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क्‍या आईएमए की गरिमा को तार-तार कर रहे हैं डा. विनोद पागरानी?

नीरज सिसौदिया, बरेली
यूपी में सियासत का महासंग्राम छिड़ा हुआ है। हर तरफ चुनावी शोर है। कोई किसी की ओर है तो कोई किसी की ओर है। छोटे-छोटे सामाजिक संगठनों से लेकर वोटों के बड़े-बड़े ठेकेदार अपना-अपना स्‍वार्थ सिद्ध करने में जुटे हैं लेकिन इस सियासी उधेड़बुन में देश के कुछ प्रतिष्ठित संगठनों के पदाधिकारियों पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। बात अगर बरेली शहर की करें तो यहां इन दिनों आईएमए के अध्‍यक्ष डा. विनोद पागरानी चर्चा में हैं। डा. विनोद पागरानी बेहद काबिल डाक्‍टर हैं लेकिन राजनीति में उनका रुझान ज्‍यादा नजर आता है। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है उनकी गिनती 124 बरेली शहर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट के दावेदारों में हो रही थी। हालांकि, संगठन ने उन्‍हें कोई तवज्‍जो नहीं दी और निवर्तमान विधायक डा. अरुण कुमार पर एक बार फिर से भरोसा जताया। इसके बाद भी डा. विनोद पागरानी का राजनीति प्रेम खत्‍म नहीं हुआ। भाजपा के प्रति अपने समर्पण का परिचय देते हुए डा. विनोद पागरानी पार्टी के उम्‍मीदवारों के कार्यालयों में दिन-रात चक्‍कर लगा रहे हैं। भाजपा उम्‍मीदवारों के मंच पर कोने में ही सही, वह आसानी से देखे जा सकते हैं। डा. पागरानी के इस भाजपा प्रेम को पार्टी नेता भी भुनाने से नहीं चूक रहे। खुले मंच से भाषणों में स्‍पष्‍ट रूप से कहा जा रहा है कि आज हर वर्ग भाजपा के साथ है, आईएमए के प्रेसीडेंट खुद भाजपा के मंच पर हैं और भाजपा के साथ हैं। ऐसा ही नजारा आज शहर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्‍याशी डा. अरुण कुमार के मुख्‍य चुनाव कार्यालय के मौके पर देखने को मिला। यहां मंच पर पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, मेयर डा. उमेश गौतम, पूर्व सपा प्रत्‍याशी अनिल शर्मा, वरिष्‍ठ भाजपा नेता गुलशन आनंद सहित कई दिग्‍गजों के बीच एक कोने में आईएमए अध्‍यक्ष (अगले साल के लिए) डा. विनोद पागरानी भी मंच साझा करते नजर आए। उनके साथ वर्तमान आईएमए अध्यक्ष डा. विमल भारद्वाज भी थे। इस दौरान एक भाजपा नेता मंच से भाषण देने लगे। उन्‍होंने कहा, “आज हर वर्ग भाजपा के साथ है। आईएमए प्रेसीडेंट भी हमारे साथ मंच पर मौजूद हैं।”
यहां गौरतलब बात यह है कि उक्‍त भाजपा नेता ने डा. विनोद पागरानी हमारे साथ हैं कहने की जगह आईएमए प्रेसीडेंट हमारे साथ हैं कहकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि पूरी आईएमए भाजपा के साथ है। इस पर विनोद पागरानी की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। नेता को यह मालूम था कि विनोद पागरानी का अपना कोई वजूद नहीं है लेकिन आईएमए एक प्रतिष्ठित संगठन है जिसका साथ होने एक सकारात्‍मक संदेश देता है। अब सवाल यह उठता है कि डा. विनोद पागरानी क्‍या वाकई आईएमए की गरिमा का ख्‍याल रख पा रहे हैं? क्‍या इस तरह से भाजपा उम्‍मीदवारों के कार्यालयों के चक्‍कर लगाने से आईएमए की प्रतिष्‍ठा पर सवाल नहीं उठेंगे?

डा. विनोद पागरानी।

बता दें कि आईएमए यानि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन एक गैर राजनीतिक संगठन है जिसका उद्देश्‍य चिकित्‍सकों के हक की लड़ाई लड़ना है। फिर चाहे वह लड़ाई किसी खास वर्ग से हो या सरकार से। यहां सवाल यह उठता है कि क्‍या भाजपा नेताओं के दरबार में हाजिरी लगाने वाले डा. विनोद पागरानी भाजपा सरकार के खिलाफ कभी चिकित्‍सकों की आवाज बुलंद कर पाएंगे? नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर आईएमए से जुड़े कुछ चिकित्‍सकों ने कहा कि आईएमए एक प्रतिष्ठित संगठन है लेकिन डा. विनोद पागरानी जैसे लोग उसकी गरिमा को तार-तार करने में लगे हैं। आईएमए का अपना एक अलग वजूद है। अगर आईएमए अध्‍यक्ष ही नेताओं के दरबार में हाजिरी लगाता रहेगा तो संगठन की गरिमा उन नेताओं की नजरों में शून्‍य से ज्‍यादा नहीं जाएगी। अत: डा. विनोद पागरानी को यह कदापि नहीं भूलना चाहिए कि वह एक प्रतिष्ठित संगठन के अध्‍यक्ष हैं और उन्‍हें अपने पद की प्रतिष्‍ठा का पूरा ध्‍यान रखना चाहिए। इस तरह किसी एक पार्टी के नेताओं के दरबार में हाजिरी लगाना उन्‍हें शोभा नहीं देता। व्‍यक्तिगत रूप से वह स्‍वतंत्र हैं और कुछ भी कर सकते हैं लेकिन उन्‍हें यह जरूर ध्‍यान देना चाहिए कि उनकी वजह से संगठन की प्रतिष्‍ठा पर सवाल खड़े न हों।


इस संबंध में आईएमए के सदस्‍य डा. अनीस बेग ने कहा कि आईएमए अध्‍यक्ष के किसी पार्टी के मंच पर बैठने का मतलब यह नहीं होता कि पूरी आईएमए उस पार्टी या नेता के साथ है। अगर आईएमए किसी पार्टी को समर्थन देगी तो उसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होगा। पहले एक कार्यकारिणी की बैठक में यह प्रस्‍ताव लाया जाएगा। अगर किसी कारणवश प्रस्‍ताव पास नहीं होता है तो जनरल बॉडी की मीटिंग बुलाई जाएगी। जब उस जनरल बॉडी की मीटिंग में प्रस्‍ताव पास होगा तभी आईएमए अध्‍यक्ष सार्वजनिक मंच से यह घोषणा कर सकता है कि आईएमए किसी पार्टी या व्‍यक्ति विशेष को समर्थन दे रही है। बरेली में फिलहाल ऐसा कोई प्रस्‍ताव पास नहीं हुआ है।

डा. अनीस बेग

इस संबंध में जब डा. विनोद पागरानी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। अगर वह चाहें तो हमें मोबाइल नंबर 7528022520 पर फोन कर या वॉट्सएप के माध्‍यम से अपना पक्ष दे सकते हैं। हम उनका पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे।

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