विचार

30 मई पत्रकारिता दिवस पर विशेष : पत्रकारों के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं निर्भय सक्सेना

संजीव कुमार शर्मा गंभीर, बरेली

वरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना को बरेली ही नहीं बल्कि देश और प्रदेश की पत्रकारिता में कौन नहीं जानता होगा। बरेली के लोग शायद यह नहीं जानते होंगे कि नावल्टी चौराहे के पास सिंघल लाइब्रेरी के ठीक बराबर में छत पर जिस ‘यू. पी. जर्नलिस्ट एसोसिएशन’ के ‘उपजा प्रेस क्लब’ की नींव रखी गई थी । उस समय निर्भय सक्सैना ने पत्रकारों के साथ अहम किरदार निभाया था। उनके विशेष प्रयासों से पत्रकारों के लिए एक सम्मानजनक स्थान बैठने के लिए मिला। यही नहीं बीडीए की प्रदर्शनी नगर में ‘पत्रकार कॉलोनी’ विकसित की जिसमें निर्भय जी और उनके सक्रिय पत्रकार साथियों की विशेष भूमिका रही। निर्भय सक्सैना आज भी प्रदेश स्तर पर पत्रकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पत्रकारों के बारे में अगर आपको जरा भी जानकारी होगी तो शहर के वरिष्ठ और हमेशा पत्रकारों की लड़ाई लड़ने वाले निर्भय सक्सेना के किरदार की भी जरूर तमाम जानकारियां रही होंगी । निर्भय सक्सेना ही एकमात्र ऐसे वह पत्रकार है जिन्होंने अपनी जिंदगी के करीब 25 साल एक बड़े नामचीन अखबार को दिए । एक समय ऐसा था कि बरेली में पत्रकारों के बैठने के लिए कोई सम्मानजनक स्थान नहीं था तब पत्रकार निर्भय सक्सेना और उनके कुछ साथियों ने ‘उपजा प्रेस क्लब’ के लिए स्थान उपलब्ध कराया जो आज भी नॉवल्टी चौराहे पर स्थापित है। निर्भय सक्सेना बताते हैं के ‘उपजा प्रेस क्लब’ का 28 फरवरी को स्थापना दिवस भी है। पुराने दिनों को याद करते हुए निर्भय सक्सेना बताते हैं कि इसी ‘उपजा प्रेस क्लब’ में देश के कई नामचीन और मूर्धन्य पत्रकार कई बड़े राजनीतिज्ञों को बुलाकर बरेली के पत्रकारों ने सम्मानित भी किया गया था।


बरेली समेत कई बड़े महानगरों में जाकर निष्पक्ष रिपोर्टिंग की। श्रीमती इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, वी पी सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेई, राजनाथ सिंह, कलराज मिश्रा, अशोक सिंघल, बनारसी दास गुप्ता, नारायण दत्त तिवारी, वीर बहादुर सिंह जैसे तमाम बड़े नेताओं पर निर्भय सक्सेना ने मौके पर मौजूद रहकर लेखनी चलाई और उनके इंटरव्यू भी आमने-सामने लिए |


निर्भय सक्सेना की 64 वर्ष उम्र भले ही ढलान पर हो लेकिन उनकी सक्रियता पत्रकारों के हित में उनके संघर्ष की क्षमता और कार्यकुशलता वास्तव में सम्मान की पात्र है । निर्भय सक्सेना के बारे में बीते दिनों शहर में एक पत्रिका मे कई आलेख भी प्रकाशित हो चुके हैं। पत्रकार सुरक्षा कानून बनवाना और उनके लिए बाकायदा निश्चित मानदेय और पेंशन दिलाने उनकी शीर्ष प्राथमिकता में शामिल रही है। निर्भय सक्सेना लंबे अरसे से सी बी गंज में श्रमिकों के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम का उच्चीकरण वाला अस्पताल खुलवाने के लिए संघर्ष कर रहे थे । कई बार संतोष गंगवार केंद्रीय मंत्री के माध्यम से भी पत्र भारत सरकार भिजवाए थे जिसमें उन्हें काफी हद तक सफलता मिली है। बीते दिनों जब सीबीगंज में केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम के 100 बेड वाले अस्पताल का भूमि पूजन को जा रहे थे। तब मंत्री श्री संतोष गंगवार ने निर्भय सक्सेना को अपनी गाड़ी में ही बिठा लिया था। मौका पाकर निर्भय सक्सेना ने पत्रकारों की तमाम समस्याएं भी उन्हें बताई थीं।


