नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली नगर निगम के मेयर डॉक्टर उमेश गौतम एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार मामला जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का अपमान करने वाले ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष बहराइच में जन्मे और बरेली में दरगाह आला हजरत से लगभग एक दशक पहले निकाले गए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी से जुड़ा है। मेयर उमेश गौतम ने गुरुवार को जगद्गुरु रामभद्राचार्य का अपमान करने वाले मौलाना शहाबुद्दीन रजवी की पुस्तक तारीख ए इस्लाम का विमोचन किया। इस विमोचन समारोह में मेयर ने मुस्लिम समाज से भेदभाव न करने का संदेश दिया। साथ ही यह भी कहा कि हर मुस्लिम को आतंकवादी कहना गलत है। उन्होंने मिलजुल कर रहने और तारीख-ए-इस्लाम पुस्तक काे जरूर पढ़ने की अपील भी की।
दो दिन पहले ही मौलाना शहाबुद्दीन ने स्वामी रामभद्राचार्य का अपमान करते हुए कहा था कि भारत कभी भी हिन्दू राष्ट्र नहीं बन सकता है।
मौलाना ने कहा था कि रामभद्राचार्य कह रहे हैं कि भारत में जिस दिन 80 फीसद हिंदू आबादी हो जाएगी उस दिन भारत भगवा-ए-हिंद घोषित कर दिया जाएगा। उनको ये जानकारी नहीं है कि भारत सरकार के रिकॉर्ड के मुताबिक 19 फीसद मुस्लिम आबादी है और 81 फीसद गैर मुस्लिम आबादी है। उन्होंने भगवा-ए-हिंद का नारा गज़वा-ए-हिंद के मुकाबले में दिया है। शहाबुद्दीन रज़वी ने आगे कहा कि रामभद्राचार्य और धीरेंद्र शास्त्री ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे गजवा-ए-हिंद का नारा लगाने वाले कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोगों को बल मिल रहा है। इन दोनों के नारों में और कट्टरपंथियों के नारे में क्या फर्क रह जाएगा। इस तरह की बातों से देश की छवि धूमिल होती है। कट्टरपंथियों के हौसले बुलंद होते हैं। भारत कभी भी हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता है।
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जगद्गुरु रामभद्राचार्य के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेते हैं और दूसरी तरफ मेयर उमेश गौतम उस मौलाना शहाबुद्दीन की पुस्तक का प्रचार करते हैं जो रामभद्राचार्य के बयानों को देश की छवि को धूमिल करने वाला बयान करार दे रहे हैं। ऐसे मौलाना के साथ मंच साझा कर उमेश गौतम क्या संदेश देना चाहते हैं? वह मौलाना की किताब का प्रचार क्यों कर रहे हैं? ऐसी कौन सी राजनीतिक मजबूरी रही कि उमेश गौतम को स्वामी रामभद्राचार्य जैसे संत का अपमान करने वाले वाले मौलाना से हाथ मिलाना पड़ा है? ऐसे कई सवाल हैं जिन्हें लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। साथ ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उमेश गौतम समाजवादी पार्टी से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं जिसके चलते वो मुसलमानों को रिझाने का प्रयास कर रहे हैं।






