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नगर निगम बोर्ड के फैसलों की अनदेखी पर भड़के सतीश चंद्र कातिब, उठाए कई सवाल, धरना-प्रदर्शन की दी चेतावनी, नगर आयुक्त संजीव मौर्य ने साधी चुप्पी, पढ़ें क्या है पूरा मामला?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों के महीनों बाद भी उनका अनुपालन न होने से नाराज भाजपा के वरिष्ठ पार्षद और कार्यकारिणी समिति सदस्य सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा ने नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के नाम एक पत्र जारी करते हुए प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, मम्मा के सवालों का नगर आयुक्त ने चुप्पी साध ली। मम्मा ने साफ चेतावनी दी है कि यदि बोर्ड के आदेशों को आगामी 21 अप्रैल को होने वाली विशेष बजट बैठक से पहले उनके सभी सवालों का उचित एवं संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो वह नगर निगम में ही धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि नियमानुसार नगर निगम कार्यकारिणी की प्रतिमाह एक बैठक होनी चाहिए और नगर निगम बोर्ड की कम से कम दो माह के भीतर एक बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जानी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। जो नियमों का घोर उल्लंघन है।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम बोर्ड की 29 सितम्बर 2025 की बैठक स्थगित होने के बाद 30 सितम्बर 2025 को लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर अमल सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया गया था। इस संबंध में नगर निगम कार्यकारिणी सदस्य और पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा पहले भी नगर आयुक्त को पत्र देकर विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि संबंधित विभागाध्यक्षों को बोर्ड के निर्णयों के अनुपालन हेतु पत्र भेजे जाने की बात कही गई थी।
इसके बावजूद, 13 अप्रैल 2026 तक किसी भी निर्णय पर ठोस प्रगति न होना अब निगम प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। मम्मा ने बेहद तीखे शब्दों में पूछा है कि जब नगर निगम बोर्ड, महापौर और अधिष्ठाता सदन के आदेशों का पालन ही नहीं हो रहा, तो फिर इन आदेशों की विभागाध्यक्षों की नजर में आखिर क्या अहमियत है।
मम्मा का यह सवाल केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नगर निगम बोर्ड की गरिमा और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। बोर्ड बैठकों में पारित प्रस्ताव शहर के विकास, सफाई, सड़क, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, कर व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े होते हैं। ऐसे में महीनों तक फैसलों का फाइलों में दबा रहना न केवल प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है, बल्कि इससे आम जनता के बीच भी गलत संदेश जाता है।
राजनीतिक गलियारों में इस पत्र को आने वाली बजट बैठक से पहले एक बड़े दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। बजट बैठक नगर निगम की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक मानी जाती है, जहां विकास योजनाओं, वित्तीय प्रावधानों और विभागीय प्राथमिकताओं पर चर्चा होती है। ऐसे समय में बोर्ड के पुराने फैसलों के अनुपालन का मुद्दा उठना अधिकारियों के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
सतीश चंद्र सक्सेना नगर निगम की राजनीति में एक सक्रिय और मुखर चेहरा माने जाते हैं और वह बरेली शहर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार भी हैं। शहर के जनहित और निगम प्रशासन की जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर वह लगातार अपनी स्पष्ट राय रखते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने बोर्ड के निर्णयों को लागू न किए जाने को सीधे तौर पर प्रशासनिक जवाबदेही और बोर्ड की प्रतिष्ठा से जोड़ दिया है।
उनके पत्र की प्रतिलिपि महापौर को भी भेजी गई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि वह इस मुद्दे को केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि इसे बोर्ड और सदन की प्रतिष्ठा के प्रश्न के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। इससे आने वाले दिनों में महापौर और नगर निगम प्रशासन के बीच भी इस विषय पर गंभीर चर्चा की संभावना बढ़ गई है।
नगर निगम के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यदि विशेष बजट बैठक में यह मामला जोर-शोर से उठा, तो कई विभागाध्यक्षों से जवाब-तलब हो सकता है। साथ ही लंबित प्रस्तावों की समीक्षा और समयबद्ध अनुपालन के लिए नई व्यवस्था की मांग भी सामने आ सकती है।
इस संबंध में जब नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पत्र पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्षद सतीश चंद्र सक्सेना कातिब उर्फ मम्मा की इस सख्त नाराजगी ने साफ कर दिया है कि अब बोर्ड के फैसलों की अनदेखी आसान नहीं होगी। आने वाली बजट बैठक में यह मुद्दा निगम राजनीति का केंद्र बन सकता है और अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा फैसला भी तय कर सकता है।

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