नीरज सिसौदिया, जालंधर
डेरा बाबा रुद्रानंद में आध्यात्मिक और धार्मिक वातावरण के बीच भक्ति, श्रद्धा और स्मृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। आज यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख बनवीर सिंह ने पहुंचकर पूज्य 1008 श्री हेमानन्द जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर डेरा परिसर में साधु-संतों, श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
उल्लेखनीय है कि डेरा बाबा रुद्रानंद में ब्रह्मलीन 1008 सुग्रीवानंद जी महाराज की प्रथम पुण्य तिथि के उपलक्ष्य में 15 फरवरी से 22 फरवरी तक भव्य धार्मिक आयोजन किया जा रहा है। इस सात दिवसीय आयोजन के अंतर्गत आज से 251 श्रीमद्भागवत सप्ताह का शुभारंभ हुआ है, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक चेतना और भक्ति का अनुपम अवसर माना जा रहा है।

डेरा प्रबंधन के अनुसार, यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि गुरु परंपरा, सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता के संदेश को आगे बढ़ाने का प्रयास भी है। ब्रह्मलीन सुग्रीवानंद जी महाराज के तप, त्याग और साधना को स्मरण करते हुए उनके अनुयायी बड़ी संख्या में डेरा बाबा रुद्रानंद पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन कथा, प्रवचन, हवन-पूजन और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है।
आज के कार्यक्रम में बनवीर सिंह द्वारा पूज्य हेमानन्द जी महाराज से आशीर्वाद लेना केवल औपचारिक भेंट नहीं रहा, बल्कि इसे संगठन और संत समाज के बीच सांस्कृतिक व आध्यात्मिक संवाद के रूप में भी देखा जा रहा है। संतों ने समाज में नैतिक मूल्यों, राष्ट्रभक्ति और सेवा भाव को बढ़ावा देने पर जोर दिया। वहीं स्वयंसेवकों ने गुरुजनों के मार्गदर्शन को समाज निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
आयोजकों ने बताया कि 251 श्रीमद्भागवत सप्ताह के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों से आए कथावाचक भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, धर्म और कर्म के सिद्धांतों पर प्रवचन देंगे। इससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ जीवन मूल्यों की प्रेरणा भी मिलेगी। इस आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग भाग ले रहे हैं।

डेरा बाबा रुद्रानंद में चल रहे इस भव्य आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह है। श्रद्धालुओं का कहना है कि ब्रह्मलीन सुग्रीवानंद जी महाराज की पुण्य स्मृति में हो रहे इस कार्यक्रम से न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और सद्भाव का संदेश भी फैल रहा है। आगामी दिनों में और अधिक संत-महात्माओं की उपस्थिति से यह आयोजन और भी भव्य रूप लेने की उम्मीद है।





