नीरज सिसौदिया, बरेली
125 बरेली कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट के दावेदारों के गतिविधियां बढ़ने के बाद उन भाजपा नेताओं ने भी खामोशी से चुनावी तैयारी शुरू कर दी है जो इस सीट से टिकट की दावेदारी पेश करना चाहते हैं। इनमें कुछ नेता तो पहले से ही सक्रिय हैं लेकिन कुछ नेताओं ने हाल ही में अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं।
कैंट सीट से सबसे ज्यादा चर्चा में जो नाम है वह है बरेली नगर निगम के महापौर डॉ. उमेश गौतम का। उमेश गौतम पिछले चुनाव में भी दमदारी से अपनी दावेदारी जता चुके हैं लेकिन तब संजीव अग्रवाल बाजी मार ले गए थे और उन्हें एक बार फिर मेयर की ही कुर्सी से संतोष करना पड़ा। पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में उमेश गौतम अब राजनीतिक तौर पर कहीं अधिक मजबूत हो चुके हैं। अपने करीबी को महानगर अध्यक्ष पद की कुर्सी पर दोबारा बिठाने में कामयाब होने के बाद उमेश गौतम का सितारा बुलंदियों पर है। ऐसे में अगर पार्टी संजीव अग्रवाल का टिकट काटती है और किसी गैर वैश्य को मैदान में उतारती है तो उमेश गौतम इस सीट से लड़ने वाले पहले गैर वैश्य नेता हो सकते हैं।

दूसरे नंबर पर पूर्व मंत्री और कैंट विधानसभा सीट से पूर्व विधायक राजेश अग्रवाल के सुपुत्र मनीष अग्रवाल का नाम आता है। पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का सपना मनीष अग्रवाल पिछले विधानसभा चुनाव से ही देख रहे हैं। पिछले चुनावों की तुलना में मनीष अग्रवाल इस बार अधिक मजबूत स्थिति में नजर आते हैं। वैश्य समाज से होने के कारण कैंट विधानसभा सीट से मनीष अग्रवाल की दावेदारी अधिक मजबूत नजर आती है। बताया जाता है कि बेटे को अपनी विरासत सौंपने के लिए राजेश अग्रवाल ने अब जमीनी स्तर पर भी काम शुरू कर दिया है। बताया जाता है कि कुछ समय पहले राजेश अग्रवाल ने बरेली में अपने जन्मदिन के अवसर पर एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसमें बड़ी संख्या में भाजपा नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए थे। बताया जाता है कि कई वर्षों बाद राजेश अग्रवाल ने अपने जन्मदिन पर ऐसा आयोजन किया है। आमतौर पर वह ऐसा नहीं करते हैं। मनीष अग्रवाल भी जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं।

अगला नाम एक और वैश्य नेता राजेंद्र गुप्ता का है। राजेंद्र गुप्ता पिछले चुनावों में भी दावेदारी जता चुके हैं। राजेंद्र गुप्ता ने अभी तक खुलकर यह ऐलान नहीं किया है कि वह कैंट सीट से दावेदारी जतएंगे अथवा नहीं लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि वह पूरी मजबूती के साथ इस सीट से दावेदारी जताएंगे और इसके लिए उन्होंने लामबंदी भी शुरू कर दी है।

एक और वैश्य नेता हर्षवर्धन आर्य हैं। हर्षवर्धन भी पिछले चुनावों में टिकट के दावेदार थे। इस बार भी वह दावेदारों की कतार में शामिल हैं। बताया जाता है कि हर्षवर्धन अब मेयर उमेश गौतम के खेमे से जुड़ चुके हैं और अधीर सक्सेना को महानगर अध्यक्ष बनाने के पक्ष में वह भी थे। कहा यह भी जा रहा है कि अगर पार्टी ब्राह्मण चेहरे पर सहमत नहीं होती है तो उमेश गौतम के समर्थक हर्षवर्धन के नाम का प्रस्ताव भी कर सकते हैं।

पूर्व महापौर स्वर्गीय राजकुमार अग्रवाल के सुपुत्र रवि अग्रवाल का नाम भी इस कड़ी में जुड़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि, रवि अग्रवाल भी खुलकर सामने नहीं आए हैं लेकिन उनके समर्थन उन्हें कैंट विधानसभा सीट से दावेदार बता रहे हैं।
सबसे हैरान करने वाला नाम बिथरी के पूर्व विधायक राजेश कुमार मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल का है। सूत्र बताते हैं कि पप्पू भरतौल की नजर बिथरी के साथ ही कैंट विधानसभा सीट पर भी है। पिछले कुछ समय से उन्होंने कैंट सीट पर अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। वह लोगों के घरों में जाकर चाय पर चर्चा कर रहे हैं। साथ ही उनकी खुशी और गमी में भी शामिल हो रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एक भागवत कथा का भी भव्य आयोजन कराया था जिसमें स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज शामिल हुए थे। पप्पू भरतौल की गतिविधियों में संजीव अग्रवाल के एक करीबी नेता की बड़ी भूमिका बताई जाती है। इस नेता को लोग ‘गोला’ कहकर पुकारते हैं। बताया जाता है कि ‘गोला’ अब संजीव अग्रवाल को डूबता हुआ जहाज मानने लगा है और नया ठिकाना तलाश रहा है।

बहरहाल, समाजवादी पार्टी में जिस तरह से डॉक्टर अनीस बेग, पूर्व प्रत्याशी और पार्षद राजेश अग्रवाल और इंजीनियर अनीस अहमद खां सक्रियता दिखा रहे हैं, उस तरह से भाजपा में अभी उमेश गौतम और मनीष अग्रवाल को छोड़कर कोई भी नेता खुलकर सामने नहीं आया है। संभावना जताई जा रही है कि नए साल से ये नेता खुलकर सामने आ जाएंगे।





