नीरज सिसौदिया, बरेली
बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं, कथित मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी संपत्तियों, जीएसटी से जुड़े मामलों और बैंकिंग लेनदेन में गड़बड़ी की शिकायत अब केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय तक पहुंच गई है। जिला सहकारी संघ के पूर्व चेयरमैन और वरिष्ठ भाजपा नेता महेश पांडेय की ओर से की गई शिकायत पर वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने संबंधित शिकायत को आगे की कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) तथा कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के संबंधित अधिकारी को भेजा है। दस्तावेज में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिकायत को “appropriate action” यानी उचित कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को अग्रेषित किया गया है।

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की ओर से जारी कार्यालय ज्ञापन 10 जुलाई 2026 का है। इसमें शिकायत का विषय M/s B.L. Agro Industries Limited और उसकी associated companies के खिलाफ Money Laundering, Benami asset और GST से संबंधित बताया गया है। ज्ञापन में उल्लेख है कि वित्तीय सेवा विभाग से प्राप्त शिकायत को आवश्यक कार्रवाई के लिए आगे भेजा गया है। इसके साथ प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक, आयकर विभाग के कमिश्नर (कोऑर्डिनेशन एंड सिस्टम्स), CBIC के कमिश्नर और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के पीजी सेल के अंडर सेक्रेटरी को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायतकर्ता महेश पांडेय ने केवल सामान्य वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत नहीं की है, बल्कि उन्होंने कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग सुविधाओं, स्टॉक, देनदारियों, टर्नओवर, संबंधित कंपनियों के बीच लेनदेन और कथित संपत्ति खरीद तक की विस्तृत जांच की मांग की है। शिकायत में वित्तीय दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच और ऑडिट कराने की मांग भी की गई है।
शिकायत में कहा गया है कि बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके ग्रुप या सहयोगी संस्थानों के वित्तीय लेनदेन और खातों की विस्तृत जांच की जरूरत है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी की ओर से बैंकिंग सुविधाएं प्राप्त करने के लिए स्टॉक, रिसीवेबल्स यानी देनदारियों और वित्तीय स्थिति से संबंधित आंकड़ों को वास्तविक औद्योगिक क्षमता की तुलना में अधिक दिखाया गया हो सकता है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि कंपनी के कथित स्टॉक, कर्ज और टर्नओवर की स्थिति उसकी वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, कच्चे माल के इस्तेमाल, बिजली एवं ईंधन की खपत तथा औद्योगिक ढांचे से मेल नहीं खाती।
शिकायत में खातों में कथित हेरफेर का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि अनियमित जर्नल एंट्री, पर्याप्त आधार के बिना अकाउंटिंग एडजस्टमेंट, पिछली तारीख से एंट्री और लेनदेन के वर्गीकरण में कथित बदलाव के माध्यम से बिक्री और लाभ को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की आशंका है। शिकायतकर्ता ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन की मांग की है।
महेश पांडेय की शिकायत में कथित फर्जी या गैर-वास्तविक बिक्री और खरीद लेनदेन का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार ऐसे लेनदेन का इस्तेमाल कथित तौर पर टर्नओवर, स्टॉक वैल्यू और रिसीवेबल्स को बढ़ा हुआ दिखाने के लिए किया गया हो सकता है। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की फोरेंसिक जांच की मांग करते हुए कहा है कि वित्तीय रिकॉर्ड और कंपनी के वास्तविक संचालन के बीच संभावित अंतर की जांच आवश्यक है।
शिकायत में कंपनियों और उनसे जुड़े पक्षों के बीच धन के कथित आवागमन को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। इसमें “routing and layering” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए आरोप लगाया गया है कि विभिन्न ग्रुप कंपनियों, संबंधित संस्थाओं और जुड़े लोगों के बीच लेनदेन के माध्यम से धन के वास्तविक उपयोग और स्रोत को छिपाने की कोशिश हुई हो सकती है। शिकायतकर्ता ने इसे संभावित accommodation entries, circular transactions और बैंकिंग फंड के अप्रत्यक्ष डायवर्जन की आशंका से जोड़ते हुए विस्तृत जांच की मांग की है।
