नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट की दौड़ अब धीरे-धीरे दिलचस्प होती जा रही है। पार्टी के भीतर कई दावेदार अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं, लेकिन इंजीनियर अनीस अहमद खां ने हालिया शक्ति प्रदर्शन के जरिए विरोधियों के होश उड़ा दिए। उनके कार्यक्रम में जिस तरह मौजूदा पार्षदों, पूर्व पार्षदों, पार्षद पद के प्रत्याशियों, महापौर पद के प्रत्याशियों और अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं की मौजूदगी रही, उसने कैंट की सियासत में कई नए संकेत दिए हैं।

इस आयोजन की खासियत केवल यह नहीं थी कि अनीस अहमद खां के समर्थन में बड़ी संख्या में स्थानीय राजनीतिक चेहरे एकत्र हुए। इसकी सबसे अहम बात यह रही कि समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ कांग्रेस, एआईएमआईएम और आईएमसी से जुड़े स्थानीय नेताओं तथा निर्दलीय खेमे के प्रतिनिधि भी एक मंच पर नजर आए। यानी अनीस अहमद खां ने अपने कार्यक्रम के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि उनका राजनीतिक संपर्क केवल सपा के संगठनात्मक दायरे तक सीमित नहीं है।
राजनीतिक रूप से इसे कैंट विधानसभा सीट के लिए चल रही टिकट की कवायद में एक महत्वपूर्ण शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।

कैंट विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पुराना शहर के जगतपुर इलाके में स्थित राना गार्डन मैरिज हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में वार्ड स्तर के ऐसे कई चेहरे पहुंचे, जिनकी अपने-अपने इलाकों में राजनीतिक पकड़ मानी जाती है। इनमें मौजूदा पार्षदों के अलावा पूर्व पार्षद और पार्षद चुनाव लड़ चुके नेता भी शामिल थे।
कार्यक्रम में पूर्व पार्षद यामीन रजा खान, खान इम्तियाज उर्फ अबू साहब, मुशर्रफ अंसारी, मेराज अंसारी, अंजुम फिरदौस, अंजुम शमीम, नौशाद अली कइयां, मोहम्मद आरिफ बेनीपुर चौधरी और उस्मान अल्वी जैसे पूर्व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
वहीं, शहर विधानसभा क्षेत्र के अब्दुल कय्यूम खां उर्फ मुन्ना, इकबाल बिल्डर, सनी मिर्जा, नासिर मछली वाले और सैयद रेहान अली जैसे पार्षद भी कार्यक्रम में पहुंचे। पार्षद पद के प्रत्याशी रहे आफताब आलम, अकरम खान, मोहम्मद वसीम अंसारी और आजाद हुसैन की मौजूदगी ने भी आयोजन को राजनीतिक वजन दिया।

यह समीकरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव में किसी उम्मीदवार की ताकत सिर्फ उसके व्यक्तिगत समर्थकों की संख्या से तय नहीं होती। वार्ड स्तर के जनप्रतिनिधि और पूर्व जनप्रतिनिधि चुनाव के दौरान स्थानीय नेटवर्क, बूथ प्रबंधन और मतदाताओं तक पहुंच बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

