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अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव के निधन से आहत हुए सपा नेता और पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंद्रसेन सागर, जताया गहरा दुख फरीदपुर में 10वीं और 12वीं के बच्चों को पुरस्कृत करने का अभियान 31 मई तक किया स्थगित

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नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी के संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के पुत्र और सपा अध्यक्ष Akhilesh Yadav के छोटे भाई प्रतीक यादव के निधन की खबर से पूरे प्रदेश के समाजवादियों में शोक की लहर दौड़ गई है। राजनीतिक और सामाजिक जगत से जुड़े लोग लगातार इस दुखद घटना पर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। इसी क्रम में बरेली जिले की फरीदपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रबल दावेदार और पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंद्रसेन सागर ने भी गहरा दुख जताया है।
चंद्रसेन सागर ने कहा कि प्रतीक यादव का निधन समाजवादी परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक क्षति है। उन्होंने कहा कि समाजवादी विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए यह व्यक्तिगत दुख जैसा है। इस दुख की घड़ी में वह पूरी तरह समाजवादी परिवार के साथ खड़े हैं।

प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए चंद्रसेन सागर ने अपने उस विशेष अभियान को भी अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है, जिसके तहत वह फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में गांव-गांव जाकर 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में सफल होने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर रहे थे। उन्होंने घोषणा की है कि यह अभियान अब आगामी 31 मई तक स्थगित रहेगा।
दरअसल, पिछले लगभग 20 दिनों से चंद्रसेन सागर लगातार फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र के गांवों में पहुंचकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन कर रहे थे। इस अभियान के अंतर्गत वह हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को पदक, प्रमाणपत्र और उपहार देकर सम्मानित कर रहे थे। ग्रामीण क्षेत्रों में इस पहल को अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा था और अभिभावकों के साथ-साथ छात्र भी इसे काफी सराह रहे थे।
बताया जा रहा है कि चंद्रसेन सागर अब तक करीब डेढ़ हजार बच्चों को सम्मानित कर चुके हैं। गांव-गांव जाकर बच्चों को मंच पर बुलाकर सम्मानित करने की उनकी इस पहल ने फरीदपुर क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश दिया। कई गांवों में पहली बार ऐसा देखने को मिला कि किसी जनप्रतिनिधि ने विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सार्वजनिक रूप से सम्मान देने के लिए अभियान चलाया हो।
चंद्रसेन सागर का कहना है कि शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम है। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को प्रोत्साहन मिलने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिलती है। यही कारण है कि उन्होंने यह संकल्प लिया था कि फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में 10वीं और 12वीं की परीक्षा में सफल होने वाले हर बच्चे तक पहुंचकर उसे सम्मानित करेंगे।
हालांकि प्रतीक यादव के निधन की खबर के बाद उन्होंने अपने सभी कार्यक्रम फिलहाल रोक दिए हैं। चंद्रसेन सागर ने कहा कि इस दुखद घटना से वह बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि यह समय उत्सव और सम्मान समारोह का नहीं, बल्कि शोक व्यक्त करने का है। इसलिए उन्होंने अपने अभियान को 31 मई तक स्थगित करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान स्थायी रूप से बंद नहीं किया गया है। 31 मई के बाद वह दोबारा पूरे उत्साह के साथ गांव-गांव जाकर बच्चों को सम्मानित करने का कार्य शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र का हर सफल विद्यार्थी सम्मानित नहीं हो जाता, तब तक उनका अभियान जारी रहेगा।
फरीदपुर क्षेत्र में चंद्रसेन सागर की इस पहल को सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ वह शिक्षा को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी विचारधारा से जुड़े परिवार के दुख में सहभागी बनकर संवेदनशील राजनीति का संदेश भी दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मौजूदा समय में राजनीति अक्सर आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित दिखाई देती है, लेकिन बच्चों को सम्मानित करने जैसे अभियान समाज में सकारात्मक माहौल तैयार करते हैं। यही वजह है कि चंद्रसेन सागर के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में ग्रामीण और अभिभावक शामिल हो रहे थे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र में चंद्रसेन सागर लगातार अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। शिक्षा, सामाजिक कार्यक्रमों और ग्रामीण संपर्क अभियान के जरिए वह क्षेत्र में मजबूत जनाधार बनाने में जुटे हुए हैं। बच्चों को सम्मानित करने का यह अभियान भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसने उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई है।
फिलहाल पूरे समाजवादी परिवार में शोक का माहौल है और चंद्रसेन सागर ने भी अपने अभियान को स्थगित कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि राजनीतिक गतिविधियों से ऊपर मानवीय संवेदनाएं होती हैं। वहीं क्षेत्र के लोग अब 31 मई के बाद दोबारा शुरू होने वाले उस अभियान का इंतजार कर रहे हैं, जिसने हजारों विद्यार्थियों के चेहरे पर मुस्कान ला दी थी।

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