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‘रील वाले’ नहीं, ‘रियल वाले’ : जन मुद्दों पर जन आंदोलन वाले नेता हैं राजेश अग्रवाल, तीन दशक से जनता के कर रहे काम, अगर सपा के लिए ये नहीं जीत सकते कैंट तो तीन महीने वाले पोस्टर ब्वॉय कैसे जीत सकेंगे? भाजपाई भी चाहते हैं राजेश अग्रवाल को न मिले सपा का टिकट, जानिये क्या है वजह?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
समाजवादी पार्टी के बरेली शहर विधानसभा सीट से पूर्व प्रत्याशी और वरिष्ठ पार्षद राजेश अग्रवाल का नाम महानगर की सियासत में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। जनहित के कार्यों की ब्रांडिंग से कोसों दूर रहने वाले राजेश अग्रवाल ‘रील वाले’ नहीं बल्कि ‘रियल वाले’ नेता हैं। वह जन मुद्दों पर जन आंदोलन की शुरुआत करके उसे अंजाम तक पहुंचाने वाले नेता हैं। इन दिनों वह बरेली कैंट विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट की दावेदारी को लेकर चर्चा में हैं। कैंट विधानसभा सीट से वह एकमात्र दावेदार हैं जो जनता के मुद्दों को लेकर सड़कों पर व्यक्तिगत स्तर पर लगातार आंदोलन करते आ रहे हैं। यही वजह है कि उनकी सक्रियता ने भाजपाइयों के भी होश फाख्ता कर दिए हैं।

राजेश अग्रवाल को सम्मानित करते भाजपा नेता डॉक्टर विनोद पागरानी।

यही वजह है कि सपा के टिकट के अन्य चाह्वानों की तरह भाजपाई भी नहीं चाहते कि राजेश अग्रवाल को टिकट मिले। वो जानते हैं कि जो राजेश अग्रवाल पिछले विधानसभा चुनावों में बरेली शहर विधानसभा सीट से बिना मजबूत तैयारी के चुनाव लड़कर लगभग एक लाख वोट ला सकते हैं वो कैंट सीट से लड़ेंगे तो निश्चित तौर पर जीत उनके कदमों में होगी क्योंकि राजेश अग्रवाल ने लगभग तीन दशक से इसी कैंट विधानसभा सीट से ही तो सियासत करते आ रहे हैं।

कैंट सीट पर राजेश अग्रवाल की मजबूती का पुख्ता प्रमाण पिछला नगर निगम चुनाव भी दे रहा है जब राजेश अग्रवाल ने भाजपा विधायक के बूथ से भी जीत हासिल कर ली जबकि सपा के मेयर पद के उम्मीदवार डॉक्टर आईएस तोमर को इसी बूथ पर हार का सामना करना पड़ा था। स्पष्ट है कि राजेश अग्रवाल अपने लिए भाजपा के गढ़ में भी सेंध लगाने का दम रखते हैं।


पिछले कुछ दिनों में राजेश अग्रवाल ने अपनी सक्रियता कई गुना बढ़ा दी है। वह जन आंदोलनों के साथ ही सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। सामाजिक संस्थाएं भी उन्हें उसी मंच पर सम्मानित कर रही हैं जिस मंच पर भाजपा सरकार के मंत्री और विधायक को सम्मानित किया जा रहा है। धर्मगुरुओं के साथ भी उनकी काफी नजदीकियां देखने को मिल रही हैं।


बात अगर जन मुद्दों पर जन आंदोलनों की करें तो पिछले 16 महीने से वह नगर निगम के साथ उस हाउस टैक्स की विसंगतियों की लड़ाई लड़ रहे हैं जो जीआईएस सर्वे के कारण शहरवासियों को झेलनी पड़ रही हैं।


दूसरा मुद्दा नगर निगम की दुकानों के किराये में की गई कई गुना बढ़ोतरी का है। नगर निगम के 1400 किरायेदार व्यापारी ने इंसाफ के लिए राजेश अग्रवाल का दरवाजा खटखटाया और राजेश अग्रवाल उन सैकड़ों दुकानदारों को लेकर सड़कों पर उतर पड़े। यह लड़ाई पिछले चार माह से लगातार जारी है।


