नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली शहर का चौपला–बदायूं रोड सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी की धुरी है। इसी रास्ते से नौकरीपेशा लोग अपने कार्यस्थलों तक पहुंचते हैं, बच्चे स्कूल जाते हैं, व्यापारी अपने कारोबार को गति देते हैं और श्रद्धालु धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ते हैं। लेकिन बीते कई वर्षों में यह मार्ग राहत के बजाय परेशानी का प्रतीक बन गया है। लगातार लगने वाले जाम, दुर्घटनाओं का खतरा और घंटों की बर्बादी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।
रेलवे फ्लाईओवर बनने के बाद उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन वास्तविकता इससे उलट रही। फ्लाईओवर पर बढ़ता ट्रैफिक, आसपास के इलाकों से आने-जाने वालों का दबाव और बरसात के दौरान जलभराव की समस्या ने इस मार्ग को और जटिल बना दिया है। खासकर सुभाष नगर, मढ़ीनाथ और बदायूं रोड से जुड़े गांवों और मोहल्लों के लोगों के लिए यह रास्ता किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है।
यही वजह है कि अब चौपला–बदायूं रोड पर अंडरपास की मांग सिर्फ एक सुझाव नहीं, बल्कि एक मजबूत जनआवश्यकता बन चुकी है। अनुमान है कि इस अंडरपास के निर्माण से करीब डेढ़ लाख स्थानीय आबादी के साथ-साथ बाहरी क्षेत्रों से आने वाले लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी। इससे न केवल रोजाना की परेशानियां कम होंगी, बल्कि अनगिनत लोगों की जान भी सुरक्षित हो सकेगी, क्योंकि वर्तमान हालात में दुर्घटनाओं की आशंका हमेशा बनी रहती है।
इस मुद्दे को नई दिशा देने का काम समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रत्याशी और बरेली कैंट विधानसभा सीट से टिकट के प्रबल दावेदार राजेश अग्रवाल ने किया है। उन्होंने इस समस्या को सिर्फ उठाया ही नहीं, बल्कि इसे एक संगठित जनआंदोलन का रूप देने की पहल की। “चौपला बदायूं रोड रेल अंडरपास संघर्ष समिति” के माध्यम से समिति के संयोजक राजेश अग्रवाल ने मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा और वर्षों से अनसुनी आवाज को मंच दिया।
इस पूरी पहल की खास बात यह है कि इसमें केवल समस्या का जिक्र नहीं, बल्कि ठोस समाधान भी प्रस्तुत किया गया है। रेलवे लाइन के नीचे इज्जतनगर आईवीआरआई अंडरपास की तर्ज पर अंडरपास बनाने का प्रस्ताव एक व्यावहारिक और दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। यह स्पष्ट करता है कि यह पहल केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि जनहित में गंभीर प्रयास है।
उन्होंने बताया कि अंडरपास बनने के लाभ कई स्तरों पर देखने को मिलेंगे। सबसे पहले, बदायूं रोड, स्टेशन रोड, सिविल लाइंस और बिहारीपुर जैसे क्षेत्रों के बीच दूरी कम हो जाएगी और आवागमन अधिक सुगम हो जाएगा। इसका सीधा असर व्यापार पर पड़ेगा और स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
धार्मिक दृष्टि से भी यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। बरेली को नाथ नगरी के रूप में जाना जाता है और सुभाष नगर, मढ़ीनाथ, अलखनाथ और त्रिवटीनाथ मंदिरों तक जाने का यह मुख्य रास्ता है। सावन के महीने में जब शिवभक्त कछला से पवित्र जल लेकर कांवड़ यात्रा करते हैं, तब यहां भारी भीड़ होती है। ऐसे समय में फ्लाईओवर पर जाम और दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ जाती है। अंडरपास बनने से श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम मार्ग मिल सकेगा।
बरसात के मौसम में सुभाष नगर पुलिया पर जलभराव की समस्या भी गंभीर हो जाती है। उस स्थिति में पूरा यातायात चौपला फ्लाईओवर पर आ जाता है, जिससे घंटों जाम लगता है। यदि अंडरपास उपलब्ध होगा, तो यातायात का दबाव विभाजित हो जाएगा और आवागमन लगातार चलता रहेगा।
इसके अलावा, समय-समय पर फ्लाईओवर को मरम्मत के नाम पर बंद कर दिया जाता है। वर्तमान में भी 45 दिनों के लिए फ्लाईओवर बंद होने की स्थिति बन रही है। ऐसे में पूरा ट्रैफिक ठप पड़ जाता है और लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। अंडरपास एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस समस्या का स्थायी समाधान बन सकता है, जिससे छोटे वाहनों का आवागमन बाधित नहीं होगा।
स्थानीय लोगों के बीच राजेश अग्रवाल की इस पहल को सकारात्मक नजर से देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद किसी ने इस गंभीर समस्या को इतनी मजबूती से उठाया है। यह केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर समाधान की दिशा में उठाया गया कदम है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि जब कोई नेता ईमानदारी से जनता की आवाज उठाता है, तो वह अकेला नहीं रहता-जनता खुद उसके साथ खड़ी हो जाती है। और यही किसी भी लोकतंत्र की असली ताकत होती है।
यह पहल एक और महत्वपूर्ण संदेश देती है- जब जनप्रतिनिधि जनता की समस्याओं को अपना मुद्दा बनाते हैं और उनके समाधान के लिए सक्रिय होते हैं, तो लोकतंत्र मजबूत होता है। जनता और नेता के बीच विश्वास का संबंध बनता है, जो किसी भी समाज की प्रगति के लिए जरूरी है।
अब चौपला-बदायूं रोड अंडरपास की मांग केवल एक स्थानीय समस्या नहीं रही, बल्कि यह जनहित का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। आने वाले समय में इस पहल का क्या परिणाम निकलता है, यह भले ही भविष्य के गर्भ में हो, लेकिन इतना तय है कि इसने बरेली की राजनीति और सामाजिक विमर्श को एक नई दिशा दे दी है।
राजेश अग्रवाल का कहना है कि वह इस मुद्दे को तब तक उठाते रहेंगे जब तक इसका समाधान नहीं हो जाता। उनका यह भी कहना है कि यदि पार्टी उन्हें मौका देती है और जनता उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनती है, तो वह इस अंडरपास का निर्माण हर हाल में सुनिश्चित करेंगे।





