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अखिलेश यादव की जुबां पर उम्मीदवार के तौर पर फिर आया इंजीनियर अनीस अहमद का नाम, इस बार कहा- बरेली कैंट से तो इंजीनियर अनीस अहमद तैयारी कर रहे हैं, पढ़ें क्या-क्या हुआ लखनऊ में और कौन बना गवाह?

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नीरज सिसौदिया, बरेली

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की जुबां पर बरेली कैंट विधानसभा सीट के संदर्भ में एक बार फिर इंजीनियर अनीस अहमद खां** का नाम आना सियासी तौर पर अहम माना जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव में बरेली कैंट से सपा के टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे अनीस अहमद खां** को लेकर पार्टी नेतृत्व की सक्रिय दिलचस्पी की चर्चा अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। हाल में लखनऊ में हुई बरेली और बिजनौर के नेताओं के साथ अखिलेश यादव की एक मुलाकात के दौरान जब बरेली कैंट सीट का जिक्र आया तो अखिलेश यादव ने खुद कहा कि “बरेली कैंट से तो इंजीनियर अनीस अहमद भी तैयारी कर रहे हैं। वो क्षेत्र में काम कर रहे हैं या नहीं?” मौजूद लोगों ने बताया कि अनीस अहमद क्षेत्र में पूरी तत्परता के साथ काम कर रहे हैं। इस बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने सीट के हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या को लेकर भी जानकारी ली। राजनीतिक रूप से इस घटनाक्रम को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व की नजर इस सीट की जमीनी तैयारियों और अनीस अहमद की सक्रियता पर बनी हुई है। अखिलेश यादव के ये शब्द यह दर्शाते हैं कि बरेली कैंट विधानसभा सीट के टिकट के सभी दावेदारों में उनकी नजरों में सबसे बड़ा कद इंजीनियर अनीस अहमद खां** का ही है। अखिलेश यादव अपने पुराने वादे को अभी भूले नहीं हैं।

अनीस अहमद खां की मौजूदा दावेदारी की कहानी सिर्फ हाल की इस बातचीत से शुरू नहीं होती। इसके पीछे करीब डेढ़ दशक की राजनीतिक सक्रियता, संगठन के प्रति लगातार काम और 2024 के लोकसभा चुनाव में निभाई गई भूमिका को अहम आधार माना जा रहा है। सपा अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष अनीस अहमद ने वर्ष 2012 में पहली बार बरेली कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र में संपर्क बनाए रखा और पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय रहे।

अनीस अहमद खां के राजनीतिक सफर में वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। रामपुर संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मोहिबुल्लाह नदवी की जीत में उनकी भूमिका को पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण बताया जाता है। चुनाव के दौरान संगठनात्मक स्तर पर उनकी सक्रियता और जमीनी संपर्क ने पार्टी नेतृत्व का ध्यान खींचा।
लोकसभा चुनाव के बाद अखिलेश यादव ने उन संसदीय सीटों की समीक्षा बैठकें की थीं, जहां सपा उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था। बरेली लोकसभा सीट की समीक्षा के लिए हुई बैठक में जिले के प्रमुख पार्टी पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ अनीस अहमद खां भी मौजूद थे।
इसी बैठक से जुड़ा एक घटनाक्रम अब उनकी दावेदारी की चर्चा में सबसे महत्वपूर्ण संदर्भ बन गया है। बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने बरेली कैंट सीट से अनीस अहमद खां को आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने के समर्थन को लेकर मौजूद नेताओं से पूछा था। इसके जवाब में मौजूद दो-चार लोगों को छोड़कर अधिकांश नेताओं ने उनके समर्थन में हाथ खड़े किए।
इसके बाद अखिलेश यादव की ओर से यह कहे जाने की बात सामने आई कि “ठीक है, इंजीनियर अनीस अहमद को ही बरेली कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया जाएगा।” हालांकि यह बातचीत पार्टी की आंतरिक बैठक का हिस्सा थी और इसे आधिकारिक टिकट घोषणा नहीं माना जा सकता, लेकिन अनीस अहमद के समर्थक इसे उनकी दावेदारी के पक्ष में सबसे मजबूत संकेतों में गिनते हैं।
राजनीतिक रूप से हाल की घटना को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि 2024 की समीक्षा बैठक के बाद काफी समय गुजर चुका है, लेकिन अखिलेश यादव के सामने बरेली कैंट का जिक्र आते ही अनीस अहमद का नाम आना यह संकेत देता है कि पार्टी अध्यक्ष के स्तर पर उनकी दावेदारी को भुलाया नहीं गया है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल में पूर्व मंत्री कमाल अख्तर और बिजनौर के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल लखनऊ में अखिलेश यादव से मिलने पहुंचा था। इसी दौरान बरेली के कुछ नेता और दिल्ली में आंदोलन के चलते नौकरी गंवाने वाले बरेली के मोहित भारद्वाज भी उनसे मिले। बातचीत के दौरान जब बरेली कैंट विधानसभा सीट का मुद्दा आया तो अखिलेश यादव ने बिना किसी भूमिका के अनीस अहमद का नाम लेते हुए उनकी सक्रियता के बारे में पूछा।
यह सवाल अपने आप में इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि किसी विधानसभा सीट पर संभावित प्रत्याशी के क्षेत्र में काम करने या न करने को लेकर पार्टी अध्यक्ष का सवाल यह बताता है कि नेतृत्व उस दावेदार की जमीनी स्थिति को लेकर जानकारी रख रहा है। इसके बाद हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या के बारे में जानकारी लेना भी सीट के चुनावी गणित को समझने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

