यूपी

अब महेंद्र गायत्री अस्पताल की लूट का हुआ खुलासा, सरकारी दर से दोगुना अधिक की वसूली, क्या इस बार कार्रवाई करेंगे डीएम या दबा देंगे मामला?

नीरज सिसौदिया, बरेली
कोरोना काल में बरेली जिले के अस्पतालों में लूट खसोट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. कहीं मरने वालों के गहने चुराए जा रहे हैं तो कहीं सरकारी दर से दोगुना राशि वसूली जा रही है. विनायक अस्पताल द्वारा लूट खसोट के मामले उजागर होने के बाद अब इज्जतनगर स्थित महेंद्र गायत्री अस्पताल का मामला सामने आया है. इसकी शिकायत भी जिला अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से की गई है. अब देखना यह है कि इस मामले में डीएम नितीश कुमार और सीएमओ डा. एसके गर्ग कार्रवाई करते हैं अथवा विनायक अस्पताल की तरह यह मामला भी दबा दिया जाता है या सिर्फ पीड़ित के पैसे वापस कराकर रफा दफा कर दिया जाता है.
294बी इंद्रा नगर निवासी सतीश चंद्र अग्रवाल ने डीएम को भेजी गई शिकायत में कहा है कि कुछ दिन पहले उनकी पत्नी नीता अग्रवाल की तबीयत बिगड़ गई थी. निजी डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने सीटी स्कैन कराया. 4 मई को ऑक्सीजन लेवल 87% हो जाने एवं एंटीजन रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के कारण महेंद्र गायत्री अस्पताल इज्जत नगर बरेली में भर्ती कराया था. इलाज के दौरान रात्रि के समय अस्पताल के स्टाफ द्वारा ऑक्सीजन का प्रेशर कम कर दिया जाता था तथा डॉक्टर से इस संबंध में शिकायत करने पर उनके द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जाती थी. 1 सप्ताह इलाज के बाद अस्पताल के डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने 11 मई को दोबारा सीटी स्कैन कराया तब रिपोर्ट काफी ज्यादा बढ़ कर इसको 19/25 पाई गई तथा 1 सप्ताह के इलाज के बाद भी ऑक्सीजन के लेवल में कोई सुधार नहीं हुआ. 4 मई से 14 मई तक लगातार इलाज के दौरान डॉक्टर द्वारा सही बीमारी के अनुरूप इलाज न करने के कारण 14 मई की दोपहर को उनकी पत्नी की हालत ज्यादा बिगड़ गई जिसके कारण उन्हें तत्काल शहर के दूसरे अस्पताल में ले जाया गया. जहां 2 दिन इलाज के उपरांत 16 मई को उनकी मृत्यु हो गई. आरोप है कि 11 दिन के इलाज के दौरान डॉक्टर द्वारा बीमारी के अनुरूप इलाज किया गया होता तो आज उनकी पत्नी जीवित होती. डॉक्टर ने इलाज में घोर लापरवाही बरती है जिसकी जांच की जानी चाहिए.
उन्होंने बताया कि अस्पताल में 4 मई से 14 मई तक कुल 11 दिन इलाज के दौरान डॉक्टर द्वारा ₹25000 प्रतिदिन की दर से कुल 2 लाख 75000 रुपये का बिल बनाया गया जिसमें ₹5000 की छूट देते हुए ₹270000 वसूले गए जो कि उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ चिकित्सा अनुभाग 5 संख्या 696/5.5.2021 दिनांक 13 अप्रैल 2021 में निर्धारित दरों से लगभग दोगुनी दर है. शासनादेश में नॉन एनएबीएच कैटेगरी के अस्पतालों हेतु आईसीयू बिना वेंटीलेटर की दर पीपीई किट सहित ₹13000 प्रतिदिन निर्धारित की गई है. अस्पताल द्वारा वसूली गई धनराशि के सापेक्ष अधिक चार्ज की गई धनराशि को समायोजित करने के उद्देश्य से एक ही तारीख 14 मई में तीन अलग-अलग प्रयोजन हेतु बिल जारी किए गए जिससे स्वत: स्पष्ट है कि किसी भी तरह अधिक वसूली की गई धनराशि को समायोजित करने के उद्देश्य से डॉक्टर द्वारा ऐसा किया गया है.
