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डॉ. अनीस बेग ने दिया बीएलए को सम्मान, कराया बेहतरीन कामयाब प्रोग्राम

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली कैंट विधानसभा सीट की राजनीति इन दिनों दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। नए साल से पहले ही सियासी तापमान बढ़ चुका है और टिकट की दावेदारी को लेकर अंदरखाने घमासान तेज है। इस पूरे सियासी शोर-शराबे के बीच समाजवादी पार्टी के एक नेता ने ऐसा सधा हुआ और धारदार कदम उठाया है, जिसने विरोधियों की नींद उड़ा दी है। यह नेता हैं—डॉक्टर अनीस बेग। पेशे से बच्चों के डॉक्टर और राजनीति में विरोधियों का ‘इलाज’ करने के लिए पहचाने जाने वाले अनीस बेग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजनीति सिर्फ भाषणों और पोस्टरों से नहीं, बल्कि संगठन और जमीन से लड़ी जाती है।
पिछले लगभग तीन वर्षों से बरेली कैंट विधानसभा क्षेत्र में अनीस बेग की सक्रियता लगातार बढ़ती गई है। वह उन नेताओं में नहीं हैं जो चुनाव नजदीक आते ही मैदान में उतरते हैं। उनका तरीका अलग है। संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना और बूथ स्तर तक पकड़ बनाना—यही उनकी राजनीति का आधार है। समाजवादी पार्टी के जिला चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने जो नेटवर्क तैयार किया है, वही अब उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है।
अनीस बेग सिर्फ सांगठनिक बैठकों तक सीमित नहीं रहते। वह व्यक्तिगत स्तर पर भी कार्यकर्ताओं से जुड़ते हैं। किसी का पारिवारिक कार्यक्रम हो, किसी कार्यकर्ता को परेशानी हो या संगठन में किसी को हौसले की जरूरत हो—डॉक्टर बेग हर जगह मौजूद नजर आते हैं। यही वजह है कि बरेली कैंट ही नहीं, पूरे जिले में वह समाजवादी पार्टी के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं जो सालों से लगातार सम्मेलन, बैठकें और सम्मान समारोह आयोजित करते आ रहे हैं। राजनीति में यह निरंतरता ही उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।
इसी कड़ी में शनिवार को बरेली के आईएमए हॉल में आयोजित बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) सम्मान समारोह ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी। यह कोई साधारण आयोजन नहीं था। इस समारोह में कैंट विधानसभा क्षेत्र के सभी 368 बूथों के बीएलए शामिल हुए। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी अपने आप में बड़ा संदेश थी। खास बात यह रही कि यह आयोजन समाजवादी पार्टी महानगर इकाई की ओर से 28 और 29 दिसंबर को प्रस्तावित बीएलए सम्मेलन से ठीक पहले किया गया। ऐसे में इसे महज संयोग नहीं, बल्कि रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सियासी जानकार इस आयोजन को अनीस बेग की जमीनी पकड़ का खुला प्रदर्शन मान रहे हैं। राजनीति में शक्ति प्रदर्शन अक्सर रैलियों और रोड शो से होता है, लेकिन संगठन की राजनीति में असली ताकत बूथ पर होती है। बूथ लेवल एजेंट चुनावी व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। वही मतदान के दिन पार्टी और प्रत्याशी की असली ताकत बनते हैं। ऐसे में एक साथ सभी बीएलए को सम्मानित करना यह दिखाता है कि अनीस बेग की नजर कैंट विधानसभा के हर बूथ पर है।

