किसानों को 14 हजार करोड़ का तोहफा, सुप्रीम कोर्ट ने शंभू बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों के लिए बनाई कमेटी, अभी नहीं खुलेगा शंभू बॉर्डर, पढ़ें क्या-क्या हुए मोदी कैबिनेट के फैसले और क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के मकसद से सोमवार को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए लगभग 14,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाले सात बड़े कार्यक्रमों की घोषणा की। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा स्थित शंभू बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के लिए कमेटी का गठन किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कृषि क्षेत्र से संबंधित सात बड़े कार्यक्रमों को मंजूरी दी गई। इनमें 2,817 करोड़ रुपये का डिजिटल कृषि मिशन और फसल विज्ञान के लिए 3,979 करोड़ रुपये की योजना शामिल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल में लिए गए इस निर्णय की संवाददाताओं को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन व्यापक कृषि कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना है। इन कार्यक्रमों का ध्यान मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और शिक्षा, जलवायु बदलावों से तालमेल बिठाने, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन और डिजिटलीकरण के साथ बागवानी और पशुधन क्षेत्रों के विकास पर होगा। मंत्रिमंडल ने खाद्य एवं पोषण सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए फसल विज्ञान को मंजूरी दी है और इसके लिए कुल 3,979 करोड़ रुपये का परिव्यय किया गया है। इस कार्यक्रम में छह बिंदुओं पर बल दिया गया है, जिनका उद्देश्य वर्ष 2047 तक जलवायु अनुकूल फसल विज्ञान और खाद्य सुरक्षा के लिए किसानों को तैयार करना है। ये छह बिंदु अनुसंधान और शिक्षा, पादप आनुवंशिक संसाधन प्रबंधन, खाद्य और चारा फसल के लिए आनुवंशिक सुधार, दलहन एवं तिलहन फसल सुधार, वाणिज्यिक फसलों में सुधार और कीटों, सूक्ष्म जीवों एवं परागण तत्वों से जुड़े शोध से संबंधित हैं। वैष्णव ने कहा कि मंत्रिमंडल ने कृषि शिक्षा, प्रबंधन और सामाजिक विज्ञान को मजबूत करने के लिए 2,291 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के मातहत संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य नई शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप कृषि शोध एवं शिक्षा को आधुनिक बनाना है। डिजिटल बुनियादी अवसंरचना, एआई, बिग डेटा, रिमोट जैसी नवीनतम प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा और कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती और जलवायु सहजता शामिल हैं। मंत्रिमंडल ने 2,817 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ डिजिटल कृषि मिशन को भी मंजूरी दी। इस परियोजना के आधार स्तंभ कृषि ढांचा और कृषि निर्णय सहायता प्रणाली हैं। मंत्री ने कहा कि पशुधन के सतत स्वास्थ्य और उनके उत्पादन के लिए 1,702 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी दी गई है। वैष्णव ने कहा कि मंत्रिमंडल ने बागवानी के लिए 860 करोड़ रुपये, कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए 1,202 करोड़ रुपये और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को मजबूती देने के लिए 1,115 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी दी है। कृषि क्षेत्र से संबंधित इन सातों कार्यक्रमों के लिए कुल आवंटन 13,960 करोड़ रुपये से अधिक का है।
वहीं, उच्चतम न्यायालय ने शंभू सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की शिकायतों के सौहार्दपूर्ण निवारण के लिए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति नवाब सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को एक समिति का गठन किया। न्यायालय ने कहा कि किसानों के प्रदर्शन के मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने समिति को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के अंदर वह अपनी पहली बैठक बुलाए। उसने समिति से यह भी कहा कि आंदोलनकारी किसानों से संपर्क साधे और उनसे तत्काल पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू सीमा से ट्रैक्टर और ट्रॉली आदि हटाने को कहा जाए ताकि आम यात्रियों को राहत मिले। पीठ ने कहा कि पंजाब और हरियाणा की सरकारें समिति को सुझाव देने के लिए स्वतंत्र होंगी। समिति में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी पी एस संधू, देवेंद्र शर्मा, प्रोफेसर रंजीत सिंह घुमम्न और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्री डॉ सुखपाल सिंह शामिल हैं। उच्चाधिकार प्राप्त समिति को विचार-विमर्श के लिए मुद्दे तैयार करने की सलाह देते हुए पीठ ने समिति के अध्यक्ष को निर्देश दिया कि जब भी आवश्यकता हो, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बी आर कंबोज को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में आमंत्रित किया जाए और उनकी विशेषज्ञ राय ली जाए। पीठ ने प्रदर्शनकारी किसानों को आगाह किया कि वे राजनीतिक दलों से एक सुरक्षित दूरी बनाकर रखें और ऐसी मांगों पर अड़े न रहें जो व्यवहार्य नहीं हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसानों के मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और समिति को उन पर चरणबद्ध तरीके से विचार करना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि किसानों को उनका शांतिपूर्ण आंदोलन वैकल्पिक स्थानों पर ले जाने की आजादी होगी। अदालत हरियाणा उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली हरियाणा सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आदेश में सरकार से अंबाला के पास शंभू सीमा पर लगाए गए अवरोधकों को एक सप्ताह में हटाने को कहा गया था जहां प्रदर्शनकारी किसानों ने 13 फरवरी से डेरा डाल रखा है। हरियाणा सरकार ने फरवरी में अंबाला-नयी दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवरोधक लगा दिए थे, जब ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ (गैर-राजनीतिक) और ‘किसान मजदूर मोर्चा’ ने घोषणा की थी कि किसान अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली तक मार्च करेंगे, जिसमें उनकी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग भी शामिल है।
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