उन्होंने बताया कि 14 मई को पहला एस्टीमेट बिल जारी किया गया जिसमें कुल 11 दिन तक ₹25000 प्रतिदिन की दर से इलाज प्राइवेट रूम में होना दर्शाया गया है. वहीं दूसरे जारी किए गए फाइनल बिल में 14 मई को ही संपूर्ण इलाज आईसीयू में ₹18000 प्रतिदिन की दर से होना दर्शाया गया है तथा अधिक वसूली गई धनराशि को बिल में समायोजित करने के उद्देश्य से फर्जी रूप से प्राइवेट अटेंडेंट चार्ज ₹4500 प्रतिदिन की दर से ₹54000 लगाया गया है जबकि उन्हें ऐसी कोई भी सुविधा नहीं दी गई थी. इसके अलावा डॉक्टर द्वारा 14 मई को एक और बिल उपलब्ध कराया गया जिसमें इलाज की अवधि को दो भागों में बांटते हुए मात्र 2 दिन का इलाज आईसीयू में ₹18000 प्रतिदिन की दर से किया जाना एवं 9 दिन का इलाज प्राइवेट रूम में ₹25000 प्रतिदिन की दर से किए जाने का उल्लेख किया गया है. इस संबंध में जब उन्होंने डॉक्टर से बात की तो उन्हें बताया गया कि जो आधारहीन बिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं वह चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति हेतु मान्य नहीं है. तब उनके द्वारा 26 मई को एक प्रमाण पत्र जारी किया गया कि आईसीयू में पलंग व वेंटिलेटर को गंभीर मरीजों के लिए बहुत आवश्यकता थी तथा उनकी पत्नी को आईसीयू में परेशानी महसूस हो रही थी इसलिए प्राइवेट वार्ड में इलाज किया गया. यह बात पूरी तरह असत्य और निराधार है.
उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि 4 मई से 11 मई को शाम 6:00 बजे तक 8 दिन तक इलाज आईसीयू में हुआ. उसके बाद 14 मई की दोपहर तक इलाज प्राइवेट रूम में हुआ है जिसके प्रमाण भी उनके पास मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि एक ही इलाज हेतु जारी किए गए तीनों बिलों एवं प्रमाण पत्रों में आपस में कोई तालमेल नहीं है साथ ही बिलों में रूम नंबर 212 लिखा गया है जबकि आईसीयू में इलाज बेड संख्या दो पर हुआ तथा प्राइवेट इलाज रूम नंबर 12 में हुआ है. प्राइवेट रूम नंबर 12 का प्रतिदिन का ₹26000 चालू किया गया है जबकि उसकी हालत एकदम साधारण एवं निम्न स्तर की थी जिसमें कोई विशेष सुविधा उपलब्ध नहीं थी यहां तक कि उसमें ऑक्सीजन का प्रेशर भी सुचारू रूप से कार्य नहीं कर रहा था जिसका चार्ज किसी भी दशा में ऑक्सीजन सहित लगभग ₹4000 प्रतिदिन से अधिक नहीं होना चाहिए. अस्पताल में प्राइवेट रूम नंबर 12 की स्थिति की जांच किसी भी समय कराई जा सकती है. इस प्रकार डॉक्टर द्वारा 8 दिन के आईसीयू में वास्तविक इलाज के दौरान ₹13000 प्रतिदिन की दर से ₹104000 की धनराशि तथा 3 दिन के प्राइवेट रूम में वास्तविक इलाज के दौरान लगभग ₹4000 प्रतिदिन की दर से ₹12000 की धनराशि ली जानी चाहिए थी जबकि अस्पताल प्रबंधन ने उनसे ₹270000 वसूल लिए. इसकी जांच कराकर अधिक वसूली गई धनराशि 154000 रुपये उन्हें वापस कराई जानी चाहिए. साथ ही उन्होंने ऐसे भ्रष्ट एवं इलाज में लापरवाह अस्पताल के विरुद्ध कठोर कारवाई करने की मांग भी की है. उन्होंने जिला अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शिकायत पत्र भेजते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है.
इस संबंध में जब अस्पताल संचालक से बात करने का प्रयास किया गया तो उनसे बात नहीं हो सकी. अगर वह चाहें तो मोबाइल नंबर 7528022520 पर फोन कर अपना पक्ष दे सकते हैं. हम उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे.

सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा

वार्ड 23 के पार्षद और बीडीए के सदस्य सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा ने ऐसे लुटेरे अस्पतालों को तत्काल सील करने की मांग की है. वहीं, सपा के पूर्व जिला महासचिव एवं जिला सहकारी संघ के पूर्व चेयरमैन महेश पांडेय ने अस्पताल संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुए अस्पताल को सील करने की मांग की है. उन्होंने कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है.

महेश पांडेय

उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा लूट खसोट के एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं लेकिन सीएमओ डा. एसके गर्ग और जिलाधिकारी नितीश कुमार अस्पताल संचालकों से साठगांठ कर मामले दबा दे रहे हैं. ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है.

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