नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली शहर इन दिनों चौपला इलाके में भीषण ट्रैफिक संकट से जूझ रहा है। फ्लाईओवर को 45 दिनों के लिए बंद किए जाने के बाद सुभाष नगर, मढ़ीनाथ, नेकपुर और बदायूं रोड जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सुबह से लेकर देर रात तक लगने वाले जाम ने आम जनता, स्कूली बच्चों, मरीजों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसी गंभीर समस्या को लेकर चौपला-बदायूं रोड रेल अंडरपास संघर्ष समिति के संयोजक और पार्षद राजेश अग्रवाल ने मोर्चा संभालते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रशासन के सामने जनता की आवाज बुलंद की।
15 मई को राजेश अग्रवाल अपने समर्थकों और संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ जिलाधिकारी अविनाश सिंह से मिले और शहर की दो बड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। पहली समस्या चौपला फ्लाईओवर की मरम्मत के चलते उत्पन्न हुए ट्रैफिक संकट की थी, जबकि दूसरी समस्या लंबे समय से लंबित चौपला फ्लाईओवर के नीचे रेल अंडरपास निर्माण की मांग से जुड़ी थी।
राजेश अग्रवाल ने जिस तरह प्रशासन के सामने तथ्यों और तर्कों के साथ स्थानीय लोगों की परेशानियों को रखा, उसके बाद जिलाधिकारी को तुरंत अधिकारियों की बैठक बुलानी पड़ी। इतना ही नहीं, जिलाधिकारी ने राजेश अग्रवाल के सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए। इससे यह साफ हो गया कि शहर के इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर अब प्रशासन भी सक्रिय मोड में आ चुका है।
जिलाधिकारी से मुलाकात के दौरान राजेश अग्रवाल ने सबसे पहले चौपला फ्लाईओवर की मरम्मत व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर को पूरी तरह बंद कर देने से लाखों लोग रोजाना घंटों जाम में फंस रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े कार्य में केवल चार मजदूर लगाए गए हैं, जबकि ट्रैफिक संभालने के लिए लगभग 30 पुलिसकर्मी अलग-अलग स्थानों पर तैनात हैं।
राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह स्थिति बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर काम की गति इतनी धीमी रहेगी तो लोगों को आने वाले डेढ़ महीने तक भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से पूछा कि जब बड़े शहरों में पुलों और फ्लाईओवर की मरम्मत रात में कराई जा सकती है, तो बरेली में ऐसा क्यों नहीं हो सकता।
उन्होंने सुझाव दिया कि दिन के समय ट्रैफिक को फ्लाईओवर पर चालू रखा जाए और रात में मरम्मत का कार्य कराया जाए। इससे स्कूली बच्चों, मरीजों, व्यापारियों और रोजमर्रा के यात्रियों को राहत मिल सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि मरम्मत करने वाली टीम का सामान फुटपाथ पर व्यवस्थित ढंग से रखा जाए ताकि यातायात बाधित न हो।
राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर रात में काम कराना संभव नहीं है, तो कम से कम मजदूरों की संख्या कई गुना बढ़ाई जाए और दिन-रात दो शिफ्ट में काम कराकर मरम्मत जल्द पूरी कराई जाए। राजेश अग्रवाल की बातों का असर बैठक में तुरंत दिखाई दिया। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल एडीएम सिटी, एसपी ट्रैफिक और कार्यदायी संस्था के अधिकारियों की उसी शाम बैठक बुलाने के निर्देश दे दिए।
यह घटनाक्रम इस बात को दर्शाता है कि राजेश अग्रवाल केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने जनता की वास्तविक समस्या को प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी तरीके से उठाया। यही कारण रहा कि जिलाधिकारी को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि पिछले कई दिनों से लोग जाम की समस्या से परेशान थे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर जिस गंभीरता की जरूरत थी, वह दिखाई नहीं दे रही थी। राजेश अग्रवाल द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद पूरे मामले ने गति पकड़ी।
फ्लाईओवर मरम्मत के मुद्दे के बाद राजेश अग्रवाल ने चौपला फ्लाईओवर के नीचे रेल अंडरपास निर्माण की पुरानी मांग को भी जिलाधिकारी के सामने मजबूती से रखा।
उन्होंने कहा कि चौपला क्षेत्र में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए अंडरपास अब समय की जरूरत बन चुका है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लाल फाटक फ्लाईओवर बीच में केवल लगभग 15 फीट चौड़ा है, इसके बावजूद वहां से ट्रैफिक संचालित हो रहा है। इसी तर्ज पर चौपला फ्लाईओवर के नीचे भी रेल अंडरपास बनाया जा सकता है।
राजेश अग्रवाल ने बताया कि इस संबंध में संघर्ष समिति पहले ही डीआरएम मुरादाबाद, बरेली के अधिकारियों और मंडलायुक्त से मुलाकात कर चुकी है। अब जिलाधिकारी को भी पूरे मामले से अवगत कराया गया है ताकि प्रशासनिक स्तर पर प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा सके।

