के दसवीं के छात्र है। इस दुख भरी कहानी को लिखते वक्त मेरे आंख में आंसू भर आए। उंगलिया कांप रही है। शायद पाठक को विश्वास न हो लेकिन यह दर्द वहीं महसूस कर सकता है जिन्होंने अपना परिवार खोया है।

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