यूपी

अब तो जागो योगी जी, योगी की अपनी पार्टी के मेयर उमेश गौतम और भाजपा नेताओं ने सीएम योगी को दिखाया आईना, खोली भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की पोल, बीच सड़क पर भिड़ गए अफसरों से, देखें मारपीट का वीडियो, पढ़ें क्या है पूरा मामला?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार चीख-चीख कर यह दावे करते आ रहे हैं कि यूपी की नौकरशाही भ्रष्टाचार में लिप्त है लेकिन योगी आदित्यनाथ लगातार उनके दावों को खारिज करते हुए भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा करते रहते हैं। योगी आदित्यनाथ के इन दावों को अब बरेली के मेयर और वरिष्ठ भाजपा नेता उमेश गौतम एवं उनके समर्थक भाजपा नेताओं ने आईना दिखा दिया है। इन नेताओं के दावे यह दर्शाते हैं कि योगी आदित्यनाथ जमीनी हकीकत से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। अब या तो योगी आदित्यनाथ के दावे खोखले हैं या फिर मेयर उमेश गौतम और उनके समर्थक भाजपा नेता झूठ बोल रहे हैं। दोनों ही सूरत में एक बात तो स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार हो रहा है।

दरअसल, कुछ समय पहले तक पूरा मामला शांत था। कहीं कोई भ्रष्टाचार सत्ता पक्ष को नजर नहीं आ रहा था लेकिन शनिवार को जैसे ही बरेली विकास प्राधिकरण की टीम प्रेम नगर थानांतर्गत प्रभात नगर में सील किए गए एक निर्माणाधीन शोरूम की सील खोलने वाले शोरूम मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची तो मेयर उमेश गौतम और उनके समर्थक बीडीए अधिकारियों से पुलिस की मौजूदगी में ही भिड़ गए। नौबत हाथापाई तक आ पहुंची और मेयर के समर्थक मारपीट पर उतारू हो गए। वो बीडीए अधिकारी के कपड़े खींचने लगे और उसे धक्का देने लगे। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसके बाद मेयर ने समाचार पत्रों को दिए गए बयान में योगी सरकार के अधिकारियों के भ्रष्टाचार की पोल खोल डाली।

बीडीए अधिकारी के साथ हाथापाई करते भाजपा नेता।

एक प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र ने मेयर उमेश गौतम के हवाले से लिखा, ‘बीडीए ने लूट मचा रखी है। तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर व्यापारियों से वसूली की जा रही है। बीडीए के एई अनिल कुमार के नेतृत्व में जेई रमन कुमार और एक गुंडा 15-20 लोगों के साथ आया था और शोरूम मालिक रोहित शौरी से 50 हजार रुपए छीन लिए। बीडीए के वीसी और सचिव के लिए भी पांच लाख रुपए मांगे। भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों पर भी एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाए। बीडीए के अफसर कह रहे हैं कि शोरूम का नक्शा पास नहीं था लेकिन हकीकत यह है कि नक्शा 1984 से पास है। लड़ाई नक्शे की नहीं है, आर्किटेक्ट से मिलने वाले कमीशन की है। अब शोरूम संचालक, आर्किटेक्ट के भाई को परेशान किया जा रहा है। निर्माण को लेकर शोरूम सील नहीं किया गया, फिनिशिंग के काम पर शोरूम सील किया गया। फिनिशिंग तो कोई भी करा सकता है। इसमें शोरूम सील कराने का मतलब क्या है।” मेयर का यह बयान दैनिक समाचार पत्र ने प्रमुखता से प्रकाशित किया जो उत्तर प्रदेश की उस कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है जिसकी दुहाई देते योगी आदित्यनाथ सकते नहीं हैं। अगर मेयर की बात में सच्चाई है तो यूपी की कानून व्यवस्था इतनी लचर हो गई है कि अब सरकारी अधिकारी खुलेआम किसी भी व्यापारी के शोरूम पर जाते हैं और पचास हजार रुपए लूटकर ले जाते हैं और अपने जब उस अधिकारी को भीड़ सबक सिखाने जाती है तो खुद योगी सरकार की पुलिस ही उस लुटेरे अधिकारी को बचाती नजर आती है।

बीडीए अधिकारी का विरोध करते मेयर उमेश गौतम और अन्य।

अब जरा मामले के दूसरे पहलू पर नजर डालते हैं। उसी दैनिक समाचार पत्र ने मेयर के आरोपों पर बीडीए के वीसी मनिकंडन ए का पक्ष भी प्रकाशित किया है। इस रिपोर्ट में वीसी के हवाले से कहा गया है, ‘ कार्रवाई नियमानुसार की गई है। रुपए मांगने के आरोप न लगाएं, अगर हकीकत है तो साक्ष्य दिखाएं। जिस भूखंड पर शोरूम बनाया गया है वह क्लीनिक के लिए आरक्षित है। मानचित्र स्वीकृत कराए बगैर अवैध तरीके से चार भूखंड जोड़कर एक कॉमर्शियल निर्माण किया गया है। जिसे आईजीआरएस पर आई शिकायत की जांच के बाद सील किया गया है और इसके ध्वस्तीकरण के आदेश दिए गए हैं। जो कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है वो कमिश्नर या फिर हाईकोर्ट जा सकता है। बीडीए की सील तोड़कर शोरूम संचालित करना नियमों के खिलाफ है। नियमों के अनुसार कार्रवाई होती है तो फिर आरोप लगते ही हैं। अगर मुझ पर आरोप हैं तो विजिलेंस और सीबीआई जांच करा ली जाए। जो लोग आरोप लगा रहे हैं उनके बारे में भी शासन सब जानता है। मैं कुछ नहीं कहूंगा, नियमानुसार बीडीए चलाऊंगा।’


बीडीए के वीसी का यह बयान भी दर्शाता है कि भ्रष्टाचार हुआ है और मेयर उमेश गौतम उस भ्रष्टाचार का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। जब शोरूम के ध्वस्तीकरण के आदेश हो चुके हैं तो फिर मेयर और उनके समर्थक भाजपा नेता क्यों बीडीए की कार्रवाई में व्यवधान डाल रहे हैं।
बात यहीं खत्म नहीं होती। सोमवार को मेयर समर्थक भाजपा नेताओं ने आयकर विभाग को एक ज्ञापन सौंपकर उनकी संपत्ति की जांच कराने की मांग कर डाली।
वहीं, शनिवार को हुआ हंगामा पुलिस के लिए अलग से सिरदर्द बन गया है। बीडीए अधिकारी ने उनके साथ बदसलूकी करने वाले भाजपा नेताओं के खिलाफ तहरीर देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। तो वहीं, भाजपा नेताओं ने बीडीए के अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। प्रेम नगर थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर तो ले ली है लेकिन अभी तक किसी भी पक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। जबकि घटना का जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, उसमें स्पष्ट रूप से मेयर और उनके समर्थक बीडीए अधिकारी के साथ हाथापाई करते नजर आ रहे हैं।
बहरहाल, इस मामले ने योगी आदित्यनाथ के दावों की पोल खोलकर रख दी है। जिससे पार्टी की खूब फजीहत हो रही है।

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