तीसरा मुद्दा शास्त्री मार्केट की दुकानों का है। जब इन दुकानों के लिंटर गिरे तो नगर निगम ने दुकानदारों को दुकानें खाली करने का फरमान सुना दिया। राजेश अग्रवाल ने लिंटर डालने की अनुमति दिलवाई। इसके अलावा आवारा पशुओं सहित कई अन्य छोटे-बड़े मुद्दे और नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने का काम भी राजेश अग्रवाल पूरी मुखरता के साथ कर रहे हैं। जो कैंट विधानसभा सीट का कोई और दावेदार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। दिलचस्प बात है कि जिस माहौल में विपक्ष के कुछ नेता मुकदमा दर्ज होने के डर से सार्वजनिक बयान देने तक से कतरा रहे हैं उस माहौल में राजेश अग्रवाल अपने दम पर पीड़ितों को साथ लेकर सड़कों पर आंदोलन करते नजर आ रहे हैं। असल मायनों में विपक्ष की सही भूमिका राजेश अग्रवाल ही निभा रहे हैं।


राजेश अग्रवाल लगातार पीडीए की बैठकें रोज अपने आवास पर या जनता के बीच जाकर करते रहते हैं। उनके कार्यालय पर तो रोज ही पीडीए के लोगों की भीड़ अपने काम करवाने के लिए उमड़ पड़ती है। कई बार तो इस भीड़ में कुछ भाजपा नेता और कार्यकर्ता भी नजर आते हैं।


ये तो बात रही आंदोलनों और जनता के मुद्दों की। समाजवादी पार्टी का असली मुकाबला तो भाजपा के हिन्दुत्व कार्ड से है। राजेश अग्रवाल यह बात अच्छी तरह जानते हैं। यही वजह है कि धार्मिक आयोजनों में भी उनकी भागीदारी लगातार बढ़ती जा रही है। सावन के महीने में जब कांवड़ियों का दौर चला तो उनकी सेवा के लिए राजेश अग्रवाल सबसे आगे खड़े दिखाई दिए। उन्होंने कई स्थानों पर व्यक्तिगत और पार्टी स्तर पर भी कांवड़ियों का स्वागत पुष्पवर्षा के साथ किया।

 

शहर में जब महाकाली यात्रा निकली तो राजेश अग्रवाल ने बरेली कॉलेज से चौकी चौराहे तक भव्य स्वागत किया।

अग्रवाल समाज के लिए भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने अग्रवाल सेवा समिति के लिए महाराजा अग्रसेन के नाम से एक द्वार स्वीकृत करवाया है। वह गणेश चतुर्थी के मौके पर कई जगहों पर आयोजित गणेश पूजन करते भी नजर आए। साथ ही थिएटर अड्डा में जाकर रंगमंच के कलाकारों का हौसला बढ़ाते भी दिखाई दिए। आगामी दिनों में प्रजापति समाज सहित कई अन्य कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति दिखने वाली है।

 

बहरहाल, राजेश अग्रवाल की यह सक्रियता भाजपा की मुश्किलें बढ़ाती नजर आ रही है। अपनी इन गतिविधियों और तीन दशक की मेहनत की बदौलत राजेश अग्रवाल बरेली कैंट विधानसभा सीट के सबसे प्रबल हिन्दू दावेदार बन चुके हैं। अगर सपा इस सीट से हिन्दू उम्मीदवार उतारने का निर्णय लेती है तो राजेश अग्रवाल निश्चित तौर पर वह चेहरा होंगे। राजेश अग्रवाल के समर्थकों का मानना है कि पार्टी अगर जिताऊ उम्मीदवार के आधार पर प्रत्याशी चुनेगी तो राजेश अग्रवाल पहले पायदान पर होंगे क्योंकि अगर तीन दशक से जनता के काम करवाते आ रहे राजेश अग्रवाल अगर जिताऊ उम्मीदवार नहीं हो सकते तो चुनावी बरसात में शोर मचाने वाले सियासी मेढकों को जनता वोट कैसे दे सकती है?

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