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जिला अध्यक्ष पद पर शुभलेश यादव की ताजपोशी के साथ ही बिथरी और आंवला विधानसभा सीट पर तय हुई सपा की हार, फरीदपुर में भी बदलना होगा उम्मीदवार, कहीं 2017 में जीरो सीटें जीतने का रिकॉर्ड दोहराने की तैयारी तो नहीं कर रही सपा, जानिये क्यों?

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नीरज सिसौदिया, बरेली
बरेली की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। समाजवादी पार्टी ने जिले की कमान शुभलेश यादव के हाथों में सौंप दी है, लेकिन यह फैसला जितना साधारण दिखता है, उसके राजनीतिक मायने उतने ही गहरे और खतरनाक नजर आ रहे हैं। पार्टी के अंदरखाने से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक एक ही चर्चा है- क्या यह ताजपोशी सपा के लिए मजबूती का संकेत है या फिर आने वाले चुनाव में हार की पटकथा?
जिला अध्यक्ष बनने के साथ ही शुभलेश यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को खड़ा करना नहीं, बल्कि टूटते हुए समीकरणों को संभालना है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि बिथरी चैनपुर और आंवला विधानसभा सीटों पर सपा की हार लगभग तय मानी जा रही है, जबकि फरीदपुर में अगर समय रहते उम्मीदवार नहीं बदला गया तो पार्टी को लगातार तीसरी बार हार का मुंह देखना पड़ सकता है।
इस पूरे समीकरण की जड़ में है जातीय संतुलन और टिकट वितरण की राजनीति। सपा पर लंबे समय से ‘यादव-मुस्लिम’ पार्टी होने का आरोप लगता रहा है। ऐसे में जब पार्टी ने जिला अध्यक्ष के तौर पर एक यादव चेहरे को आगे कर दिया, तो यह लगभग तय माना जा रहा है कि अब विधानसभा चुनाव में किसी यादव को टिकट नहीं दिया जाएगा। यही पहलू अब पार्टी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनता दिख रहा है।
बरेली जिले की तीन अहम सीटें- बिथरी चैनपुर, आंवला और फरीदपुर यादव बाहुल्य मानी जाती हैं। इन इलाकों में यादव वोट सिर्फ संख्या में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव में भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अगर इस समाज को टिकट से पूरी तरह दूर रखा जाता है, तो इसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ना तय है।
यहीं से शुरू होती है सपा की असली परेशानी। जिले में कई बड़े यादव नेता हैं, जिनका अपना मजबूत जनाधार है। इनमें पूर्व विधायक महिपाल सिंह यादव और पूर्व जिला अध्यक्ष व राष्ट्रीय सचिव वीरपाल सिंह यादव जैसे नाम प्रमुख हैं। ये सिर्फ नेता नहीं, बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों में सत्ता संतुलन तय करने वाले जमीनी चेहरे माने जाते हैं। ये वो नेता हैं जो बिथरी, आंवला और फरीदपुर सीटों का चुनाव परिणाम बदलने की पूरी ताकत रखते हैं। वीरपाल सिंह यादव और महिपाल सिंह यादव अपने-अपने पुत्रों को विधानसभा भेजना चाहते हैं और इसके लिए दोनों ही नेता जी-जान से जुटे हुए हैं।
सूत्रों की मानें तो पिछले विधानसभा चुनाव में बिथरी और आंवला सीट पर सपा की हार में इन नेताओं के समर्थकों की नाराजगी की बड़ी भूमिका रही थी क्योंकि पिछले चुनावों में इन नेताओं को टिकट नहीं दिया गया था। अब अगर एक बार फिर इनके परिवारों को टिकट से बाहर रखा जाता है, तो यह नाराजगी खुलकर सामने आ सकती है। और अगर ऐसा हुआ, तो सपा के लिए इन सीटों पर वापसी करना लगभग असंभव हो जाएगा।
स्थिति को और जटिल बनाता है फरीदपुर का समीकरण। यहां पहले से ही सपा के पूर्व प्रत्याशी विजयपाल सिंह को लेकर यादव समाज में असंतोष है। आरोप है कि जब विजयपाल सिंह बसपा से विधायक बने थे तो उन्होंने यादवों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराए थे। बाद में विजयपाल सिंह तो सपा में आ गए लेकिन यादवों की नाराजगी कम होने की जगह बढ़ती ही चली गई और सपा से भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। विजयपाल सिंह की यह लगातार तीसरी हार थी। पिछले दो चुनावों में सपा की हार के बाद भी अगर पार्टी उन्हें ही मैदान में उतारती है, तो यह फैसला आत्मघाती साबित हो सकता है। स्थानीय स्तर पर साफ संकेत हैं कि यहां चेहरा बदलने की जरूरत है।