अनीस अहमद की तैयारी केवल टिकट पर निर्भर नहीं

अनीस अहमद खां की रणनीति का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू उनकी लगातार जमीनी सक्रियता है। उन्होंने टिकट की घोषणा का इंतजार किए बिना क्षेत्र में अपनी गतिविधियां जारी रखी हैं। वोट बनवाने से लेकर एसआईआर फॉर्म भरवाने, जनसंपर्क, चाय पर चर्चा और छोटे-छोटे गेट-टुगेदर तक उनकी गतिविधियों का फोकस स्थानीय स्तर पर संपर्क बढ़ाने पर है।
उनकी कोशिश केवल बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों तक सीमित रहने के बजाय मोहल्लों, स्थानीय समूहों और आम मतदाताओं तक पहुंच बनाने की बताई जाती है। यह रणनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बरेली कैंट जैसी सीट पर चुनावी मुकाबला केवल पार्टी के पारंपरिक वोटों के भरोसे नहीं जीता जा सकता। यहां उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, विभिन्न सामाजिक समूहों में स्वीकार्यता और बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
अनीस अहमद खां इसी वजह से लंबे समय से अपना व्यक्तिगत संपर्क नेटवर्क मजबूत करने में जुटे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उनकी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को और व्यवस्थित किए जाने की बात सामने आती रही है।

2012 से लेकर 2027 तक का सफर

अनीस अहमद के लिए बरेली कैंट कोई अचानक चुनी गई राजनीतिक सीट नहीं है। वर्ष 2012 में पहली बार चुनाव लड़ने के बाद से ही वह इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करते रहे हैं। उस चुनाव में वह तत्कालीन मेयर सुप्रिया ऐरन को पछाड़ कर आईएमसी के समर्थन से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार लड़ने के बावजूद लगभग 25 हजार वाेट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने टिकट की उम्मीद में पूरी तैयारी की थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया।
टिकट न मिलने के बावजूद पार्टी के प्रति उनकी सक्रियता जारी रही। यही निरंतरता उनके समर्थकों के अनुसार उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी है। उनका तर्क है कि उन्होंने टिकट मिलने पर ही सक्रिय होने के बजाय टिकट न मिलने के बाद भी संगठन के लिए काम किया। 2024 में रामपुर लोकसभा चुनाव में उनकी भूमिका ने इस दावे को पार्टी नेतृत्व के सामने और मजबूत किया।

सियासी संदेश और सीमाएं

अगर अखिलेश यादव के हालिया सवाल और 2024 की समीक्षा बैठक में हुई बातचीत को साथ रखकर देखा जाए तो अनीस अहमद खां की दावेदारी को सपा नेतृत्व के स्तर पर गंभीरता से लिए जाने के संकेत मिलते हैं। खासकर यह तथ्य कि अखिलेश यादव ने हाल की बातचीत में खुद उनका नाम लिया, उनके समर्थकों के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश है।
हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी है। अभी बरेली कैंट विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। लिहाजा अनीस अहमद को निश्चित प्रत्याशी कहना जल्दबाजी होगी। पार्टी के भीतर अन्य दावेदार भी हैं और चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

फिलहाल तस्वीर यह है कि अनीस अहमद खां ने संगठनात्मक सक्रियता, लंबे समय की क्षेत्रीय मौजूदगी और 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी भूमिका के आधार पर अपनी दावेदारी मजबूत की है। वहीं अखिलेश यादव के बरेली कैंट के संदर्भ में बार-बार उनका नाम लेना इस दावेदारी को राजनीतिक वजन देता है। यानी बरेली कैंट की सपा राजनीति में सवाल अब यह नहीं रह गया है कि अनीस अहमद खां तैयारी कर रहे हैं या नहीं- सवाल यह है कि पार्टी नेतृत्व उनकी वर्षों की तैयारी और मौजूदा राजनीतिक सक्रियता को 2027 में आधिकारिक टिकट में बदलता है या नहीं। बहरहाल, अखिलेश यादव के ये शब्द यह दर्शाते हैं कि बरेली कैंट विधानसभा सीट के टिकट के सभी दावेदारों में उनकी नजरों में सबसे बड़ा कद इंजीनियर अनीस अहमद खां का ही है। अखिलेश यादव अपने पुराने वादे को अभी भूले नहीं हैं।

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