नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर अभी चुनावी बिगुल भले ही औपचारिक रूप से न बजा हो, लेकिन राजनीतिक जमीन पर हलचल तेज होती दिखाई देने लगी है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और कायस्थ समाज के प्रमुख चेहरे माने जाने वाले संजीव सक्सेना ने अपने व्यापक प्रचार अभियान से यह संकेत दे दिया है कि वह इस बार कैंट सीट से टिकट हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके हैं। शहर के प्रमुख चौराहों, बाजारों और मोहल्लों में उनकी मौजूदगी अब केवल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि दीवारों, होर्डिंग्स, बैनरों और पोस्टरों के जरिए हर जगह दिखाई देने लगी है।
बिसलपुर चौराहा, फाइव एनक्लेव, पीलीभीत रोड, खुर्रम गोटिया, श्यामगंज, कंपनी गार्डन के सामने, मणिनाथ, सुभाष नगर, स्टेशन रोड, मालगोदाम रोड और कुंवरपुर समेत कैंट विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में संजीव सक्सेना के प्रचार सामग्री बड़े पैमाने पर लगाई गई है। राजनीतिक जानकार इसे केवल सामान्य प्रचार नहीं, बल्कि टिकट के लिए शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देख रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के भीतर कैंट विधानसभा सीट को लेकर लंबे समय से हलचल बनी हुई है। पार्टी के कई नेता यहां अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, लेकिन जिस आक्रामक अंदाज में संजीव सक्सेना ने मैदान संभाला है, उसने उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है। खास बात यह है कि वह केवल पार्टी संगठन के भरोसे नहीं बैठे हैं, बल्कि लगातार जनसंपर्क और दृश्य प्रचार के जरिए अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

संजीव सक्सेना का राजनीतिक सफर भी संघर्ष और संगठन निष्ठा से जुड़ा माना जाता है। पिछले नगर निगम चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उन्हें मेयर पद का प्रत्याशी बनाया था। उस समय पार्टी ने उनके नाम पर भरोसा जताकर यह संकेत दिया था कि संगठन में उनकी पकड़ मजबूत है। हालांकि बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और पार्टी ने निर्दलीय उम्मीदवार डॉक्टर आईएस तोमर को समर्थन देने का फैसला कर लिया। उस निर्णय के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हुई थीं और माना जा रहा था कि संजीव सक्सेना नाराज हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी के फैसले को स्वीकार किया और खुद को अनुशासित कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यही बात आज उनके पक्ष में सबसे बड़ी ताकत बनती दिखाई दे रही है। पार्टी नेतृत्व के निर्णय को स्वीकार करने और लगातार संगठन के साथ सक्रिय बने रहने से उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर पार्टी हित को रखते हैं। यही वजह है कि अब जब विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हुई हैं, तो उनका नाम गंभीर दावेदारों में गिना जा रहा है।
कैंट विधानसभा सीट सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से हमेशा महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। यहां शहरी मतदाताओं के साथ-साथ व्यापारी वर्ग और कायस्थ समाज का भी प्रभाव माना जाता है। संजीव सक्सेना खुद कायस्थ समाज से आते हैं और लंबे समय से सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में उनके समर्थक यह दावा कर रहे हैं कि वह समाजवादी पार्टी को नए सामाजिक समीकरणों के साथ मजबूत कर सकते हैं।

उनके प्रचार अभियान की एक और खास बात यह है कि इसमें केवल पारंपरिक पोस्टरबाजी नहीं दिखाई दे रही, बल्कि पूरे क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से दृश्य उपस्थिति बनाई गई है। दीवार लेखन से लेकर बड़े-बड़े होर्डिंग्स तक, हर माध्यम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि उनकी टीम चुनावी रणनीति पर काफी पहले से काम कर रही है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि समाजवादी पार्टी इस बार कैंट सीट पर ऐसे चेहरे को मैदान में उतारना चाहती है जो संगठन के साथ-साथ जमीन पर भी मजबूत पकड़ रखता हो। ऐसे में संजीव सक्सेना का लगातार सक्रिय रहना और क्षेत्र में माहौल बनाना उनकी दावेदारी को और मजबूत करता दिखाई दे रहा है।

हालांकि टिकट का अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है, लेकिन इतना जरूर है कि संजीव सक्सेना ने अपने प्रचार अभियान से यह संदेश दे दिया है कि वह इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। आने वाले दिनों में कैंट विधानसभा सीट पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है, लेकिन फिलहाल शहर की दीवारों और चौराहों पर सबसे ज्यादा चर्चा जिस चेहरे की हो रही है, वह संजीव सक्सेना ही हैं।




