पालघर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महाराष्ट्र के तटीय सिंधुदुर्ग जिले में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा ढहने को लेकर मराठा शासक के साथ ही इस घटना से आहत लोगों से भी शुक्रवार को माफी मांगी। प्रधामंत्री ने कहा कि वह शिवाजी महाराज के चरणों में अपना शीश झुकाकर माफी मांगते हैं। शिवाजी महाराज की 35 फुट ऊंची प्रतिमा गिरने के मुद्दे पर विपक्ष राज्य की महायुति सरकार को विधानसभा चुनाव के पहले आड़े हाथ ले रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को भी आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कुछ लोग स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व की विचारधारा वाले विचारक वी डी सावरकर को गाली देते रहते हैं, लेकिन उनका अपमान करने के लिए माफी मांगने को तैयार नहीं हैं। महाराष्ट्र के पालघर जिले में 76,000 करोड़ रुपये की लागत वाली वधावन बंदरगाह परियोजना की आधारशिला रखने के बाद मोदी ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज… सिर्फ नाम या राजा नहीं हैं, हमारे लिए छत्रपति शिवाजी महाराज आराध्य देव हैं। पिछले दिनों सिंधुदुर्ग में जो हुआ, आज मैं अपने आराध्य देव छत्रपति शिवाजी महाराज जी के चरणों में सिर झुकाकर माफी मांगता हूं।” मोदी ने सिंधुदुर्ग जिले में 35 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण चार दिसंबर, 2023 को नौसेना दिवस के अवसर पर किया था, लेकिन यह इस साल 26 अगस्त को यह प्रतिमा ढह गई। इस प्रतिमा का उद्देश्य समुद्री रक्षा के प्रति छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का सम्मान करना था। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संस्कार अलग हैं। हम वह लोग नहीं हैं जो आए दिन भारत मां के महान सपूत, इसी धरती के लाल वीर सावरकर को अनाप-शनाप गालियां देते रहते हैं, अपमानित करते रहते हैं, देशभक्तों की भावनाओं को कुचलते हैं।” उन्होंने कहा कि वे लोग वीर सावरकर को गालियां देने के बाद भी माफी मांगने को तैयार नहीं हैं और ना ही उनको कोई पश्चाताप होता है। विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र की जनता उनके संस्कार को अब जान गई है।” उन्होंने कहा, ‘‘जैसे ही मैं यहां उतरा, मैंने सबसे पहले शिवाजी से प्रतिमा गिरने की घटना के लिए माफी मांगी। मैं उन लोगों से भी माफी मांगता हूं जो इससे आहत हुए हैं।” राज्य सरकार ने घोषणा की है कि राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों वाली नौसेना की अध्यक्षता में एक संयुक्त तकनीकी समिति सोमवार को प्रतिमा गिरने के कारणों की जांच करेगी। मोदी ने कहा कि विकसित महाराष्ट्र, विकसित भारत के संकल्प का एक अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए पिछले 10 वर्षों में हमने महाराष्ट्र की प्रगति के लिए लगातार बड़े फैसले लिए हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि राज्य और पूरे देश को महाराष्ट्र की क्षमताओं का लाभ मिले, वधावन बंदरगाह की आधारशिला आज रखी गई है।” मोदी ने कहा कि जब उन्हें 2013 में भाजपा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था तो वह शिवाजी के तत्कालीन राज्य की राजधानी रायगढ़ गए और मराठा सम्राट की समाधि के सामने उन्होंने ध्यान लगाया था। सिंधुदुर्ग जिले की मालवण तहसील में राजकोट किले में स्थापित मराठा योद्धा की प्रतिमा गिरने के बाद मोदी की यह पहली टिप्पणी है। मोदी से पहले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री अजित पवार भी इस घटना पर माफी मांग चुके हैं। प्रतिमा गिरने की घटना पर राज्य भर के लोगों ने आक्रोश व्यक्त किया है। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए उस पर शिवाजी महाराज का अपमान करने का आरोप लगाया। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार तटीय गांवों के विकास पर अधिक ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि क्षमता बढ़ाने के लिए मछुआरा सहकारी समितियों को भी मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकारों ने पिछड़े वर्गों के कल्याण और वंचितों के सशक्तीकरण के लिए पूरे समर्पण और ईमानदारी से काम किया है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोग इस परियोजना को कभी पूरा नहीं होने देना चाहते थे। 2014 में आपने (राजग को) दिल्ली में काम करने का मौका दिया। 2016 में जब देवेंद्र फडणवीस सत्ता में थे तो परियोजना पर काम गंभीरता से लिया गया।” मोदी ने कहा, ‘‘बंदरगाह को 2020 में बनाने का निर्णय लिया गया था लेकिन सरकार बदल गई (2019 में जब शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राकांपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन किया) और ढाई साल तक कोई काम नहीं हुआ।” उन्होंने कहा कि यह अकेली परियोजना 12 लाख रोजगार के अवसर प्रदान कर सकती है। मोदी ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र के विकास से किसे दिक्कत हो सकती है? कौन लोग हैं जिन्हें रोजगार देने से दिक्कत है? कुछ लोग महाराष्ट्र को पीछे रहने देना चाहते हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने और निरंतर प्रयासों के माध्यम से राष्ट्र में समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह मछली उत्पादन में महिलाओं की भागीदारी को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है।” उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से हमने हजारों महिलाओं को सशक्त बनाया है, जिससे वे इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।” मोदी ने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है। उन्होंने कहा कि 2014 में, देश का मछली उत्पादन केवल 80 लाख टन था, लेकिन अब भारत लगभग 170 लाख टन मछली का उत्पादन करता है। मोदी ने कहा, ‘‘इसका मतलब है कि केवल 10 वर्षों में, हमने मछली उत्पादन को दोगुना कर दिया है।” उन्होंने कहा, ‘‘हमने वधावन परियोजना के लिए 76,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह देश का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह होगा।” मोदी ने 1,560 करोड़ रुपये की 218 मत्स्य परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। मोदी ने कहा कि तटों की वजह से महाराष्ट्र का अंतरराष्ट्रीय व्यापार से सदियों पुराना संबंध है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रगति की दिशा में भारत की यात्रा में आज एक ऐतिहासिक दिन है। ‘नया भारत’ अपनी ताकत जानता है और गुलामी की बेड़ियों को पीछे छोड़ चुका है।” इस परियोजना का उद्देश्य एक विश्व स्तरीय समुद्री प्रवेश द्वार स्थापित करना है, जो बड़े कंटेनर जहाजों की ज़रूरतों को पूरा करते हुए, समुद्र के तटीय तल को गहरा बनाकर तथा अति विशाल मालवाहक जहाजों को समायोजित करके देश के व्यापार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। पालघर जिले के दहानू शहर के पास स्थित वधावन बंदरगाह भारत के सबसे बड़े गहरे पानी के बंदरगाहों में से एक होगा। यह अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों को सीधा संपर्क प्रदान करेगा, जिससे पारगमन समय और लागत कम होगी। एक बार चालू होने के बाद, यह बंदरगाह भारत की समुद्री ‘कनेक्टिविटी’ को बढ़ाएगा और वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में इसकी स्थिति को और मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर लगभग 360 करोड़ रुपये की लागत से पोत संचार और सहायता प्रणाली के ‘नेशनल रोल आउट’ की शुरुआत भी की। इस परियोजना के तहत, 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मशीनीकृत और मोटर चालित मछली पकड़ने वाले जहाजों पर चरणबद्ध तरीके से एक लाख ट्रांसपोंडर लगाए जाएंगे।
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