उन्होंने कहा कि अगर यहां अंडरपास बन जाता है तो सुभाष नगर, मढ़ीनाथ, बदायूं रोड और आसपास के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही शहर का ट्रैफिक दबाव भी काफी हद तक कम हो सकेगा।
राजेश अग्रवाल द्वारा अंडरपास का प्रस्ताव रखे जाने के बाद जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रस्ताव को “बहुत अच्छा” बताते हुए संबंधित अधिकारियों को इसे आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की प्रतिक्रिया से संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित यह मांग अब आगे बढ़ सकती है।
दरअसल, चौपला क्षेत्र शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक माना जाता है। यहां रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। फ्लाईओवर बंद होने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। ऐसे में अंडरपास की मांग को अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि शहर के ट्रैफिक समाधान के बड़े विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है।
राजेश अग्रवाल द्वारा मुद्दा उठाए जाने के तुरंत बाद जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की। इस बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संतोष कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी नगर सौरभ दुबे, पुलिस अधीक्षक यातायात मोहम्मद अकमल खान और एनएचआई के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि फ्लाईओवर मरम्मत के कारण आम लोगों को भारी असुविधा हो रही है। उन्होंने कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए और यह सुनिश्चित करने को कहा कि मरम्मत कार्य तय समय के भीतर पूरा हो।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था को मजदूरों की संख्या बढ़ाने और दिन-रात दो शिफ्ट में काम कराने के निर्देश दिए। यह वही मांग थी जिसे राजेश अग्रवाल ने जिलाधिकारी के सामने प्रमुखता से रखा था। यानी राजेश अग्रवाल द्वारा उठाए गए मुद्दों का असर सीधे प्रशासनिक फैसलों में दिखाई दिया।
राजेश अग्रवाल की सक्रियता के बाद स्थानीय लोगों में यह भावना मजबूत हुई है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से उठाने वाला नेतृत्व मौजूद है।
सुभाष नगर और बदायूं रोड के व्यापारियों का कहना है कि फ्लाईओवर बंद होने के कारण उनका कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ग्राहक जाम के कारण बाजार आने से बच रहे हैं। वहीं स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को रोजाना घंटों अतिरिक्त समय सड़क पर बिताना पड़ रहा है।
ऐसे माहौल में राजेश अग्रवाल द्वारा प्रशासन के सामने मजबूती से पक्ष रखने को लोग सकारात्मक रूप में देख रहे हैं।
दरअसल, चौपला और बदायूं रोड क्षेत्र लंबे समय से ट्रैफिक दबाव झेल रहे हैं। शहर का विस्तार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसी अनुपात में ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित नहीं हो पाया। फ्लाईओवर बनने के बाद कुछ समय तक राहत जरूर मिली थी, लेकिन अब बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण स्थिति फिर गंभीर होती जा रही है। ऐसे में मरम्मत कार्य ने समस्या को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

इसके लिए अंडरपास, वैकल्पिक मार्ग और बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन जैसी दीर्घकालिक योजनाओं की जरूरत है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस बात की चर्चा है कि राजेश अग्रवाल केवल विरोध की राजनीति नहीं कर रहे, बल्कि समाधान भी सुझा रहे हैं।
उन्होंने न सिर्फ समस्या बताई, बल्कि उसका व्यावहारिक समाधान भी प्रशासन के सामने रखा। चाहे रात में मरम्मत कार्य कराने का सुझाव हो, मजदूरों की संख्या बढ़ाने की मांग हो या अंडरपास निर्माण का प्रस्ताव— हर मुद्दे पर उन्होंने ठोस विकल्प प्रस्तुत किए। यही वजह है कि प्रशासन ने भी उनकी बातों को गंभीरता से लिया। जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में संजीव चौहान, किशन लाल, राजीव मिश्रा, नीलम, राम प्रकाश, रामस्वरूप, सचिन, आरके श्रीवास्तव, कैलाश शर्मा और इसरार सहित कई लोग मौजूद रहे।
इन सभी ने एक स्वर में कहा कि चौपला क्षेत्र की समस्याओं का जल्द समाधान जरूरी है। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए और मरम्मत कार्य में तेजी लाई जाए। चौपला फ्लाईओवर और अंडरपास का मुद्दा अब धीरे-धीरे शहर का बड़ा जन मुद्दा बनता जा रहा है। अगर आने वाले दिनों में जाम की समस्या कम नहीं हुई तो स्थानीय स्तर पर आंदोलन और तेज हो सकता है। हालांकि फिलहाल लोगों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद स्थिति में सुधार आएगा। मजदूरों की संख्या बढ़ने और दो शिफ्ट में काम शुरू होने से मरम्मत कार्य में तेजी आ सकती है। वहीं अंडरपास प्रस्ताव को लेकर भी अब लोगों की निगाह प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।
राजेश अग्रवाल की इस सक्रियता की चर्चा अब राजनीतिक गलियारों में भी होने लगी है। स्थानीय स्तर पर यह माना जा रहा है कि उन्होंने एक ऐसे मुद्दे को उठाया है, जिससे सीधे लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। यही कारण है कि उनकी पहल को केवल एक पार्षद की सामान्य कार्रवाई नहीं, बल्कि जनहित के बड़े हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

फिलहाल सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि प्रशासनिक स्तर पर लिए गए फैसलों का असर जल्द जमीन पर दिखाई दे और शहरवासियों को जाम की समस्या से राहत मिल सके। वहीं चौपला रेल अंडरपास का सपना भी अब पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत होता दिखाई दे रहा है।