पत्रकारिता जगत में निर्भय सक्सेना का सफरनामा

निर्भय सक्सेना ने अपने करियर का प्रारम्भ 11 फरवरी 1974 को ‘दैनिक विश्व मानव’ समाचार पत्र से किया। 1979 तक ‘दैनिक विश्व मानव’ में पत्रकारिता करने के उपरांत 1979 ‘दैनिक विश्वामित्र’ कानपुर से जुड़े दैनिक दिव्य प्रकाश में भी रहे।1980 में निर्भय जी ने ‘दैनिक आज’ कानपुर समाचार पत्र में बरेली मण्डल के ब्यूरो चीफ बने । पत्रकारिता जगत को सेवायें प्रदान करना प्रारम्भ किया। पत्रकार निर्भय जी ने 22 वर्ष ‘दैनिक जागरण’ की सेवा में आगरा, ग्वालियर, लखनऊ एवं बरेली संस्करणों में रहे।
वर्ष 1987 में ‘दैनिक जागरण’ समाचार-पत्र ने राजा कर्ण सिंह के बेटे तथा रेल मंत्री माधव राव सिंधिया की बेटी के ग्वालियर में हुए विवाह, जिसे उस समय ‘शाही विवाह’ के नाम से चर्चित हुआ, उसकी रिपोर्टिंग की।
भारत सरकार के रेल मंत्रालय ने मुंबई वीटी स्टेशन पर भारत का पहला कम्प्यूटर टिकट जारी किया था। उस की कवरेज कार्य भी ‘दैनिक जागरण’ ने निर्भय सक्सेना की क्षमता के दृष्टिगत उन्हीं को सौंपा। उन्होंने 7 दिन रेलवे के विभिन्न प्रोजेक्ट पर ‘दैनिक जागरण’ आगरा के लिए कवरेज की।


पत्रकारों को संगठित और एकजुट करने के लिए आज भी कर रहे हैं संघर्ष

निर्भय सक्सेना यू पी जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) के बरेली जनपद के महामंत्री तथा प्रदेश स्तर पर मंत्री एवं उपाध्यक्ष रहे। ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट इंडिया’ के पत्रकारिता स्कूल के उपाध्यक्ष भी रहे। श्री निर्भय सक्सेना ने अब तक 50 बार रक्तदान भी किया है।
नारायण दत्त तिवारी जब यू पी के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने हेलीकॉप्टर से अपने साथ अल्मोड़ा चलने को कहा जिस पर निर्भय जी के इनकार कर कहा कि आज उन्हें लखनऊ जाना था। तब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तिवारी जी ने श्री निर्भय सक्सेना को स्टेट प्लेन से ही लखनऊ भिजवाया था । उस समय निर्भय सक्सेना के साथ अशर्फी लाल भी स्टेट प्लेन से उपजा की बैठक में लखनऊ भी गये थे। वर्तमान में निर्भय सक्सेना स्वतंत्र पत्रकार हैं। ‘मानव सेवा क्लब’ एवं कई संस्थाओं से जुड़कर समाज सेवा कार्य में योगदान कर रहे हैं। यू पी. जर्नलिस्ट एसोसियेशन (उपजा) के साथ पत्रकारों के उत्पीड़न के संघर्ष में हमेशा आगे रहे। पत्रकार वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू कराने का मामला हो या प्रेस की स्वतंत्रता का हनन करने वाले किसी कानून के खिलाफ संघर्ष में अपनी भूमिका निभाते रहे हैं। बिहार में जब प्रेस की स्वतंत्रता को बाधित करने के लिए लाए गये बिल का देश भर में विरोध हुआ जिसमे बरेली भी आगे रहा। उपजा बरेली के प्रयासों से पहली पत्रकार कालोनी बरेली के प्रियदर्शिनी नगर में बनी। नगर निगम के सहयोग से ‘उपजा’ को न्यू सुभाष मार्केट में सिंघल पुस्तकालय के एक भाग में अपना कार्यालय मिला।

बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी से मिले पांच लाख रुपये के अनुदान से उपजा का अपना भवन भी तैयार हो गया। जिले की उपजा इकाई में शुरू से ही किसी न किसी पद पर रहे हैं। प्रदेश में दो बार उपाध्यक्ष रहे हैं। और इस समय नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स इण्डिया (एन यू जे आई) के कार्यपरिषद के सदस्य हैं। इसके अलावा नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इण्डिया के स्कूल की गवर्निंग बाडी मेंबर/उपाध्यक्ष भी रहे हैं । देश में पत्रकारिता पर होने वाली संगोष्ठियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। आज की युवा पीढ़ी के लिए वे प्रेरणा के स्रोत हैं।
सामाजिक संगठनों में आज भी दे रहे हैं समय
निर्भय सक्सेना ही बरेली में एकमात्र ऐसे वरिष्ठ पत्रकार है जो ना केवल स्वतंत्र रूप से स्तंभ लिखते हैं बल्कि बचा हुआ समय ‘मानव सेवा क्लब’ जैसे सामाजिक संगठनों के लिए देते हैं और जनसेवा भी लगातार कर रहे हैं सक्रिय रूप से आज भी उनका बरेली के बड़े नेताओं के साथ उठना बैठना होता है और पत्रकारों की समस्याएं भी उठाते रहते हैं । निर्भय सक्सेना मानते हैं कि पत्रकारिता में इन दिनों भारी उतार-चढ़ाव का दौर है। जब से कोरोना वायरस संक्रमण का दौर शुरू हुआ था तभी से पत्रकारिता और पत्रकारों के सामने नवीन चुनौतियां पैदा हो गई है। पत्रकार आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे है। कई पत्रकार कोविड से जंग लड़कर जीवन से अपने दम पर जंग भी जीते। कोविड 19 में बरेली में दिग्गज मीडियाकर्मी आशीष अग्रवाल, प्रशांत सुमन, नूतन सक्सेना, रामा बल्लभ शर्मा, मोहम्मद यूसुफ, सुभाष पाठक जैसे पत्रकार कोरोना निगल गया ।

पत्रकार और पत्रकारिता संस्थान ऐसे में डिजिटल मीडिया में भी कैरियर की तमाम संभावनाएं पैदा हो गई है। शायद यही वजह है कि डिजिटल मीडिया का स्कोप दिनों दिन बढ़ रहा है। वैसे भी आजकल लोग तुरंत और ताजा खबर पसंद करने लगे हैं ।सोशल मीडिया के माध्यम भी इन दिनों हाथों-हाथ लिए जा रहे हैं देश विदेश की खबरें पलक झपकते ही सोशल मीडिया के माध्यम से देश के एक कोने से दूसरे कोने पहुंच जाती हैं। बीते दिनों टिहरी में आई दैवीय आपदा को लोगों ने अपने मोबाइल पर लाइव देखा। कोविड 19 का यह कोरोनाकाल सचमुच मौजूदा दौर पत्रकारिता के लिए एक क्रांतिकारी और आमूलचूल परिवर्तन के तौर पर देखा जा सकता है। निर्भय सक्सेना मानते हैं कि पत्रकारों को अपना स्किल डेवलपमेंट करना पड़ेगा। मीडिया के बदलते ट्रेंड के साथ खुद भी अपडेट होना पड़ेगा क्योंकि प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है। पत्रकारिता में अनुभव के साथ-साथ अब अत्याधुनिक टूल्स और ट्रिक्स की भी जानकारी रखनी पड़ेगी। सोशल मीडिया पर कई ऐसे ऐप आ चुके हैं जो सूचना क्रांति में काफी मददगार साबित हो रहे हैं।
निर्भय सक्सेना कहते हैं कि अपने विचारों की अभिव्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है कि बड़े बड़े संस्थानों में नौकरी की जाए और अपने विचारों का प्रचार प्रसार किया जाए । अब ब्लॉग लिखे जा सकते हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से अपने समसामयिक लेख लिखकर विचारों की अभिव्यक्ति प्रभावशाली तरीके से करना भी संभव हो चुका है । अपने ज्ञान को अपडेट करने के लिए हर समय हर क्षण सामग्री उपलब्ध है चाहे वो राजनीति का क्षेत्र हो, चिकित्सा हो या नवीनतम ज्ञान विज्ञान। सभी क्षेत्रों में सूचना क्रांति हुई है । नवीनतम ज्ञान उपलब्ध है।

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