फरीदपुर में सियाराम सागर का परिवार एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इस परिवार का प्रभाव सिर्फ एक जाति तक सीमित नहीं है, बल्कि कई वर्गों में इसकी पकड़ है। अगर सपा इस परिवार से किसी को उम्मीदवार बनाती है, तो यहां जीत की संभावना मजबूत हो सकती है। लेकिन अगर पार्टी ने फिर से विजयपाल सिंह पर ही दांव खेला तो हार लगभग तय मानी जा रही है।
बरेली की सियासत में एक और बड़ा संकेत शुभलेश यादव की ताजपोशी के दौरान देखने को मिला। समारोह में कई बड़े यादव नेताओं की गैरमौजूदगी ने साफ कर दिया कि अंदरखाने सबकुछ ठीक नहीं है। पूर्व ब्लॉक प्रमुख आदेश यादव गुड्डू, डॉक्टर जीराज सिंह यादव और सूरज यादव जैसे नेता बिथरी और आंवला विधानसभा सीट से सपा के टिकट के दावेदार हैं। इनके समर्थकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। अगर इन सभी के समर्थकों की नाराजगी एक साथ सामने आती है, तो यह सपा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।
इतिहास भी सपा के लिए चेतावनी दे रहा है। जब शुभलेश यादव पहली बार जिला अध्यक्ष बने थे, तब हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को बरेली की सभी नौ सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। यह बरेली जिले में सपा के इतिहास का सबसे खराब प्रदर्शन था। उससे पहले और बाद में पार्टी कभी इतनी बुरी तरह नहीं हारी।
इसके उलट, जब शुभलेश यादव जिला अध्यक्ष नहीं थे, तब 2022 के चुनाव में सपा को बहेड़ी और भोजीपुरा जैसी सीटों पर जीत मिली। यानी आंकड़े साफ बताते हैं कि संगठन की कमान किसके हाथ में है, इसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ता है।
अब एक बार फिर वही स्थिति बनती दिख रही है। चुनाव से करीब 9 महीने पहले शुभलेश यादव को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, 2017 में उन्हें चुनाव से ठीक पहले ही अध्यक्ष बनाया गया था, तब नतीजा क्या हुआ था, यह सभी जानते हैं। हालांकि, शुभलेश यादव इस बार सभी नौ सीटों पर सपा की जीत का दावा कर रहे हैं।
अभी तक जिले की कार्यकारिणी तक पूरी तरह गठित नहीं हो पाई है। एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन पार्टी के पास अभी तक स्पष्ट आंकड़े नहीं हैं कि किस सीट पर कितने मुस्लिम और कितने हिन्दू मतदाता हैं। पीडीए का आंकड़ा तो भूल ही जाइये।
चुनाव जैसे गंभीर मौके पर इस तरह की तैयारी सपा की रणनीतिक कमजोरी को उजागर करती है। बिना ठोस डेटा के चुनाव लड़ना, किसी अंधेरे में तीर चलाने जैसा है। हालांकि, यह भी सच है कि शुभलेश यादव अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं। वह लगातार बैठकों का दौर चला रहे हैं, बड़े नेताओं को साधने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पूर्व राज्यसभा सांसद और पूर्व जिला अध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद भी लिया, सूरज यादव से संवाद किया और संगठन के विभिन्न प्रकोष्ठों के साथ बैठकें भी की हैं।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कोशिशें समय रहते असर दिखा पाएंगी? क्योंकि राजनीति में सिर्फ मेहनत नहीं, सही फैसले भी जरूरी होते हैं और फिलहाल सपा के फैसले सवालों के घेरे में हैं।
बरेली की सियासत में आज जो तस्वीर बन रही है, वह सपा के लिए चिंता का विषय है। अगर पार्टी ने समय रहते अपने फैसलों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो बिथरी और आंवला में हार तय मानी जा रही है, जबकि फरीदपुर में भी इतिहास दोहराने का खतरा मंडरा रहा है।
कुल मिलाकर, शुभलेश यादव की ताजपोशी सपा के लिए एक नई शुरुआत कम और पुराने जख्मों को फिर से हरा करने जैसी ज्यादा नजर आ रही है। अब देखना यह होगा कि पार्टी इन संकेतों को समझती है या फिर एक बार फिर वही गलती दोहराने जा रही है, जिसकी कीमत उसे पहले भी चुकानी पड़ी है।

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