यूपी

कोरोना ने महिलाओं को ‘आत्मनिर्भर’ कर बाजारी मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाया

कोविड 19 से फेले कोरोना संक्रमण और दूसरी लहर के बाद लगे लॉकडाउन ने अधिकांश लोगो को घर मे ही रहने को बाध्य कर दिया। इससे एक और जहां लोग घर पर ही बना पौष्टिक खाद्य पदार्थ सेवन कर बाजारू मिलावटी खानपान से भी आजकल बच गए हैं। पुराने संयुक्त परिवारों की तरह सभी मिलावट को रोकने के लिए परिवार की महिलाओं का हाथ बंटाकर सभी परिजन ‘आत्मनिर्भर’ बनाने में कुछ सहयोग करें तो वह भी घर पर ही पौष्टिक खाद्य पदार्थ विभिन्न सस्ते घरेलू पकवान, टमाटर के उत्पाद, आलू के चिप्स, पापड़, कचरी, चना परवल की नमकीन, मिष्ठान, शीतल पेय, मसालों आदि को बनाकर बाजार के मिलावट वाले खाने पीने के समान से अपने परिवार को बचा सकते हैं। बीते दीपावली, होली आदि के त्योहार पर अधिकांश लोगो ने जागरूकता अपनाकर बाजारों में मिलावटी रंग बिरंगी कचरी, पापड़, मिलावटी मावा, खाद्य पदार्थो से दूरी भी बनाई थी। अगर आप और हम भी थोड़ा जागरूक होकर ऐसे मिलावटी सामान से दूरी बनाना शुरू कर दें तो बाजार में कोरोना काल की तरह ही मांग कम होने पर आगामी सालो में भी मिलावटी सामान भी बाजार से उसी प्रकार कम हो जाएगा जैसे बाजार से आजकल ‘चीन के उत्पाद’ कम ही नजर आते हैं। त्योहारों पर भी मिलावट पर छापामारी होती ही है आजकल हॉस्पिटल में कोविड मरीजो से अधिक धनराशि की बसूली, जीवन रक्षक दवा, ऑक्सीजन की जमाखोरी, नकली दवा बेचने पर भी निरंतर छापे पड़ रहे है, पर परिणाम कब आएगा अभी पता नहीं। बरेली में नगर निगम पार्षद गौरव सक्सेना ने कुछ हॉस्पिटल से अधिक बसूली गई धनराशि वापस भी कराई। राजेंद्र नगर में पार्षद सतीश कातिब अपने साथियो कुकी अरोरा आदि के साथ जिला प्रशासन के सहयोग से कोरोना की निःशुल्क जांच भी करा रहे है । कई संगठन कोविड से संक्रमित मरीजो को नाम मात्र शुल्क या निशुल्क भी दोनों समय भोजन, ऑक्सीजन लंगर भी चला रहे है। बाजार बंदी से एक और मिलावटी दूध की खपत भी कम हो गई। मिलाबट का खाद्य सामान बेचने बाले भी अब परेशान या डरे डरे रहते हैं। सभी को कोरोना ने उनके गलत कर्म भी याद दिला दिए। बाजार में आजकल सीजन की सब्जी टमाटर, आलू की भरमार है। आप भी बाजार से आलू लाकर पुराने संयुक्त परिवार को याद कर अपने आजकल के एकल परिवार में भी कुछ समय निकाल कर टमाटर के स्टोर करने बाले चटनी, सॉस, उत्पाद घर पर ही बना सकते हैं। आलू के चिप्स, कचरी, पापड़,चना परवल की नमकीन, मिष्ठान आदि बना सकती हैं। अपनी घरेलू मांग के हिसाब से बच्चों के साथ यह उत्पाद बना कर आप भी उन्हें घरेलू उत्पादों को बनाने की दिशा में शिक्षित ही नहीं मिलावट सामान से बचने में भी जागरूक करने का संदेश दे सकती है। घर मे ही आप भी खड़े मसालों को मिक्सर ग्राइंडर में पीस कर शुद्ध मसालों से एक और जहाँ अपने परिवार के स्वास्थ्य को भी बेहतर बना सकती हैं। साथ ही मसालों के कथित ब्रांडेड उत्पाद से बचकर अपनी काफी धनराशि भी बचा सकती हैं। कोरोना काल मे लॉकडाउन में सभी ने अपने अपने पर्व घर पर ही मनाए है।

बाजार में मिष्ठान, खोया/मावा के अलावा दूध की भी मांग कम हुई तो आप स्वमं अंदाज लगाये की वह नकली दूध अब कहाँ जा रहा है। कोविड के कारण आजकल तो भब्य शादी पार्टी भी साल भर से बंद है। जो अब घरेलू 20 या 25 सदस्यों तक ही सिमट गई हैं। जिसमे सभी जाने से बच रहे हैं।
देश प्रदेश ही नहीं बरेली में भी मिष्ठान की खपत में कमी आई है। कुतुबखाना के खोया मंडी में खोया- मावा की कई दुकानें हैं। जहां ग्रामीण एरिया से पल्लों में खोया आता था। जिसमे भी कमी आ गई है। इसलिए कम दाम में आपको केवल मिलावट का माल ही पहले मिलता था। मांग एवम आपूर्ति का भारी अंतर भाव मे होता ही रहता है। एफ एफ एस आई बाजार में छापेमारी कर मिलावटी खाध पदार्थ सीज करती भी है पर उसके परिणाम आने में विलंब ही होता है। बरेली में तो कुछ जमाखोर, मिलावटखोर भामाशाह बनकर कुछ कथित नेताओं का भी कथित संरक्षण पा रहे हैं जिनकी जनता में चर्चा भी है। कोरोना के इस आपदा काल में जमाखोरी या मिलावट के लिए की गई छापामारी पर पुलिस में रिपोर्ट के बाद भी परिणाम सामने कम ही आ पा रहें हैं ?

निर्भय सक्सेना, पत्रकार बरेली। 9411005249 7060205249

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