नीरज सिसौदिया, बरेली
नगर निगम की दुकानों में किराया वृद्धि और नामांतरण को लेकर मचे घमासान के बीच नगर निगम पार्षद राजेश अग्रवाल एक बार फिर दुकानदारों की आवाज बनकर सामने आए हैं। 2 फरवरी 2026 को नगर निगम की दुकानों के सैकड़ों किराएदार पार्षद राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में नगर निगम कार्यालय पहुंचे और महापौर डॉ. उमेश गौतम से मुलाकात कर अपनी समस्याएं उनके सामने रखीं।
इस दौरान माहौल पूरी तरह से संघर्ष और आक्रोश से भरा रहा। दुकानदारों का कहना था कि नगर निगम द्वारा पारित प्रस्तावों के नाम पर उन पर जबरन किराया बढ़ाने और नामांतरण के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इस पूरे आंदोलन की अगुवाई कर रहे पार्षद राजेश अग्रवाल ने साफ शब्दों में कहा कि यदि नगर निगम से कोई गलत प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो उसमें सुधार करने की जिम्मेदारी भी नगर निगम की ही होती है, न कि दुकानदारों को डराकर उनसे वसूली करने की।
महापौर से बातचीत के दौरान राजेश अग्रवाल ने बेहद ठोस तर्क रखते हुए कहा कि नगर निगम की मौजूदा नीति में पुराने दुकानदारों के साथ साफ तौर पर भेदभाव हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि आज नगर निगम किसी नई दुकान का आवंटन करता है तो उसका किराया कम होता है और प्रीमियम राशि भी कम ली जाती है, लेकिन इसके ठीक उलट, जो दुकानदार वर्षों से नगर निगम के किराएदार हैं, उनका किराया ज्यादा तय किया जा रहा है।
राजेश अग्रवाल ने यह भी कहा कि यदि कोई पुराना दुकानदार नामांतरण करवाता है तो उससे नई दुकान की तुलना में कहीं अधिक प्रीमियम वसूला जा रहा है, जबकि वह दुकानदार पहले भी प्रीमियम राशि नगर निगम को दे चुका है। उन्होंने इसे सरासर अन्याय बताते हुए कहा कि यह नीति न तो तर्कसंगत है और न ही न्यायसंगत।
राजेश अग्रवाल ने महापौर डॉ. उमेश गौतम को गंभीर आरोपों से अवगत कराते हुए बताया कि नगर निगम के राजस्व निरीक्षक टिंकू सिंह दुकानदारों को लगातार भयभीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टिंकू सिंह दुकानों को सील करने की धमकी देकर दुकानदारों से अवैध वसूली कर रहे हैं।
आरोप लगाया गया कि मोटी रकम लेकर नगर निगम की दुकानों का गलत तरीके से नामांतरण किया जा रहा है, जिसकी जानकारी न तो कार्यकारिणी को दी जा रही है और न ही नगर निगम बोर्ड को। राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों को ताक पर रखकर की जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि जो दुकानदार अपनी दुकानों में पुताई या मरम्मत जैसे छोटे-मोटे काम करवा रहे हैं, उन्हें भी डराया जा रहा है और सील करने की धमकी दी जाती है। इतना ही नहीं, आरोप है कि सील की गई दुकानों को पैसे लेकर दोबारा खोल दिया जाता है, जो खुलेआम भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
राजेश अग्रवाल ने महापौर को यह भी बताया कि नगर निगम की एक कमेटी की बैठक पहले ही हो चुकी है, लेकिन उस बैठक का कार्यवृत्त अब तक जारी नहीं किया गया है। यह स्थिति भी दुकानदारों के बीच असमंजस और भय पैदा कर रही है।

उन्होंने याद दिलाया कि 25 अगस्त 2025 को हुई बोर्ड बैठक में स्वयं महापौर डॉ. उमेश गौतम द्वारा नामांतरण और किराया वृद्धि के मुद्दे पर एक कमेटी का गठन किया गया था। उस कमेटी के सामने यह तथ्य भी रखा गया था कि नगर निगम यदि आज दुकानों को प्रीमियम पर देता है, तो किराया और प्रीमियम दोनों कम होते हैं, जबकि पुराने किराएदारों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
कमेटी ने इन खामियों को देखते हुए अपना निर्णय लिया, जिसे आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाना है, लेकिन उसके बावजूद राजस्व निरीक्षक टिंकू सिंह द्वारा लगातार दुकानदारों पर दबाव बनाया जा रहा है।

महापौर को सौंपे गए लिखित ज्ञापन में राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि जब तक बोर्ड की बैठक नहीं हो जाती, तब तक दुकानदारों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक दबाव न बनाया जाए। दुकानदारों से वित्तीय वर्ष 2024-25 के पुराने किराए की दरों पर ही किराया जमा कराया जाए, जब तक कोई अंतिम निर्णय न हो जाए। राजस्व प्रभारी टिंकू सिंह को तत्काल उनके पद से हटाया जाए, ताकि निष्पक्ष जांच और कार्रवाई हो सके।
पूरे घटनाक्रम में साफ दिखाई दिया कि राजेश अग्रवाल केवल एक पार्षद नहीं, बल्कि दुकानदारों के लिए संघर्ष की आवाज बनकर खड़े हैं। उन्होंने न सिर्फ सैकड़ों दुकानदारों को एकजुट किया, बल्कि नगर निगम की नीतियों में मौजूद खामियों को तर्क के साथ उजागर किया।
दुकानदारों का कहना है कि यदि राजेश अग्रवाल उनके साथ खड़े न होते, तो वे अपनी बात शासन और प्रशासन तक नहीं पहुंचा पाते। उनका मानना है कि यह लड़ाई सिर्फ किराए की नहीं, बल्कि रोजी-रोटी और सम्मान की लड़ाई है।

इस पूरे मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और दुकानदारों के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि महापौर और नगर निगम प्रशासन राजेश अग्रवाल की मांगों पर क्या कदम उठाता है, और दुकानदारों को कब तक राहत मिलती है।





