नई दिल्ली। किसी कर्मचारी के रिटायर होने के बाद उसके वारिस को अनुकंपा के आधार पर नौकरी नहीं दी जा सकती है. ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है. ये बातें सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहीं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों के रिटायरमेंट पर उनके वारिस को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करता है. न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने इसे गलत करार दिया. पीठ ने कहा कि यदि इस तरह की नियुक्ति की अनुमति दी जाती है तो बाहरी लोग कभी भी नियुक्त नहीं हो पाएंगे और प्रतिभावान लोग अवसरों से वंचित रह जाएंगे. अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति ऑटोमेटिक नहीं है और इसके लिए परिवार की वित्तीय स्थिति, दिवंगत कर्मचारी पर परिवार की आर्थिक निर्भरता तथा परिवार के अन्य सदस्यों के व्यवसाय सहित विभिन्न मानकों की कड़ी पड़ताल की जानी चाहिए. इस मामले में एक इंडस्ट्रियल कोर्ट ने अहमदनगर महानगर पालिका को कर्मचारियों के वारिसों को उनकी रिटायरमेंट पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- रिटायर्ड कर्मियों के बच्चों को नहीं दी जा सकती अनुकंपा के आधार पर नौकरी