समारोह को संबोधित करते डॉक्टर अनीस बेग।

इस समारोह में डॉक्टर अनीस बेग ने बीएलए को लोकतंत्र की रीढ़ बताते हुए उनका सम्मान किया। माला पहनाकर, आत्मीय शब्दों में उन्होंने यह संदेश दिया कि पार्टी की जीत-हार का असली फैसला बूथ पर होता है। इस दौरान मौजूद बीएलए ने भी अनीस बेग के नेतृत्व में पार्टी को मजबूत करने का संकल्प लिया। यह दृश्य सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि आने वाले सियासी संघर्ष की झलक थी।
राजनीति में धारणा यानी परसेप्शन का बड़ा महत्व होता है। और इस मोर्चे पर डॉक्टर अनीस बेग अपने विरोधियों से कोसों आगे निकलते दिख रहे हैं। टिकट के अन्य दावेदार जहां अब भी संगठन की ओर देख रहे हैं, वहीं अनीस बेग लगातार जमीन पर काम कर रहे हैं। कोई अखिलेश यादव की किसी टिप्पणी को लेकर उत्साहित है, कोई टिकट दिलाने वाले कथित दलालों की चौखट पर माथा टेक रहा है। इसके उलट अनीस बेग न तो शोर मचा रहे हैं और न ही बयानबाजी में उलझे हैं। वह चुपचाप अपना संगठन खड़ा कर रहे हैं।
एक के बाद एक सधे हुए राजनीतिक ‘स्ट्रोक’ से अनीस बेग सचमुच अपने विरोधियों का इलाज करते नजर आ रहे हैं। उनकी सक्रियता, लोकप्रियता और संगठन पर पकड़ ने उन्हें दावेदारी की दौड़ में सबसे आगे ला खड़ा किया है। आज हालात यह हैं कि कैंट विधानसभा सीट पर टिकट के अन्य दावेदार उनके आसपास भी फटकते नहीं दिखते। खास तौर पर मुस्लिम दावेदारों के लिए यह सम्मेलन किसी झटके से कम नहीं रहा।
हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। मुस्लिम दावेदारों पर तो अनीस बेग की दावेदारी भारी पड़ती दिख रही है, लेकिन हिंदू दावेदारों में राजेश अग्रवाल जैसे नाम अब भी चुनौती बने हुए हैं। कैंट विधानसभा सीट का सामाजिक समीकरण हमेशा से जटिल रहा है। यहां जाति, धर्म और स्थानीय समीकरणों की बड़ी भूमिका रहती है। ऐसे में सिर्फ संगठन ही नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन भी टिकट के फैसले में अहम होगा।


इसी बीच एक और बड़ा सियासी गणित चर्चा में है। बताया जा रहा है कि कैंट विधानसभा सीट पर एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के तहत करीब एक लाख मतदाता कम हो सकते हैं। इनमें बड़ी संख्या हिंदू मतदाताओं की बताई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। मतदाता सूची में इस तरह का बदलाव अनीस बेग के लिए रास्ता आसान कर सकता है। हालांकि यह अभी संभावनाओं के दायरे में है, लेकिन राजनीति संभावनाओं से ही दिशा पकड़ती है।
डॉक्टर अनीस बेग की राजनीति का सबसे मजबूत पक्ष यह है कि वह किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं। बच्चों के डॉक्टर होने के नाते उनकी सामाजिक स्वीकार्यता व्यापक है। लोग उन्हें सिर्फ नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक मददगार इंसान के रूप में भी देखते हैं। यही सामाजिक पूंजी उनकी सियासी पूंजी बनती जा रही है। जब राजनीति में भरोसे का संकट हो, तब ऐसे चेहरे अलग चमकते हैं।
बरेली कैंट की सियासत नए साल में किस करवट बैठेगी, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है। लेकिन इतना तय है कि डॉक्टर अनीस बेग ने अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। उन्होंने यह संदेश दे दिया है कि टिकट की दावेदारी सिर्फ दफ्तरों और दरबारों से नहीं तय होगी, बल्कि बूथ से तय होगी। ‘ऑपरेशन बीएलए’ की सफलता इसी की तस्दीक है।


आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व क्या फैसला करता है, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन मौजूदा हालात में इतना कहना गलत नहीं होगा कि बरेली कैंट की सियासत में डॉक्टर अनीस बेग ने शतरंज की बिसात पर अपनी चाल चल दी है। अब गेंद विरोधियों के पाले में है। नए साल में क्या यह डॉक्टर विधानसभा की कुर्सी तक पहुंचेगा या नहीं—इसका जवाब वक्त देगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि सियासी मरीजों की धड़कनें तेज हो चुकी हैं।

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