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महिला उद्यमिता की मिसाल बनीं डॉ. फहमी खान, केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने नवाज़ा महिला उद्यमी अवार्ड से, जानिए कैसे बनीं बरेली की पहचान और मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रेरणा?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो राहें खुद-ब-खुद बन जाती हैं। बरेली की रहने वाली डॉ. फहमी खान इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं। वह न सिर्फ़ एक सफल डॉक्टर हैं, बल्कि अपनी मेहनत, ईमानदारी और समाजसेवा के कारण आज एक प्रेरणास्रोत महिला उद्यमी के रूप में पहचानी जा रही हैं। इसी जुनून और समर्पण का नतीजा है कि हाल ही में एक भव्य समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उन्हें महिला उद्यमी अवार्ड से सम्मानित किया। बरेली के सैटेलाइट बस अड्डे के पास स्थित मैक्सालाइफ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल एंड फहमी आईवीएफ सेंटर की डायरेक्टर और जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर फहमी खान को महिला उद्यमी अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

बता दें कि मैक्सा लाइफ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल एंड फहमी आईवीएफ सेंटर की डायरेक्टर फहमी खान लगभग दो दशक से चिकित्सा के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाती आ रही हैं और उनकी गिनती बरेली की जानी-मानी गायनेकोलॉजिस्ट के रूप में होती है। लगभग दो साल पहले ही उन्होंने सैटेलाइट बस अड्डे के पास अपने आईवीएफ सेंटर की शुरुआत अत्याधुनिक मशीनों के साथ की है। इतने कम समय में ही उनके इस हॉस्पिटल ने काफी लोकप्रियता हासिल कर ली है। उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनके हॉस्पिटल में लोअर क्लास, मिडिल क्लास मरीजों को भी बेहद कम दामों में दी जा रही हाईक्लास सुविधाएं हैं। यही वजह है कि यहां न सिर्फ बरेली और आसपास के जिलों से बल्कि उत्तराखंड से भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। इससे पूर्व डॉक्टर फहमी खान बेग हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रही थीं।


एक कुशल उद्यमी होने के साथ ही सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभाती आ रही हैं। वह अपने पति और वरिष्ठ सपा नेता डॉक्टर अनीस बेग के साथ समाजसेवा के कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल के तौर पर डॉक्टर फहमी खान को जाना जाता है। वह दीपावली में जरूरतमंदों के साथ खुशियां बांटती हैं तो वहीं, होली के रंगों में भी सराबोर नजर आती हैं। वहीं, इस्लाम में उनकी अटूट आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह उमरा भी कर चुकी हैं। अगर कहें कि डॉक्टर फहमी खान अपने आप में गंगा-जमुनी तहजीब का अनूठा संगम हैं तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
डॉ. फहमी खान की कहानी सिर्फ एक डॉक्टर या उद्यमी की सफलता नहीं है, बल्कि यह उस आस्था, उसूल और सेवा भाव की दास्तान है जो हर इंसान को प्रेरित करती है। महिला उद्यमी अवार्ड उनके अब तक के सफर की एक पहचान है, लेकिन हकीकत में यह सम्मान उन तमाम महिलाओं के लिए है, जो सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने का साहस जुटाती हैं।

महिलाओं के लिए रोल मॉडल

आज डॉ. फहमी खान न सिर्फ़ बरेली, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुकी हैं। खासकर मुस्लिम महिलाओं के लिए, जो समाजिक झिझक के कारण घर से बाहर निकलने में हिचकती हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि परंपराओं को संजोकर भी सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है। यही कारण है कि उन्हें आज एक आइकन और प्रेरणास्रोत के रूप में देखा जा रहा है।

सिद्धांतों पर अडिग, मुनाफ़े से ऊपर उसूल

आज के दौर में जहां मेडिकल सेक्टर पैसे कमाने का जरिया बन चुका है, वहीं डॉ. फहमी खान अपने उसूलों और सिद्धांतों से समझौता नहीं करतीं।
आईवीएफ सेंटर में उन्होंने साफ़ कर दिया है कि बच्चे का जन्म केवल पति-पत्नी के स्पर्म से होगा। बाहरी डोनर का प्रयोग करना उनके लिए मुनाफ़े का ज़रिया हो सकता था, लेकिन उन्होंने इस रास्ते को ठुकरा दिया। उनके अनुसार यह उनके सिद्धांतों और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।
उनके पास ऐसी अत्याधुनिक मशीनें हैं जो कमजोर क्वालिटी के स्पर्म को भी गर्भधारण योग्य बना देती हैं। वह कहती हैं- “हमारे यहां सिर्फ पति-पत्नी के ही स्पर्म से बच्चे का जन्म होता है, किसी अन्य डोनर का इस्तेमाल मेरे उसूलों के खिलाफ है।”

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