एक अन्य गंभीर आरोप कथित तौर पर बेहिसाब धन के इस्तेमाल से चल-अचल संपत्तियां बनाने से जुड़ा है। शिकायत में आशंका जताई गई है कि कंपनी से जुड़े प्रमोटरों, संबंधित संस्थाओं या अन्य जुड़े लोगों के नाम पर कुछ संपत्तियों की खरीद या निर्माण में कथित तौर पर डायवर्ट किए गए वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल हुआ हो सकता है। शिकायतकर्ता ने ऐसी संपत्तियों के वास्तविक लाभार्थी, निवेश के स्रोत और स्वामित्व दस्तावेजों की जांच की मांग की है। इसी संदर्भ में Prohibition of Benami Property Transactions Act के प्रावधानों की संभावित applicability की जांच का भी अनुरोध किया गया है।
शिकायत में बैंकिंग सुविधाओं से जुड़े पहलू पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि बैंकिंग संस्थानों के समक्ष प्रस्तुत स्टॉक स्टेटमेंट, देनदारियों और अन्य वित्तीय आंकड़ों में कथित अनियमितता की वजह से कंपनी को वास्तविक वित्तीय स्थिति से अधिक बैंकिंग एक्सपोजर या ड्रॉइंग पावर उपलब्ध हुई हो सकती है। शिकायतकर्ता ने बैंक रिकॉर्ड, स्टॉक स्टेटमेंट और कंपनी के वास्तविक कारोबार के बीच मिलान कराने की मांग की है।
शिकायत में इन्वेंट्री, सनदरी देनदारियों, संबंधित पक्षों के बैलेंस, राजस्व पहचान, इन्वेंट्री टर्नओवर और वर्किंग कैपिटल साइकिल जैसे बिंदुओं को भी संदिग्ध बताया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार इन सभी बिंदुओं का स्वतंत्र वित्तीय परीक्षण यह स्पष्ट कर सकता है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति और बैंकिंग संस्थानों के सामने प्रस्तुत आंकड़ों में कोई महत्वपूर्ण अंतर था या नहीं।
वित्त मंत्रालय के 10 जुलाई के कार्यालय ज्ञापन के बाद अब शिकायत कई केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंच गई है। दस्तावेज में जिन अधिकारियों को शिकायत भेजी गई है, उनमें प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक, आयकर विभाग के कमिश्नर (Coordination & Systems), CBIC के कमिश्नर (CX-9) और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के पीजी सेल के अंडर सेक्रेटरी शामिल हैं। इसका अर्थ यह है कि शिकायत को संबंधित विभागों के संज्ञान में लाकर मामले में उनके स्तर से उचित कार्रवाई के लिए भेजा गया है। हालांकि, उपलब्ध दस्तावेज में किसी एजेंसी द्वारा आरोपों को सही पाए जाने या कंपनी के खिलाफ जांच के निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।
ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों और सरकारी स्तर पर उसके अग्रेषण को जांच के निष्कर्ष के रूप में देखना उचित नहीं होगा। दस्तावेज फिलहाल यह दिखाता है कि महेश पांडेय की शिकायत वित्त मंत्रालय तक पहुंची और राजस्व विभाग ने उसे संबंधित केंद्रीय विभागों और एजेंसियों को आगे की कार्रवाई के लिए भेजा है। अब यह संबंधित जांच एजेंसियों पर निर्भर करेगा कि वे शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों की प्राथमिक जांच के बाद आगे कोई कार्रवाई करती हैं या नहीं।
महेश पांडेय ने शिकायत में बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड तथा उससे जुड़े समूह की कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन, स्टॉक, खरीद-बिक्री, संपत्तियों और संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन की विस्तृत जांच की मांग की है। शिकायत में फोरेंसिक ऑडिट के जरिए वास्तविक वित्तीय स्थिति सामने लाने की मांग की गई है।
अब निगाह इस बात पर है कि केंद्र की संबंधित एजेंसियां शिकायत में उठाए गए बिंदुओं पर क्या कार्रवाई करती हैं। खास तौर पर बैंकिंग रिकॉर्ड, स्टॉक और टर्नओवर के आंकड़े, संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन, कथित संपत्ति निवेश और टैक्स व जीएसटी रिकॉर्ड की जांच होने पर शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। फिलहाल उपलब्ध सरकारी पत्र में किसी आरोप की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन शिकायत को प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग, CBIC और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय तक भेजे जाने से मामला संबंधित केंद्रीय एजेंसियों के संज्ञान में जरूर पहुंच गया है।