महापौर प्रत्याशियों की मौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा
इंजीनियर अनीस अहमद खां के कार्यक्रम में कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी रहे केबी त्रिपाठी और नफीस अंसारी की मौजूदगी भी रही। इसके अलावा कांग्रेस के कई स्थानीय नेता भी कार्यक्रम में पहुंचे। कांग्रेस नेताओं में तबरेज आलम, शाहेगुल उर्फ लबी, इरशाद सलमानी, राजा खान, शमरान खान और फर्मीद खान शामिल रहे।
इससे कार्यक्रम का दायरा सपा के संभावित उम्मीदवार के समर्थकों की बैठक से आगे जाता दिखाई दिया। खासकर महापौर पद के प्रत्याशियों और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि अनीस अहमद खां चुनाव से पहले ही अलग-अलग राजनीतिक समूहों में व्यक्तिगत संपर्क का ऐसा नेटवर्क तैयार कर रहे हैं, जो टिकट मिलने की स्थिति में उनके लिए अतिरिक्त राजनीतिक ताकत बन सकता है?
हालांकि, इन नेताओं की व्यक्तिगत मौजूदगी को उनके दलों का आधिकारिक समर्थन नहीं माना जा सकता। फिर भी स्थानीय राजनीति में अलग-अलग दलों से जुड़े प्रभावशाली चेहरों का किसी संभावित उम्मीदवार के कार्यक्रम में एक साथ आना अपने आप में एक राजनीतिक संदेश जरूर माना जाता है। खास तौर पर तब जबकि कांग्रेस और सपा दोनों ही इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं और अखिलेश यादव यह कह भी चुके हैं कि वर्ष 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव वह कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ेंगे।
कांग्रेस के साथ एआईएमआईएम और आईएमसी के चेहरे भी
अनीस अहमद खां के शक्ति प्रदर्शन की सबसे बड़ी राजनीतिक खासियत यही रही कि इसमें कांग्रेस के अलावा एआईएमआईएम और आईएमसी से जुड़े स्थानीय नेता भी दिखाई दिए। ऐसे में मुस्लिम वोटों के बिखराव का जो डर प्रदेश स्तर पर समाजवादी पार्टी को सता रहा है वह इंजीनियर अनीस अहमद खां की उम्मीदवारी पर बरेली कैंट विधानसभा सीट पर तो काम नहीं करने वाला।
वार्ड 79 चक महमूद से एआईएमआईएम से जुड़े इरशाद ठेकेदार और वार्ड 80 रबड़ी टोला से आईएमसी से जुड़े पार्षद सैयद रेहान अली कार्यक्रम में शामिल रहे। वार्ड 78 सूफी टोला से निर्दलीय लईक खान की मौजूदगी भी रही। इसके अलावा वार्ड 75 एजाज नगर गौटिया से कांग्रेस से जुड़े सादिक अंसारी और वार्ड 40 सहसवानी टोला से कांग्रेस के पार्षद प्रत्याशी रहे आफताब आलम भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
इस तरह एक ही मंच पर अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों की मौजूदगी ने अनीस अहमद खां की राजनीतिक पहुंच को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हाे चुका है।

पहले भी लड़ चुके हैं चुनाव और 2022 में सपा से कर चुके थे तैयारी
इंजीनियर अनीस अहमद खां के लिए यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने बरेली कैंट से सपा टिकट की दावेदारी की हो। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में वह तत्कालीन कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार और वर्तमान में सपा से टिकट की दावेदारी जता रही सुप्रिया ऐरन को पछाड़ चुके हैं। उस चुनाव में इंजीनियर अनीस अहमद खां तीसरे नंबर पर रहे थे जबकि पति प्रवीण सिंह ऐरन के तत्कालीन सांसद और खुद मेयर रह चुकीं सुप्रिया ऐरन चौथे स्थान पर रही थीं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में वह समाजवादी पार्टी के टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे और उन्होंने चुनावी तैयारी काफी पहले शुरू कर दी थी।
इस बार भी उनकी रणनीति में एक दिलचस्प बात दिखाई देती है। लंबे समय तक अपेक्षाकृत शांत तरीके से क्षेत्र में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने अचानक ऐसा कार्यक्रम किया जिसमें राजनीतिक रूप से अलग-अलग स्तर के चेहरे दिखाई दिए। इसे उनके समर्थक उनकी ‘खामोश तैयारी’ के सार्वजनिक प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं। यानी अब तक जो राजनीतिक संपर्क और समीकरण क्षेत्र में तैयार किए जा रहे थे, उन्हें पहली बार एक मंच पर दिखाने की कोशिश की गई।

टिकट की दौड़ में शक्ति का संदेश
सपा के लिए बरेली कैंट सीट महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां टिकट के कई दावेदार अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में किसी दावेदार के लिए यह दिखाना महत्वपूर्ण होता है कि उसके पास पार्टी संगठन के अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक समूहों तक पहुंच भी है।
अनीस अहमद खां का कार्यक्रम इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने एक साथ पार्षद, पूर्व पार्षद, पार्षद प्रत्याशी, महापौर प्रत्याशी और विभिन्न दलों के नेताओं को जोड़कर अपने पक्ष में एक व्यापक राजनीतिक तस्वीर पेश करने की कोशिश की। यह शक्ति प्रदर्शन पार्टी नेतृत्व के लिए भी एक संदेश के तौर पर देखा जा सकता है कि टिकट के दावेदारों में अनीस अहमद खां के पास स्थानीय स्तर पर एक ऐसा नेटवर्क मौजूद है, जिसे चुनावी मैदान में इस्तेमाल किया जा सकता है।




