नीरज सिसौदिया, नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ उनके ही अपनों ने बगावत बुलंद कर दी है। बुधवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। वहीं, केशव प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर अपना बयान दोहराते हुए कहा कि सरकार से बड़ा संगठन होता है।
लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं होने के कारण चल रहे पार्टी में मंथन एवं समीक्षाओं के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने बुधवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। भाजपा में संगठन एवं सरकार में बड़ा कौन मुद्दा गरमाने के बाद श्री भूपेन्द्र सिंह चौधरी और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को पाटर्ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से अलग-अलग मुलाकात की, जिससे राज्य के नेतृत्व को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
माना जा रहा है कि चौधरी ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस राज्य में पार्टी के संगठनात्मक मामलों से संबंधित कई मुद्दों से प्रधानमंत्री को अवगत कराया। सूत्रों के अनुसार, चौधरी ने केंद्रीय नेतृत्व को राज्य में होने वाले उपचुनाव की तैयारियों और संगठन-सरकार के बीच चल रही तनातनी को लेकर रिपोटर् सौंपी है। श्री चौधरी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद श्री शाह से भेंट की। सूत्रों के अनुसार, श्री नड्डा ने कल श्री चौधरी को सरकार और संगठन के मनमुटाव की चर्चाओं को रोकने के लिए कहा है।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के मुकाबले कम सीटें पाने के बाद प्रदेश के नेतृत्व को लेकर भाजपा के भीतर अलग-अलग आवाजें उठ रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य के बीच मतभेदों की खबरों को तब हवा मिली जब श्री मौर्य ने 14 जुलाई को लखनऊ में हुई पाटर्ी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में कहा कि ‘संगठन हमेशा सरकार से बड़ा होता है‘। भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा भी इस बैठक में उपस्थित थे।
मौर्य के बयान को योगी आदित्यनाथ पर हमले के रूप में देखा गया। इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में चुनावी हार के लिए अति आत्मविश्वास को भी परोक्ष रूप से जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि पाटर्ी विपक्षी गठबंधन‘इंडिया’के प्रचार अभियान का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं कर सकी। नड्डा से मुलाकात के अगले ही दिन उपमुख्यमंत्री श्री मौर्य ने बुधवार को फिर से ‘संगठन, सरकार से बड़ा है’वाला बयान दोहराया। मौर्य के कार्यालय ने ‘एक्स’पर एक पोस्ट में कहा, ‘संगठन सरकार से बड़ा है, कार्यकर्ताओं का दर्द मेरा दर्द है। संगठन से बड़ा कोई नहीं, कार्यकर्ता ही गौरव हैं।’
हालांकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से श्री मौर्य और चौधरी से बात करने की पहल को 10 विधानसभा सीटों के आगामी उपचुनावों से पहले संगठन में खामियों को दुरुस्त करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के लिए इन सीटों पर जीतने का दबाव है। विधानसभा की जिन सीटों पर चुनाव कराये जाने हैं उनमें से भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और समाजवादी पाटर्ी के पास पांच-पांच सीटें थीं। लोकसभा चुनाव में विपक्ष के प्रदर्शन और भाजपा को लगे झटके के बाद संगठन में चल रही खींचतान भाजपा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से भाजपा के एक प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में उभरने में उत्तर प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
उधर, योगी आदित्यनाथ के समर्थक उन्हें एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में देखते हैं क्योंकि उन्होंने पार्टी के हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाया है और कानून-व्यवस्था पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है। पार्टी के सूत्रों ने स्वीकार किया कि राज्य में कई नेताओं की टिप्पणियों ने एक अनुशासित पार्टी के रूप में भाजपा की छवि को धूमिल किया है। हालांकि निराशाजनक चुनाव परिणामों के बाद नेताओं के अपनी मन की भावनाओं को बाहर निकालना अनपेक्षित नहीं है।
लोकसभा चुनावों में, सपा और कांग्रेस के ‘इंडिया’ गठबंधन ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 43 पर जीत हासिल की है जबकि भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 36 सीटें जीती हैं। राजग को 2014 में 75 और 2019 में 64 सीटें मिली थीं।
वहीं, गृहमंत्री अमित शाह बुधवार दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे। दोनों के बीच क्या बातचीत हुई इस पर कोई जानकारी शेयर नहीं की गई है। इससे पहले यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से तकरीबन 1 घंटे तक मुलाकात की थी। जैसे ही बैठक खत्म हुई, जेपी नड्डा ने यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के साथ भी बैठक की।
उधर, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी उपचुनावों की तैयारी में जुट गए हैं। उन्होंने बुधवार सुबह पार्टी नेताओं और मंत्रियों के साथ बैठक की। हालांकि, इस बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री नहीं थे। कहा जा रहा है कि उन्होंने अपनी सुपर 30 टीम बनाई है, जो आगामी चुनावों में पार्टी की जीत का रास्ता बनाएगी। इधर, सूत्रों का कहना है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व यूपी में किसी तरह का बदलाव नहीं करना चाहता। नेतृत्व ने राज्य के नेताओं को एकजुट रहने और चुनाव की तैयारी में जुट जाने को कहा है।
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